पितृ दिवस-श्रीमती सरोज डिमरी
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में पितृ दिवस पर प्रस्तुत है आज जनपद- चमोली गढ़वाल से शिक्षिका बहन श्रीमती सरोज डिमरी जी द्वारा रचित कविता:- *🙏📝पितृ दिवस- परम पूज्य पिता जी* अपना तो स्वाभिमान पिता हैं, अन्तर्मन का अभिमान पिता हैं। सफल प्रतिष्ठा, मान-सम्मान सब, जीवन की मुस्कान पिता हैं।। मानवता के इस रंगमंच पर, जीवन की हर कठिन डगर पर। सफलता का प्रशस्ति पत्र, मेरी तो पहचान पिता हैं।। जब धरती पर आँखें खोली, तुतलाती थी मेरी बोली। कभी गोद में मुझे उठाया, पकड़ हाथ चलना सिखलाया।। नीला अम्बर गहरा सागर, मात-पिता के प्यार बराबर। चीज कोई ना दुनिया में देखी, जो भी हूंँ मेरी पहचान पिता हैं।। मेरे ख्वाबों को पूरा करने को, स्वयं तपे पर बाँहों में ले मुझे झुलाया। सत्य-असत्य के परम विवेक को, नव-जीवन का पाठ पढ़ाया।। मिथ्या-झूठ नहीं सिखलाया, सत्यमार्ग चलना सिखलाया। दिव्य गुणों के खान पिता हैं, जीवन का अहसान पिता हैं।। नीले नभ की विस्तृतता में, बच्चों का विश्वास पिता हैं। अन्तरिक्ष और भूमण्डल पर, चमकता सूर्य-सा तेज पिता हैं।। देव-नक्षत्र...