संदेश

मार्च, 2023 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

नवसंवत्सर 2080- श्रीमती रेखा पुरोहित

चित्र
 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में नवसंवत्सर के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है आज जनपद- रुद्रप्रयाग  से शिक्षिका बहन श्रीमती  रेखा पुरोहित जी  द्वारा रचित कविता:- 🙏🕉️📝नवसंवत्सर 2080 इक नया प्रभात लेकर,  एक नई उम्मीद लेकर। आ गया नवसंवत्सर देखो, कुछ नया सा भाव लेकर।। आ गई नव कोपलें अब,  फूल फिर खिलने लगे। मखमली दूब से फिर,  ओढ़ ली चुनरी धरा ने।।  तितली भंँवरे फिर से अब, मधुर गीत गाने लगे। महक भीनी फैला रही, प्रकृति भी चहुँ ओर से।।  गेंदा, गुलाब, चम्पा, चमेली, फूलों से खुशबू चुराकर। आ गया नववर्ष देखो, महकती इक भोर लेकर।। उम्मीद का आंँचल पकड़,  अब नई राहें हम चलें।  हो मुश्किलें कितनी बड़ी, पर राह से हम ना डिगें।।  ज्यों संँवरती है प्रकृति,  स्वयं को ही बदलकर। स्वयं को हम भी संँवारें,  आदतें अपनी बदलकर।।  पक्षियों की चहक का,  मधुर सा संगीत लेकर। आ गया नववर्ष देखो,  इक नया सा गीत लेकर।। त्याग दें हम अपने मन की,  अब सभी दुर्भावना। छोड़ दें जो भी बुरा था,  जो बुरी थी कामना।।...

धूम्रपान निषेध- कु० शालिनी

चित्र
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में   प्रस्तुत है आज जनपद- रुद्रप्रयाग से छात्रा कु० शालिनी जी द्वारा रचित कविता:- 📝🚭धूम्रपान निषेध सुलगी बीड़ी और सिगरेट, तम्बाकू का करो निषेध। छोड़ दो यह शौक नशे का, साथ बुरी लत व नशेड़ी का।। अभी उम्र ही क्या है तुम्हारी! अभी तो मंजिल पानी बाकी। क्यों गला अपना घोट रहे हो, क्यों सांँसों को रोक रहे हो।। आदत ये अच्छी नहीं है, मान लो इस बात को।  जानलेवा यह शौक है, छोड़ दो इस शौक को।। तन कैंसर का घर बनेगा, श्वास रोग हो जाएगा। फेफड़े जला देता है ये, सब कुछ तबाह करेगा ये।। सड़ जाते हैं फेफड़े इससे, काले धब्बे पड़ जाते हैं। जीवन में जो इसे अपनाता, जीवन भर वो पछताता।। सब सम्भल जाओ तम्बाकू से, बीड़ी,सिगरेट सब कुछ त्यागो। नशा मुक्त हो जाओ इससे, स्वस्थ, सुखी जीवन अपनाओ।। जिन्दा क्यों जल रहे हो! मौत को निमन्त्रण दे रहे हो। नशा मुक्त जब हो जाओगे, जीवन में खुशहाली पाओगे।। इसका प्रयोग करना छोड़ो, बुरी लत, बुरी संगत त्यागो। किया तम्बाकू सेवन जिसने, वार किया दिल पर अपने।। छोड़ दो ये बुरी है लत, सेहत और स्वास्थ्य बनाओ। ताजे फल खाओ, दू...

सृष्टि का आधार- नारी - सुश्री विजयलक्ष्मी

चित्र
 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस के परिप्रेक्ष्य में  प्रस्तुत है आज जनपद- नैनीताल से शिक्षिका बहन सुश्री विजयलक्ष्मी जी  द्वारा रचित कविता:- *🙏📝सृष्टि का आधार-नारी* सृष्टि की आदि हूँ मैं, सृष्टि की आधार हूँ मैं। जन्मदात्री पालन कर्ता, सृष्टि की पतवार हूँ मैं।। अम्बा,अम्बिका, जगदम्बा हूँ मैं, दुर्गा, काली, कपाली, कराली हूँ मैं। चण्डिका, भवानी, कल्याणी हूँ मैं, सृष्टि के कण-कण में बसी उजास हूँ मैं।। सांय की उषा, भोर की प्रभात हूँ मैं, महालक्ष्मी, धन-धान्य का भण्डार हूँ मैं। सरस्वती ज्ञान की अनन्त पारावार हूँ मैं, समस्त विद्याओं का आधार और सार हूँ मैं।। समस्त सिद्धियों की स्वरूपा हूँ मैं, शौर्य की जननी पराक्रम स्वरूपा हूँ मैं। समस्त बल की अधिष्ठात्री परम पुरुष स्वरूपा हूंँ मैं, माँ, बहन, पुत्री बन सृष्टि को चलाती हूँ मैं।। सारे रिश्ते-नाते  ही बनाती हूँ मैं,  पिता का आह्लाद माँ की मुस्कान हूँ मैं। कन्या भोज और पुण्य मान हूँ मैं, कल्पना चावला, प्रतिभा, द्रौपदी हूँ मैं।। सीता, सावित्री,अहिल्या, लक्ष्मीबाई हूँ मैं,...

होली मुबारक- श्री सोमपाल सिंह प्रजापति "सोम"

चित्र
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में होली पावन पर्व के सुअवसर पर प्रस्तुत है आज जनपद- नैनीताल से शिक्षक साथी श्री सोमपाल सिंह प्रजापति जी "सोम" द्वारा रचित कविता:- 🙏📝होली मुबारक तर्ज़- आज मेरे यार की शादी है दोस्तो सुनो लगाकर कान,  दोस्तो सुनो लगाकर कान,  सुनो लगाकर कान।  दोस्तो सुनो लगाकर कान, दोस्तो सुनो लगाकर कान।।  होली का तुम जश्न मनाओ,  होकर के सावधानभ दोस्तों सुनो लगाकर कान, दोस्तो सुनो लगाकर कान।।  सुनो लगाकर कान, दोस्तो सुनो लगाकर कान,  दोस्तो सुनो लगाकर कान।।  मिटा दो तन की बुराई, निकालो मन की खोटाई। हो तुमको होली मुबारक,  करो नेकी की कमाई।।  ये नफरत दूर भगा दो, आहा,  दुर्गुणों की होली जला दो, आहा।  चहुंँ दिशि हो हरियाली, आहा,  देश में हो खुशहाली।।  हो ओओओओओ... अपने अन्दर छिपे अवगुणों का,  कर दो काम तमाम।  दोस्तो सुनो लगाकर कान, दोस्तो सुनो लगाकर कान।।  सुनो लगाकर कान, दोस्तो सुनो लगाकर कान,  दोस्तो सुनो लगाकर कान।।  होली का तुम जश्न मनाओ,  होकर के सावधान। ...