कच्चा धागा श्रीमती सन्नू नेगी जी
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में रक्षा बन्धन पावन पर्व पर प्रस्तुत है जनपद-चमोली गढ़वाल से शिक्षिका बहन श्रीमती सन्नू नेगी जी द्वारा रचित कविता: *🙏🕉️✍️🌹कच्चा धागा* गर्भ नाल सा बिल्कुल नाजुक, जीवन इसमें होता है। है बड़ा अनमोल यह तो, कच्चा धागा होता है।। रेशम, सूती कई डोरियों से, मिलकर ये बनता है। भाई-बहिन का प्रेम-द्योतक, राखी बन्धन होता है।। है बड़ा अनमोल यह तो, कच्चा धागा होता है।। लिपट कलाई पर जब भाई की, रक्षा सूत्र बन जाता है। भाई को बहिना की यह, सदैव याद दिलाता है।। परिपूर्ण रहें भाई का घर, मनोकामना लाता है।। है बड़ा अनमोल यह तो, कच्चा धागा होता है।। तिलक लगा कर लटाट चमके, दीप थाल में लाती है। दीपाराधन करे नेह से, मन्द-मन्द मुस्काती है।। कितना पुनीत! कितना पावन!! यह रक्षासूत्र होता है। है बड़ा अनमोल यह तो, कच्चा धागा होता है।। 🙏 रचना-: सन्नू नेगी(स०अ०) रा० क० उ० प्रा० वि० सिदोली, वि० ख० कर्णप...