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बेटी का सपना- श्रीमती रश्मि पाण्डेय

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है, आज जनपद-नैनीताल से शिक्षिका बहिन श्रीमती रश्मि पाण्डेय जी द्वारा रचित कविता- बेटी का सपना उड़ सकूँ इस खुले अम्बर में, ना डरूँ, चलूँ निर्भय होकर। पर गिद्धों की भीड़ यहाँ, तोड़ दिए चिड़िया के पर।। वहशियों ने अत्याचारों से, जब मेरे तन को छिन्न किया। मोमबत्ती जलाकर समाज ने, निर्भया, दामिनी नाम दिया।। मेरे बचपन को छीन मुझे, निर्ममता से तुम कुचलते हो। फिर देकर श्रद्धाञ्जलि मुझको, बिटिया, गुड़िया तुम कहते हो।। छोटी सी मेरी उम्र अभी, पर तुमको दया नहीं आती। उल्टा मुझ पर प्रतिबन्ध लगा, हँसते हो, शर्म नहीं आती।। घर से निकले, कैसे निकले, किस-किस से उसको है बचना? डर जाती है, मर जाती है, कैसे देखे बेटी सपना।। थी नारी कभी स्वतन्त्र यहाँ, थी गार्गी, अपाला और घोषा, है प्रश्न आज इस भारत से, क्या मेरा सपना भी सच होगा? 🙏 रचना-: रश्मि पाण्डेय (स०अ०)  रा० उ० प्रा० वि० भरतपुर वि० ख०- भीमताल, नैनीताल 🙏संकलन-: टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

बेटी संकल्प- श्रीमती सन्नू नेगी जी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है, आज जनपद- चमोली से शिक्षिका बहिन श्रीमती सन्नू नेगी जी द्वारा रचित कविता- बेटी संकल्प रोशन हो सारा जहाँ, पुष्प खिलें यहाँ-वहाँ। फूल न कोई मुरझाये , संकल्प ये जरूरी है।। प्रगति हो हर हाल, अनुसन्धान भी हर साल। अभिशाप न हो विज्ञान, संकल्प ये जरूरी है।। बेटा-बेटी एक समान, दोनों से घर की शान। बेटी को भी जन्मायेंगे, संकल्प ये जरूरी है।। देश समाज का विकास, जन-जन को आभास हो। घर-घर खुशियाँ छायें, संकल्प ये जरूरी है।। पढ़-लिख कर बेटी भी, आगे बढ़ना चाहेगी। घर में बेटा तो, बेटी भी हो, संकल्प ये जरूरी है।। पूरी गरीब की आस, कपड़ा रोटी और मकान। हर स्त्री का हो सम्मान, संकल्प ये जरूरी है।। स्त्री-पुरुष जीवन के,  अभिन्न दो पहलू हैं। समाज दोनों का हो संकल्प ये जरूरी है।। बेटा उपवन है तो, बेटी खिलती कली, आबाद रहे बाग सदा संकल्प ये जरूरी है।। 🙏 रचना-: सन्नू नेगी (स०अ०) रा० क० उ० प्रा० वि० सिदोली वि० ख०- कर्णप्रयाग, चमोली 🙏संकलन-: टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

मतदाता दिवस - श्रीमती उषा गौड़ जी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में राष्ट्रीय मतदाता दिवस के सुअवसर पर प्रस्तुत है, आज जनपद- देहरादून से शिक्षिका बहिन श्रीमती उषा गौड़ जी जी द्वारा रचित कविता- मतदाता दिवस प्रजातन्त्र को मजबूत बनाकर, धर्म-जाति की दीवार तोड़ कर। आओ हम सब मतदान करें, भारत का विकास हम सब करें।। गली-गली और गाँव-गाँव में, घर-घर और शहर-शहर में। अभियान हमको चलाना है, जागरूकतापूर्ण मतदान कराना है।। अपना विवेक, बुद्धि, विश्वास से, उचित निर्णय को करना है। चैन अमन के खोजबीन से, भारत का भाग्य जगाना है।। जो महकाये गलियों को, चमन गाँव को बनवाए। जन-जन के भाग्य विधाता को, पहचान अवतरित करवाएंँ।। 🙏 रचना-:      उषा गौड( स०अ०)  रा० उ० प्रा० वि० डोईवाला  ब्लॉक- डोईवाला, देहरादून 🙏संकलन-: टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

मतदाता जागरुकता गीत - डाॅ० आभा भैंसोड़ा

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में राष्ट्रीय मतदाता दिवस के सुअवसर पर प्रस्तुत है, आज जनपद- नैनीताल से शिक्षिका बहिन डाॅ०आभा भैंसोड़ा जी द्वारा रचित कविता- 🙏✍️मतदाता जागरूकता गीत लोकतन्त्र है मस्ताना   इसकी महिमा जिसने जाना। देखो देर ना लगाना, वोट जरूर देने जाना।। संविधान कहता है तुमसे, वोट का मिला अधिकारssss मतदान का मिला अधिकार। मूल्यवान है वोट तुम्हारा, जानेना देना बेss का ssss र,  जाने ना दे ss ना बे का ssss र।।  हो तुम राष्ट्र के रखवाले, भारती माँ के हो तुम पाले। देखो देर ना लगाना, वोट जरूर देने जाना।। लोकतन्त्र जब यहाँ नहीं था, हम थे बेबस नाSSSलेSSS  हम थे बेबस नाSSSलेSSS।   लोकतंत्र में अधिकार मिला तो,  ना लगेss मुंssह मेंssताले sss    ना लगेss मुंssह मेंssताले sss ।।    अपनी धुन में ओ मतवाले, लोकतंत्र को बचा ले। फर्ज अपना तू  निभा ले, गर्व भारत का  बढ़ा ले।।   लोकतन्त्र है मस्ताना, इसकी महिमा जिसने जाना। देखो देर ना लगाना, वोट जरूर देने जाना।। लोकतन्त्र की रीढ़ वोट है, ला...

बेटी ईश वरदान - श्रीमती सरिता भट्ट

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में राष्ट्रीय बालिका दिवस पर प्रस्तुत है, आज जनपद- रुद्रप्रयाग से शिक्षिका बहिन श्रीमती सरिता भट्ट जी द्वारा रचित कविता- बेटी ईश वरदान  ईश्वर की वरदान है बेटी, घर आंँगन की शान है बेटी।  ईश्वर की दी भेंट है बेटी, नसीब वालों की पहली औलाद है बेटी।।  दुनिया की असली दौलत है बेटी,  जिनके घर में लक्ष्मी के रूप में आती है बेटी।  आन-बान और स्वाभिमान है बेटी,  हम सबका सम्मान है बेटी।।  सशक्त देश की पहचान है बेटी,   आँगन की चहकती चिड़िया है बेटी।  नुपुरों की झंकार है बेटी,  खिलखिलाती पुष्प-वाटिका है बेटी।।  मांँ के संस्कारों की दौलत है बेटी,  पिता के आंँखों की नूर है बेटी।  परिवार का सम्मान है बेटी,  माता-पिता का स्वाभिमान है बेटी।।  🙏 रचना-: सरिता भट्ट (प्र०अ०)   रा० प्रा० वि० फलई,  विकास खण्ड - अगस्त्यमुनि जनपद- रुद्रप्रयाग 🙏संकलन-: टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - श्री मनोज घिल्ड़ियाल जी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी पूज्य सुभाष चन्द्र बोस जी की पावन जयन्ती पर प्रस्तुत है, आज जनपद-पौड़ी गढ़वाल से शिक्षक साथी श्री मनोज घिल्ड़ियाल जी जी द्वारा रचित कविता- 🙏🇮🇳नेता जी सुभाष चन्द्र बोस  23 जनवरी 1923 को जन्मे थे जो, नेताजी सुभाष चन्द्र बोस थे वो। भारत माता को गौरवान्वित किया उसने, आहुति देकर स्वतन्त्रता के यज्ञ में उसने।। अंग्रेजों की दमनकारी नीति देखकर, वितृष्णा भर गयी जब उनके मन पर। उनको खदेड़ने का संकल्प लिया तब, एक विलक्षण व्यक्तित्व  प्रकट हुआ तब।। 15 जुलाई 1943 को सेना का गठन किया, आजाद हिन्द फौज उसको नाम दिया। तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूँगा, नौजवानों में प्राण फूँकने का मन्त्र दिया।। जिस तेजी से वे लक्ष्य की ओर बढ़ रहे थे, और शत्रु को भयभीत कर रहे थे। कि अचानक एक विमान हादसा हो जाता है, किन्तु उनका पता आज तक न चल पाता है।। आज उनके जन्म दिवस पर स्मरण करते हैं, देश प्रेम दिवस के रूप समर्पित करते हैं।। 🙏 रचना-: मनोज घिल्डियाल (प्र०अ०) रा० प्रा० वि० कलीगाड वि०ख०- रिखणीखाल, पौड़ी गढ़वाल 🙏स...

सूरज को भी ठण्ड लगी है - श्रीमती दीक्षा जोशी जी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में  प्रस्तुत है, आज जनपद-नैनीताल से शिक्षिका बहिन श्रीमती दीक्षा जोशी जी द्वारा रचित कविता- 🔆✍️सूरज को भी ठण्ड लगी है बर्फीले मौसम में देखो, सूरज को भी ठण्ड लगी है। सर्दी इतनी ज्यादा हो गई, कोहरे की दीवार लगी है।। बादल वाली ओढ़ रजाई, बार-बार बाहर को झाँके। केवल मुँह को बाहर करके, ऊपर से नीचे को ताके।। हिम्मत उसकी नहीं हो रही, बिस्तर से बाहर आने की। पर मम्मी कहती है उससे, उसकी तो ड्यूटी जाने की।। कोई एक गरम प्याला तो, कॉफी का उसको पकड़ा दे। सर से लेकर पैर तलक, कोई ऊनी कपड़े पहना दे।। फिर वो भी बाहर निकलेगा, सबकी सर्दी दूर करेगा। जग-मग, जग-मग, जग-मग करके सारा जग रोशन कर देगा।। 🙏 रचना-: दीक्षा जोशी (प्र०अ०)  रा० प्रा० वि० चोरगलिया, ब्लॉक- हल्द्वानी, नैनीताल 🙏संकलन-: टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

राष्ट्रीय सेना दिवस - श्री मनोज घिल्ड़ियाल जी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में राष्ट्रीय सेना दिवस के सुअवसर पर प्रस्तुत है, आज जनपद-पौड़ी गढ़वाल से शिक्षक साथी श्री मनोज घिल्ड़ियाल जी द्वारा रचित कविता- 🙏🇮🇳✍️राष्ट्रीय सेना दिवस  सियाचिन की ऊँची बर्फीली चोटी, जहाँ ऑक्सीजन तक कम हो जाती। प्रतिकूल जलवायु होने के कारण, स्वास्थ्य तक खराब कर जाती।। राजस्थान जैसलमेर जैसे स्थानों में, जहाँ पर भीषण गर्मी पड़ती है। कहर बरपाता प्रचण्ड तापमान, आसमान से मानो आग हो पड़ती है।। इन हालातों में भारतीय सैनिक भिड़ते रोज, पाकिस्तानी-चीनी सैनिकों से लड़ते रोज। इस तरह वे सीमाओं की रक्षा करते हैं, और आराम से तब हम घर में रहते हैं।। सीमाओं की निगरानी करते हुए, कभी ऐसी भी परिस्थितियाँ बनती हैं। भारत माता की सुरक्षा करने में, प्राणों की आहुति देनी पड़ती है।। उन शहीदों को श्रद्धाञ्जलि अर्पित करने, अमर जवान ज्योति पर सलामी देते हैं। अदम्य साहस दिखाने वाले सैनिकों को, बहादुर सेना मैडल व पुरुस्कार देते हैं।। 15 जनवरी 1949 को भारतीय सेना के, प्रथम फील्ड मार्शल करिअप्पा बने जब से। वीर सैनिकों को समर्पित यह दिन, सेना दिवस के र...

वो बूढ़ा मजदूर - श्री विनोद सुयाल जी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है, आज जनपद-नैनीताल से शिक्षक साथी श्री विनोद सुयाल जी द्वारा रचित कविता- 🙏✍️वो बूढ़ा मजदूर आजाद जग ये हो गया, पर वो रहा गुलाम। एक बूढ़ा मजदूर जो, कर न सके कुछ काम।। काम करे तो क्या करे, हालत से मजबूर।  हाड़-हाड़ काया भयी, सपने चकनाचूर।। गाल पोपले हो गए, गयी जवानी दूर। फिर भी तिल-तिल मर रहा, होकर वो मजबूर।। सर्दी में था अकड़ रहा, गर्मी से अनजान। तन पर झीना धींगरा, वक्त बड़ा बलवान।। रुखा सूखा खाय के, तापन बैठा अलाव। कोई खाए बाजरा, कोई खाए पुलाव।। जैसे-तैसे कट गए, बर्फीले दिन चार। दीन-अभागे पर तभी, लू ने किया प्रहार।। लू ने किया प्रहार कि, धरा उगले अंगारे। जेठ मास की दुपहरी, तन पर कोड़े मारे।। फिर आया आषाढ़ तो, वर्षा भई भरपूर। दो वक्त की रोटी भी, हो गई उससे दूर।। सर्दी गई, गर्मी गई, और गई बरसात। निर्बल देह ने काट लिए, वो श्रापित दिन-रात।। दीन-हीन काया के जब, पूरे हुए दिन चार। एक आह निकली तन से, छोड़ दिया संसार।। 🙏 रचना-: विनोद सुयाल (स०अ०) रा० प्रा० वि० भाॅकर  वि० ख०- भीमताल, नैनीताल 🙏संकलन-: टीम हिम मन म...

उत्तरायणी पर्व - डाॅ० आभा सिंह भैंसोड़ा

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में मकर संक्रान्ति पुण्य पर्व पर प्रस्तुत है, आज जनपद- नैनीताल से शिक्षिका बहिन डाॅ०आभा सिंह भैंसोड़ा जी द्वारा रचित कविता- उत्तरायणी पर्व  धनु से मकर राशि में, सूर्य विचरण को आते हैं। दक्षिणायन थे सूर्य अब जो, उत्तरायण चले आतेहैं।। यह समय महत्वपूर्ण होता है, क्षमता द्विगुणित बढ़ जाती है। पूष की ठिठुरन कम होती है,  तपिश सूर्य की बढ़ जाती है।।    दक्षिणायन होता सूर्य जब,  खर मास आरम्भ हो जाते हैं।  उत्तरायण सूर्य के आते ही,  शुभकार्य श्री गणेश हो पाते हैं।।    उत्तरायण में प्रवेश होने से,  मकर संक्रान्ति कहलाती है।  पवित्र नदी स्नान से इस दिन,  शुभ फल प्राप्ति हो जाती है।। गीता में भीष्म पितामह ने भी, इसी दिन प्राण त्यागे थे। दन्तकथानुसार उत्तरायण प्राण विसर्जन से,  मोक्ष द्वार खुल जाते हैं।। 🙏 रचना - : डॉ० आभा सिंह भैसोड़ा (स०अ०) रा० प्रा० वि०-देवलचौड़ ब्लाॅक- हल्द्वानी, नैनीताल 🙏संकलन-: टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

स्वामी विवेकानन्द जी - श्री मनोज घिल्ड़ियाल जी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में राष्ट्रीय युवा दिवस के सुअवसर पर प्रस्तुत है, आज जनपद-पौड़ी गढ़वाल से शिक्षक साथी श्री मनोज घिल्ड़ियाल जी द्वारा रचित कविता- 🙏✍️स्वामी विवेकानन्द  माता भुवनेश्वरी देवी की धार्मिकता,  और पिता विश्वनाथ की बौद्धिकता। बाल नरेन्द्र नाथ को अद्भुत बनाती है,  उत्कण्ठा गुरु रामकृष्ण समीप ले जाती है।।  मिला समाधान जिज्ञासाओं को,  जब शान्त हुआ मन, जीवन बदला तब।  युवा संन्यासी रूप में उद्भव उनका होता है  विश्वधर्म सम्मेलन में प्रतिभाग उनका होता है।।   शिकागो जाकर उन्होंने जब भाषण दिया,  अमरीकी भाई बहनों कह सम्बोधित किया।  उपस्थित जनसमूह मन्त्रमुग्ध रह गया,  दो मिनट तक ताली बजाता रह गया।।  इसे आध्यात्मिक, दार्शनिक भाषण कहा था,  सारे संसार को प्रभावित इसने किया था।  यूरोपीय अखबारों ने एतिहासिक कहा था,  और सम्मेलन का प्रभावी व्यक्ति कहा था।।  शीघ्र ही वे फिर विश्व क्षितिज पर छाये,  हिन्दू धर्म आध्यात्म को  फिर रखा जिलाये।   बहुमुखी प्रत...

राष्ट्रीय युवा दिवस - श्रीमती भागीरथी पाण्डेय

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में राष्ट्रीय युवा दिवस के सुअवसर पर प्रस्तुत है, आज जनपद- नैनीताल से शिक्षिका बहिन श्रीमती भागीरथी पाण्डेय जी द्वारा रचित कविता- राष्ट्रीय युवा दिवस 12 जनवरी 1863 को, विवेकानन्द का जन्म हुआ। पाकर महान देशभक्त, भारत देश धन्य हुआ।। पिता श्री विश्वनाथ दत्त, माता भुनेश्वरी देवी थी। प्रतिभाओं के धनी थे, कृपा थी माँ सरस्वती की।।   बचपन का नाम नरेन्द्र दत्त, गुरु थे रामकृष्ण परमहंस।  जिनकी प्रेरणा पाकर बने, भारत के महान युवा सन्त।। थे महान दार्शनिक, आध्यात्मिक, सच्चे जन सेवक और सामाजिक। धर्म सम्मेलन में किया प्रतिनिधित्व, जो शिकागो में था आयोजित।। अपने ओजस्वी विचारों से, भारत को नई पहचान दिलाई। स्वामी जी के इस भाषण की, प्रशंसा सारी दुनिया में छाई।। भारतीय अध्यात्म और संस्कृति का, पूरे विश्व में प्रचार हुआ। स्वामी जी और भारतीय दर्शन का, स्वागत और सत्कार हुआ।। लोगों की सेवा को पूजा मानते, सेवा से कभी न पीछे हटते। उनके प्रेरणादायक विचार, युवाओं में नव ऊर्जा भरते।। उनके अनमोल विचारों से, आज भी युवा प्रेरणा पाता। तभी प्रति वर्ष...

जीवन - श्रीमती पूनम भट्ट जी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है, आज जनपद-टिहरी गढ़वाल से शिक्षिका बहिन श्रीमती पूनम भट्ट जी द्वारा रचित कविता- 🙏 ✍️जीवन              जीवन एक यात्रा है सुख की, दुख की, कुछ जीवन्त लम्हों और कुछ किस्सों की, यहाँ कुछ ना कुछ मिलता है सबको, पर चाह अलग ही होती है सबको।। जो मिलता है उससे खुशी नहीं, जो मिला उसमें आनन्द नहीं। क्यों? जो नहीं मिला उसका शोक मनाते हैं, अपने आनन्द की बलि चढ़ाते हैं।। गर रहना हो खुश इस जीवन में, तो देखो अपने से नीचे जग में, जो कुछ है हमारे पास , नहीं है कइयों के पास।। वे फिर भी खुशी से जीवन जीते हैं,       अभावों में भी आनन्दित रहते हैं। सो धन्यवाद करो उस ईश्वर का,  जिसने मानव जीवन प्रदत्त किया।। और रखो विश्वास हमेशा,  जो हुआ या होगा सब अच्छा होगा। बुरा ना सोचे तो ना होगा बुरा, अच्छा सोच कर बुरा भी अच्छा होगा सदा।।                           🙏 रचना-: पूनम भट्ट (प्र०अ०) रा० प्रा० वि० जिजली  ...

गुरु गोविन्द सिंह - डाॅ० आभा भैंसोड़ा जी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है, आज जनपद-नैनीताल से शिक्षिका डाॅ०आभा भैंसोड़ा जी द्वारा रचित कविता- 🙏✍️गुरु गोविन्द सिंह  ================= दसवें गुरु गोविन्द सिंह जी, तेग बहादुर पिता, माँ गुजरी देवी। आदि श्री गुरु ग्रन्थ साहिब को,  पूर्णता थी उनके पास मिली।।  खालसा पन्थ के थे संस्थापक,   गुरुवाणी का था विशेष प्रभाव।  काव्य, लेखन, दर्शन , साहित्य,  सभी विधाओं में अव्वल व्यक्तित्व।।      पौष मास शुक्ल पक्ष की सप्तमी,   सिक्ख समाज गुरु पर्व रुप में मनी।   गाँव, शहर में गुरुवाणी गाते चलते,   सेवा भाव से लंगर भी परोसे जाते।।      सिक्ख ही नहीं सभी समाज में पूजे जाते,   श्रेष्ठ  विचार, श्रेष्ठ भाव वो बताते।   सेवाभाव सिक्ख समाज की मिसाल है,   गुरू ज्ञान उनका तो बेमिसाल है।। 🙏 रचना :- डॉ० आभा सिंह भैसोड़ा (स०अ०) रा० प्रा० वि०- देवलचौड़ ब्लाॅक - हल्द्वानी, नैनीताल 🙏संकलन-: टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

कर्नाटक राज्य गीत - श्रीमती उषा गौड़ जी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है, आज जनपद-देहरादून से शिक्षिका बहिन श्रीमती उषा गौड़ जी  द्वारा रचित कविता- 🙏✍️कर्नाटक राज्य गीत कर्नाटक राज्य है वन्दन तेरा, हम सब करें अभिनन्दन तेरा। मुल्लियान गिरि महान तेरे सर पर ताज है, अरब महासागर तेरे चरणों में विराज है‌।। गोवा, तेलंगाना, केरल तक फैला आँगन तेरा, हम सब करें अभिनन्दन तेरा। भद्रा, चक्रा नदियाँ तेरे गले में विराजे हैं, भिन्न-भिन्न धर्मों का ये अनोखा राज है।। वीर शैव की महिमा है दर्पण तेरा, हरी धरती है फूल आँचल तेरा। भिन्न-भिन्न भाषाओं में रूप तेरा सजता, छोटी-छोटी क्यारियों में मन मेरा हँसता।। बंगलौर, मैसूर स्थल तेरे राज्य की शान हैं, जिसमें बसते हैं हमेशा भारत के प्राण हैं। बिरुपाक्ष टेम्पल, हम्पी यहाँ विराजमान हैं, मुल्लियान गिरि महान तेरे सर पर ताज है।। 🙏रचना-: उषा गौड़  (स०अ०)  रा० उ० प्रा० वि० डोईवाला  ब्लॉक- डोईवाला,  देहरादून 🙏संकलन-: टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

राष्ट्रीय एकता - श्रीमती गंगा आर्या

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है, आज जनपद-पिथौरागढ़ से शिक्षिका बहिन श्रीमती गंगा आर्या जी द्वारा रचित कविता- 🙏🇮🇳राष्ट्रीय एकता  हम एक हैं हम एकता दिखलायेंगे, आने वाली पीढ़ी को हम मानवता सिखायेंगे। न कोई ऊँच-नीच, न हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख, इसाई, हिन्द देश के निवासी हम सब हैं भाई-भाई।। जिसने सोचा हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख, इसाई हैं, हिन्द देश का वो निवासी सबसे बड़ा कसाई है। हम एक हैं, हम एकता दिखलायेंगे, आने वाली पीढ़ी को मानवता हम सिखायेंगे।। आने वाली हर कठिनाई को मिलकर हम हटायेंगे, भेदभाव को छोड़कर हम एकता दिखलायेंगे। भीनी-भीनी एकता की खुशबू हम फैलायेंगे आने वाली नस्लों को इससे वाकिफ करायेंगे।। भ्रष्टाचार का फैला आँचल जड़ से हम उखाड़ेंगे, ज्ञान का लेके पुञ्ज अज्ञानता हटायेंगे। शिक्षा की लेके मशाल देश को आगे बढ़ायेंगे, भारत को संगठित करके शान्ति देश में लायेंगे।। करके विनाश‌ छल कपटी का सम समाज बनायेंगे, ढोंगी, पाखण्डी, व्यभिचारियों से विश्वास जनता का हटायेंगे। दगाबाज और गद्दारों को अब तो सबक सिखायेंगे, चमचों के कुचक्र व्यूह से मुक्ति जनता को...

नारी की जिम्मेदारियाँ - श्रीमती दमयन्ती राणा जी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है, आज जनपद-चमोली से शिक्षिका बहिन श्रीमती दमयन्ती राणा जी द्वारा रचित कविता- ✍️नारी की जिम्मेदारियाँ जब एक लड़की किसी घर में जन्म लेती है,  उस घर को पूरी तरह जगमगा देती है। वो एक नन्ही-सी कली अपने पापा की परी होती है,  माँ की प्यारी और भाई की दुलारी होती है।। मासूमियत को छोड़कर अब वो,  समझदारी की सीढियाँ चढ़ने लगती है। वो कली बाबुल की बगिया छोड़कर,  अब किसी और के घर की फूल बनती है।। माँ बनकर अपने बच्चों को सम्भालती है,  उनके मन के दुख को समझ जाती है। अपने घर के हर सदस्य का चेहरा देखकर,  वो अपनी जिम्मेदारियाँ अच्छे से निभाती है।। अपने बच्चों की खुशी के लिए,  खुद की खुशी को भूल जाती है। वो एक लड़की सबका ध्यान रखती है,  बस खुद का ध्यान रखना भूल जाती है।। वो कभी बेटी, बहू और पत्नी,  तो कभी माँ बन जाती है। वो एक लड़की इस तरह से,  सारे रिश्ते जिम्मेदारियाँ निभाती है।। 🙏 रचना-: दमयन्ती राणा (स०अ०) रा० उ० प्रा० वि० ईड़ाबधाणी वि०ख०- कर्णप्रयाग, चमोली 🙏संकलन-: टीम हिम मन मन...

जय-जय उत्तराखण्ड - श्रीमती उषा गौड़ जी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है, आज जनपद-देहरादून से शिक्षिका बहिन श्रीमती उषा गौड़ जी द्वारा रचित कविता- 🙏✍️जय-जय उत्तराखण्ड         जय- जय- जय उत्तराखण्ड,  सत्ताईसवांँ  राज्य भारत का।  स्थापना हुई इसकी,  नौ नवम्बर सन दो हज़ार को।।  जिले तेरह इसमें, मण्डल इसमें दो हैं। तहसील एक सौ दस हैं, विकास खण्ड पिचानबे हैं।। उप तहसील अठारह हैं, नगरपालिका तैतालीस हैं। जय-जय-जय उत्तराखण्ड,  27 वांँ राज्य भारत का।।  उत्तर में चीन तिब्बत,  पूरब नेपाल देश है। दक्षिण उत्तर प्रदेश,  पश्चिम में हिमाचल है।। नदियाँ बहाती इसकी,   अमृत की धारा है। जय-जय-जय उत्तराखण्ड,  27 वांँ राज्य भारत का।।  देवों की भूमि यह,  देवों का निवास है। बद्रीनाथ में नारायण है, केदार शिव का वास है।। गंगोत्री में गंगा माँ,  यमनोत्री में यमुना माँ। जय-जय-जय उत्तराखण्ड,  27 वांँ राज्य भारत का।।  उत्तर में हिमालय है,  मुनियों की तपोभूमि है। जय-जय-जय उत्तराखण्ड,  27 वांँ राज्य...

प्रथम महिला शिक्षिका-श्रीमती बसन्ती शाह

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📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है, आज जनपद-रुद्रप्रयाग से शिक्षिका बहिन श्रीमती बसन्ती शाह जी द्वारा रचित कविता-  *🙏✍️प्रथम महिला शिक्षिका*  3 जनवरी सन् 1831को, इस धरा धाम पर जन्म लिया। महाराष्ट्र में सतारा जिले के, नया गाँव को धन्य किया।। पिता खण्डोजी नेवसे पाटिल, माता लक्ष्मी बाई थी। तीन भाइयों के संग में, यह प्रथम महिला शिक्षिका थी।। सती प्रथा,बाल विवाह जैसी, समाज में जब अनेक कुरीतियाँ थीं, 9 वर्ष की उम्र में तब इनकी, शादी ज्योति राव फुले से हुई थी। समाज सुधार की भावना से 1848 में, जब पहली पाठशाला खोली थी। यह समाज में महिलाओं पर,  हो रहे अत्याचार की पीडा़ थी।। महिलाओं के अधिकार एवं शिक्षा के लिए, काम करने वाली प्रथम महिला थी। शिक्षिका सावित्री बाई फुले, नारी मुक्ति की प्रेरणा, राष्ट्र माता थी।। बसन्ती शाह (प्र०अ०) रा० प्रा० वि० कुमडी़  वि०ख० - जखोली, रुद्रप्रयाग 🙏संकलन-: टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

नूतन वर्ष - श्रीमती दीक्षा जोशी जी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में आँग्ल नववर्ष के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है, आज जनपद-नैनीताल से शिक्षिका बहिन श्रीमती दीक्षा जोशी जी द्वारा रचित कविता- 🙏✍️नूतन वर्ष नूतन वर्ष तेरे आवन की, सबको बड़ी प्रतीक्षा रे। तेरे आवन पर कैसा, मनभावन लगे, ये इच्छा रे।। क्या तेरे आते ही सबके, दूर हों दुख और पीड़ा रे। क्या भूखा भोजन पा जावे, बिन माँगे तब भिक्षा रे।। भवन हीन गृह आश्रय पावे, रोजी रोटी हर घर आवे। क्या दुखिया, सुखिया बन जाए? तो मैं भी करूँ प्रतीक्षा रे।। जब हर पेट रोटी को पावे, हर सर को इक छत मिल जाए।  ढकने को तन कपड़ा लत्ता, तो ही वर्ष हो नूतन रे।। गर बीते हर वर्ष की तरह, ये साल भी केवल सरके। समस्या वैसी ही खड़ी रहे, तो कैसा नूतन वर्ष अरे।। चलो मिलाकर हाथ चलें, हर आँगन, छत, रोटी आवे। मिलकर करें जतन कुछ ऐसा, सब लगे नूतन-नूतन रे।। नूतन वर्ष तेरे आने की।  तब होगी मुझे प्रतीक्षा रे।। 🙏रचना-: दीक्षा जोशी (प्र० अ०) रा० प्रा० वि० चोरगलिया वि० ख०- हल्द्वानी, नैनीताल 🙏संकलन-: टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड