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दीपपर्व- दीपावली- श्रीमती सरोज डिमरी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला, हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है, दीपावली पावन पर्व पर जनपद- चमोली से शिक्षिका बहन श्रीमती सरोज डिमरी जी द्वारा रचित कविता-: *🙏🏾✍️ 🕉️🪔🕉️दीपपर्व–दीपावली* सहज सुन्दर पर्व मनायें  लिये दीपक हाथ में। परस्पर हम करें दुहाई, एक दूजे के साथ में।। रोशन हो गृह का हर कोना, खुशियों की सौगात में। आनन्द-मंगल, मनभावन ऋतु, दीपावली त्योहार में।। द्वारपाल है गणपति मेरे, लक्ष्मी माता साथ में। ऋद्धि-सिद्धि मन खुश होती हैं, शुभ लाभ ले साथ में।। शिव गौरा की कृपा बरसती, दीपमाला के साथ में।  अमृत कलश लिए खड़े हैं, धन्वन्तरी जी हाथ में।। औषधीय का भरा खजाना, स्वास्थ्य बढ़े हर हाल में। दीपावली की शुभकामना, बधाई दीपों के कतार में।। 🙏रचना-: सरोज डिमरी (स०अ०) रा० उ० प्रा० वि० घतोड़ा ब्लॉक- कर्णप्रयाग, चमोली।      ‌‌‌   ‌‌‌‌ ‌‌‌  ‌‌   ‌‌  🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

गढ़भोज- श्रीमती सरोज डिमरी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला, हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है, उत्तराखण्ड के पारम्परिक भोज्य पदार्थों के महत्व को बताती हुई जनपद- चमोली से शिक्षिका बहन श्रीमती सरोज डिमरी जी द्वारा रचित कविता-: 🙏🏾✍️गढ़भोज पहाड़ की विरासत है, पहाड़ की अनूठी संस्कृति है। अनाज एक देवता है, अनाज से ही हम सन्तति हैं।।  पौष्टिकता इनमें बनी है, और इससे होती है समृद्धि। मोटे अनाजों का उत्पादन बढ़ाओ, इससे अन्न की होती है वृद्धि।।  कोदा, झंगोरा, कोंणी, रागी, यह होते हैं मोटे अनाज। कम वर्षा पानी में भी,  जीवन देते हमको आज।।  यह पनपते विषम परिस्थिति में, करते हैं सहन धूप या छांँव। गढ़ भोज का पर्व मनाएंँ, नमन प्रभु का छूकर पांँव।।  विद्यालय में इसे चलाएंँ, कॉलेजों तक भी इसे बताएंँ। जंक फूड को भोजन से हटाएंँ, मोटे अनाज का उपयोग बढ़ाएंँ।।  प्रकृति का वरदान है, यह कुदरत का वरदान है। सृष्टि का अनमोल रतन,  किसानों का उत्पादन है।।  श्री द्वारिका प्रसाद सेमवाल जी ने, अन्न से प्रेम जताया है। इस प्यार प्रेम की पहचान अब  विश्व स्तर तक पहुंँचाया है।।  गढ़भोज की ...

पढ़ाई बेटियाँ हमने- श्रीमती अनिता काला

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला, हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है, शक्ति उपासना के महापावन पर्व नवरात्रि के शुभारम्भ पर नारी के अस्तित्व को बताती हुई जनपद- रुद्रप्रयाग से शिक्षिका अनिता काला जी द्वारा रचित कविता-: 🙏🏾🕉️🙏🏾✍️पढ़ाई बेटियाँ हमने जहांँ पूजी कभी नारी, वहांँ  अपमान होता है। बने हैं भेड़िए मानव, जमाना देख रोता है।। मनुज तन में यहांँ दानव, सभी को नोंक खायेगा। पढ़ाई बेटियाँ हमने, बचाने कौन आएगा।।  बड़ी गमगीन हालत है, हृदय में वेदना भारी। डरी सहमी सदा रहती, लुटी है आज क्यों नारी।।  हमारे घर की फुलवारी, बता कैसे सजाएगा। पढ़ाई बेटियांँ हमने, बचाने कौन आएगा।। उठो अब बैठ मत रहना,    सबक इनको सिखाना है। उठा लो हाथ में बरछी, न अब कैंडिल जलाना है।।  मिटेंगी बेटियाँ कब तक, इन्हें कब तक सताएगा। पढ़ाई बेटियाँ हमने, बचाने कौन आएगा।।  उठो बेटी बनों काली, तुझे इनको मिटाना है। बहुत ही सह चुकी हो अब, खड्ग तुमको उठाना है।। जगाओ शक्ति वो अपनी, नवल जो क्रान्ति लाएगा। पढ़ाई बेटियाँ हमने, बचाने कौन आएगा।।  🙏रचना-:  अनिता काला (प्र०अ०) रा० प्...