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महाशिवरात्रि आयी है - सुश्री विजयलक्ष्मी जी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में महाशिवरात्रि पावन पर्व पर प्रस्तुत है, आज जनपद- नैनीताल से शिक्षिका बहिन सुश्री विजयलक्ष्मी जी द्वारा रचित कविता- 🙏🕉️महाशिवरात्रि आयी है  मन में खुशी छायी,  महाशिवरात्रि आयी। सृष्टि के अस्तित्व की,  अधिष्ठात्री उतर आयी।।  इस दिन शिव-शक्ति का,  होता है सुखद मिलन। करने को त्रिलोकी,  बसुन्धरा में सन्तुलन।।  अर्द्धचन्द्र सुशोभित,  शीश गंग धार विराजे। कर डमरू, त्रिशूल, कण्ठ सर्प हार साजे।।  परहित में भोलेनाथ,  विष पी जाते हैं। ऐसे कृपा निधान,  नीलकण्ठ बन जाते हैं।।  यह भोले भोलेनाथ,  सबके प्यारे हैं। अंग लपेटे मृगछाल।  भस्म सबसे न्यारे हैं।। यह आदिगुरु सृष्टि कर्ता-हर्ता,  दयालु पालनहारे हैं। यह अविनाशी घट-घट वासी,  सबके सुख-दुःख के सहारे हैं।।  नन्दी की सवारी संग,  गणपति महतारी हैं। जो भी पुकारे उनकी,  हरते दुविधा सारी हैं।।  ज्ञानियों के गुरु और,  आचार्यों के आचार्य। मुंहँ मांँगा वर दे देते,  ऐसे परम औदार्य।।  वि...

मैं आजाद हूँ - श्रीमती सुनीता भटनागर जी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में महान स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी स्व० चन्द्रशेखर आजाद जी के बलिदान दिवस पर प्रस्तुत है, आज जनपद- नैनीताल से शिक्षिका बहिन श्रीमती सुनीता भटनागर जी द्वारा रचित कविता- ‌‌ 🙏🇮🇳मैं आजाद हूँ   23 जुलाई 1906 को जन्मा,  वो बांँका वीर निराला था।  वीर, बलिष्ठ, जाँबाज, बहादुर,  वो देश भक्त मतवाला था।।  पूछा जाता जब उनका नाम,  गर्व से "आजाद" बताते थे।  पिता का नाम स्वाधीनता,  और घर जेलखाना बताते थे।।  जिनका जीवन-दर्शन देशभक्ति,  और हिम्मत जीवन परिभाषा थी।  वह महानायक भारत-भू का,  बस इन्कलाब ही भाषा थी।।  वे आजाद थे, आजादी के लिए,  संघर्ष किया था गोरों से।  मैं आजाद हूंँ, आजाद ही मरूंगा,  प्रण किया था खुद अपने से।।  जिनके पराक्रम शौर्य से,  दुश्मन भी थर्राता था।  मातृभूमि की लाज बचाने को,  जो कफन ओढ़ चला आया था।।  वह आजाद था, पहचान आजादी,  खुद एक मिशाल बनाई थी।  जिनकी सिंह गर्जना से हर,  हिन्दुस्तानी ने आवाज मिलाई थी।।...

लता मंगेशकर जी - श्रीमती सावित्री आर्य

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में  प्रस्तुत है, आज जनपद- नैनीताल से शिक्षिका बहिन श्रीमती सावित्री आर्य जी द्वारा रचित कविता- ‌‌    🙏✍️लता मंगेशकर जी  28 सितम्बर 1929 का‌ दिन, भारत के लिए महान है। इस दिन जन्मी स्वरों की देवी, लता मंगेशकर नाम है।। माँ का नाम शेवन्ती, पिता का दीनानाथ है। बहिनें आशा, मीना और ऊषा, भाई हृदय नाथ है।। गले में माँ सरस्वती का बसेरा, सुरों का जिनमें होता डेरा। ऐसी सुरों की रानी का   सारा संसार है चहेता।। मिले कई सम्मान और इनाम, फिल्म फेयर और पद्य भूषण। भारत रत्न बना आखिरकार, इनके व्यक्तित्व का आभूषण।। सरल, सौम्य स्वभाव की धात्री, राष्ट्र की आवाज और स्वर साम्राज्ञी। दिया संगीत को नया आयाम, सदियों तक अमर रहेगा नाम।। 6 फरवरी 2022 को कह दिया, दुनिया को अलविदा। जब तक रहेगी सृष्टि तब तक, अमर रहेगी "लता"।। 🙏 रचना-: सावित्री आर्य (प्र०अ०) रा० क० उ० प्रा० वि० ‌छीड़ा गांजा वि०ख०- भीमताल, नैनीताल 🙏संकलन-: टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

खुले द्वार विद्यालय के-श्रीमती माधुरी नैथानी जी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में  प्रस्तुत है, आज जनपद- पौड़ी गढ़वाल से शिक्षिका बहिन श्रीमती माधुरी नैथानी जी द्वारा रचित कविता- ✍️👭खुले द्वार ‌विद्यालय के ऋतु बसन्त का आगमन है,  पुलकित बसुधा का मन है। मौसम ने ली अंगड़ाई है,  चहुँ-दिशि हरितिमा छायी है।।  हिमगिरि-हिमाच्छादित है,  दिनकर की रजत रश्मियों से।  अविभूषित है, प्रफुल्लित है,  स्वर्णिम आभा से पूरित है।।  युवा स्वप्न से दिवस सुखद हैं,  निशा, नींद सी है सुकुमारी।  अंग-अंग पुलकित  वसुन्धरा,  सरसों की फूली है क्यारी।।  तार-सध गये वीणा के,  माँ शारदे के वन्दन को। विटप, विहग, प्रसून मग्न हैं,  जग जननी के अभिनन्दन  को।।  साधक हैं साधनारत,  गूँज उठे फिर घण्टा-नाद।  मुदित-मन हो बच्चा-बच्चा,  खुले द्वार अब विद्यालय के।।   🙏रचना 🙏   माधुरी नैथानी (स०अ०)     रा० उ० प्रा० वि०- भटोली    ब्लॉक- खिर्सू, पौड़ी गढ़वाल 🙏संकलन-: टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

करो रोज पढ़ाई - श्रीमती नर्वदा कौशल जी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में  प्रस्तुत है, आज जनपद- टिहरी गढ़वाल से शिक्षिका बहिन श्रीमती नर्वदा कौशल जी द्वारा रचित कविता- करो रोज पढ़ाई  अगर करोगे रोज पढ़ाई, परीक्षा का भय नहीं रहेगा। अच्छे अंक सदा लाओगे, सब का प्यार दुलार मिलेगा।। जीवन-परीक्षा में भी तब,  सदा सफलता तुम पाओगे। घर-परिवार और समाज में, सचमुच अच्छे समझे जाओगे ।। रोज पढ़ाई जो ना करते,  परीक्षा उन्हें सताती है। भयावह रूप दिखा अपना, नींद न आने देती है।। अच्छे अंक नहीं आते जब , मन दुख से भर जाता है। सबकी नजरों से गिरकर, लज्जित होना पड़ता है।। जीवन परीक्षा में भी तब, सदा सफलता मिलती है। बोझिल सा लगता जीवन,  सब कुछ नीरस दिखता है।। इन बातों पर गौर करो, जीवन इनसे सुखद बनेगा। अगर करोगे रोज पढ़ाई,  परीक्षा का भय भी नहीं रहेगा।। 🙏 रचना-: नर्वदा कौशल  (प्र०अ०) रा० प्रा० वि० जसपुर वि०ख० - चम्बा, टिहरी गढ़वाल 🙏संकलन-: टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

ऋतुराज बसन्त-श्रीमती लक्ष्मी जी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में बसन्त पञ्चमी पावन पर्व पर प्रस्तुत है, आज जनपद- पिथौरागढ़ से शिक्षिका बहिन श्रीमती लक्ष्मी जी द्वारा रचित कविता- 🌻🌻ऋतुराज बसन्त🌻🌻  पतझड़ का अब हो रहा है अन्त,                  आ गया है मन भावन बसन्त।  पीली साड़ी पहने सजी है धरा,       फैली है फूलों की सुगन्ध अनन्त।। आ गया है पावन बसन्त, खुशबू फैलाते पुष्पित पुष्प। पेड़ पौधों की नई कलियाँ, खोल रही हैं नए कपोल।। चिड़िया चहक रही है पेड़ों पर, कोयल की बोली लगती सुन्दर। चारों ओर माँ सरस्वती, ज्ञान का प्रकाश फैलाती।।  सिमटने लगी है सर्दी फैली अनन्त,   आ गया है ऋतुराज बसन्त।  मोहित करता है सबको ऋतुराज  घर आंँगन को बना देता है गुलजार।। 🙏 रचना-: लक्ष्मी (स०अ०एल०टी० सामान्य)  रा० इ० का० मल्ला भैंस्कोट   वि०ख०- मुनस्यारी, पिथौरागढ़ 🙏संकलन-: टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड