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जंगल बचाओ- श्रीमती अनिता काला

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला,  हिम मन मन्थन  में  प्रस्तुत है जनपद-रुद्रप्रयाग गढ़वाल से शिक्षिका बहिन श्रीमती अनिता काला जी द्वारा रचित कविता-: *🙏🏾✍️🌳जंगल बचाओ* जंगल-जंगल आग लगी है, कौन बचाएंँ आज। जंगल से जल जीवन होता, करो न ऐसा काज।। पक्षी के यहांँ नीड़ जले हैं,  पशु होते बेहाल। धरती का मानव बन बैठा, जीव जन्तु का काल।। किसने इतनी आग लगाई, करता सब बर्बाद। कैसे तू भी रह पायेगा, इस जग में आवाद।। खाक बने यदि जंगल तेरे, हवा न होगी पास। घुट-घुट कर तू मर जाएगा, कैसे लेगा सांँस।। वक्त अभी है इतना सोचो, नहीं अभी मजबूर। जल और जीवन जंगल देते हैं,  मत हो इनसे दूर।। मिलकर अब सब पेड़ लगाओ, करो नवल अभियान। हरी भरी ये धरती होगी, होगी अपनी शान।। 🙏रचना-:  अनिता काला (प्र० अ०)  रा० प्रा० वि० जुंँटाई वि० ख०- अगस्त्यमुनि, रुद्रप्रयाग। 🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

आजादी के मतवाले- श्रीमती पुष्पा बहुगुणा

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला,  हिम मन मन्थन  में  बलिदान दिवस के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है जनपद- टिहरी गढ़वाल से शिक्षिका बहन श्रीमती पुष्पा बहुगुणा जी द्वारा  रचित कविता-: 🙏 ✍️आजादी के मतवाले वीर भगत, सुखदेव, राजगुरु, भारत माँ के थे उजियारे। मातृभूमि की खातिर हँसकर, प्राण लुटा गए थे न्यारे।। न देखा जीवन का वसन्त, ना कभी अपनी की परवाह। इन्कलाब का गीत सुनाकर, कर गए अमर यह वीर सिपाही।। बम से नहीं, विचारों से लड़े, हर दिल में क्रान्ति जगा गए। फाँसी के फन्दे को चूमा, मौत से भी जीत दिखा गए।।  भगत की आँधी थी ऐसी, अंग्रेजों की सत्ता हिल गई। सुखदेव की हुंँकार से देखो, दुश्मन की जड़ें उखड़ गईं।।  राजगुरु की बन्दूक दहाड़े, गूँज उठा रण का मैदान। लौटे नहीं कदम कभी उनके, ले लिया मातृभूमि का मान।।  23 मार्च वो काली रात, जब भारत ने खो दिए लाल। लेकिन वीरों की यह गाथा, गूँजेगी हर पीढ़ी के साथ।। जब-जब कोई जुल्म बढ़ेगा, इन्कलाब का स्वर आएगा। आजादी के इन मतवालों को, भारत शत-शत शीश नवाएगा!! "वंदे मातरम्! जय हिंद!! 🙏रचना- पुष्पा बहुगुणा (प्र०अ०)  ...

होली की महत्ता- श्रीमती सुशीला थपलियाल

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला,  हिम मन मन्थन  में होली पावन पर्व के सुअवसर पर  प्रस्तुत है जनपद-रुद्रप्रयाग गढ़वाल से शिक्षिका बहन श्रीमती सुशीला थपलियाल जी द्वारा रचित कविता-: ‌‌‌‌   🙏🏾✍️होली की महत्ता  प्रेम रंग में स्नेह से,  जो मिल सको तो होली है।  रंग प्रीत का गुलाल से,  लगा सको तो होली है।।   द्वेष जो मन के रंगों से,  मिटा सको तो होली है।  अन्त:करण के मैल को,  जो धुल सको तो होली है।।  भटके पथिक का पथ-प्रदर्शन कर सको तो होली है।  चहुँ दिशा आलोक जो,  फैला सको तो होली है।।  बिटप (पेड़) , कानन, नीर को,  बचा सको तो होली है।  भाईचारा को बढ़ावा,  दे सको तो होली है।।  निर्मल रंग फुहारों से,  आंँगन भिगो सको तो होली है।  एकता के सूत्र में जो,  बंँध सको तो होली है।। कर्तव्य पथ पर अग्रणी,  जो बन सको तो होली है।  रंगों के रंग से जो दिलों को,  रंग सको तो होली है।।  🙏रचना-: सुशीला थपलियाल (प्र०अ०)  रा० प्रा० वि० पपडा़सू  ‌‌‌‌‌वि०...

होलिका दहन - श्रीमती पुष्पा बहुगुणा

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला,  हिम मन मन्थन  में होली पावन पर्व के सुअवसर पर  प्रस्तुत है जनपद टिहरी गढ़वाल से शिक्षिका बहन श्रीमती पुष्पा बहुगुणा जी द्वारा रचित कविता-: 🙏🏾🕉️🙏🏾✍️होलिका दहन  होलिका दहन की है जुबानी,  बच्चों! आओ सुनो कहानी। भक्ति की ताकत क्या कर सकती, बुराई को कैसे हर सकती।। प्रह्लाद थे भक्त सच्चे, हरि के नाम में थे अच्छे। होलिका ने थी चाल चली, पर खुद ही आग में जली।। सीखा हम सबने ये प्यारा, सच का दीप रहे उजियारा। नफरत, झूठ जलाना है, प्यार से होली मनाना है।। मिलजुल खेलो, खुशियाँ लाओ, सबको गले लगाकर जाओ। रंग भरे यह जीवन प्यारा, होली का त्योहार है न्यारा। जलती होलिका यह सिखलाये,  सत्य राह में जो डिग पाए। भय-नफरत सब मिट जाए,  प्यार का रंग सदा चढ़ जाए।। 🙏रचना-:  पुष्पा बहुगुणा (प्र०अ०)   रा० उ० प्रा० वि० पिपोला  वि०ख०- जाखणीधार, टिहरी गढ़वाल 🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

होली - श्री गोविन्द बल्लभ भट्ट जी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला,  हिम मन मन्थन  में होली पावन पर्व के सुअवसर पर  प्रस्तुत है जनपद पिथौरागढ़ से शिक्षक साथी श्री गोविन्द बल्लभ भट्ट जी द्वारा रचित कविता-: 🙏🏾✍️होली तन भीगा अबीर, गुलाल से, मन के तार भी भीगे।  रंग लो तुम प्रेम रंग में,  भैया यह तो होली है।। धरती ने ली है अंगड़ाई, बासन्ती फुहार चली। हर कोंपल, खिलने को आतुर, भैया यह तो होली है।। पिचकारी में सज गए,  ये जाने, अनजाने रंग। बच्चे करते हैं हुड़दंग, भैया यह तो होली है।। गुजिया की मिठास निराली, छलके कहीं मय की प्याली, खेतों में फैली हरियाली, भैया यह तो होली है।। सजनी खेलती सजना संग, छलकाये प्यार की प्याली। रंग खेलते देवर-भाभी, भैया यह तो होली है।। जाति धर्म के भेद मिटा दो, हर मन में तुम प्रेम जगा दो। क्यों पचड़ों में पड़े हो तुम! भैय्या यह तो होली है।। 🙏रचना-: गोविन्द बल्लभ भट्ट (मुसाफिर ) रा० आ० प्रा० वि० -अजेडा, वि० ख०- डीडीहाट, पिथौरागढ़  🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

नारी तू महान है - श्रीमती सुनीता भटनागर

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला, हिम मन मन्थन में  प्रस्तुत है  जनपद नैनीताल से शिक्षिका बहिन श्रीमती  सुनीता भटनागर जी द्वारा रचित कविता-: 🙏✍️ नारी तू महान है!  नारी तू जीवन सार है, मात-पिता की शान भी। दो कुलों की आन-बान है, तू ही अर्पण और समर्पण भी।। ममता की तू खान है, सन्तान का अभिमान भी। लक्ष्मी और शक्ति तू है, शिवजी का गुमान भी।। नरी नहीं तू जहाँ है यामिनी भी दामिनी भी। अन्त और अनन्त तू है,  कण-कण में विराजमान भी।। नटी सी तू चंचल है, पर आकाश सा आंचल भी। धूल का कण है तो,  इमारत की ईंट भी।। दर्पण सी साफ है,  तो तू अक्स भी। लाख बंदिशों में, आजाद पंछी भी।। तू जिन्दगी की हकीकत,  ममता की मूरत भी। हालात से ना हारी है जो, वह मजबूत साख भी।। कहीं पिता की छाया बन,  बनती तू सहारा भी। तो कहीं भाई-बहन का,  प्यार और संबल भी।। तू जीवन्त है, साकार है, समाधान है। नारी तू महान है, इस धरा की शान है। नारी तू महान है, इस धरा की शान है।। 🙏 रचना-: सुनीता भटनागर (प्र०अ०) रा० प्रा० वि० पनिया मेहता  भीमताल, नैनीताल 🙏संकलन- टीम हिम मन मन्...

शक्ति स्वरूपा नारी- श्रीमती सुशीला थपलियाल

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला, हिम मन मन्थन में "अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस" के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है जनपद रुद्रप्रयाग गढ़वाल से शिक्षिका बहिन श्रीमती सुशीला थपलियाल जी द्वारा रचित कविता-: ‌🙏🏾✍️शक्ति स्वरूपा नारी  बेटी स्वरूप में जन्म लिया, माँ-बाप की लाड़ी-प्यारी। अपने घर के बगिया की, मैं सुन्दर सी फुलवारी।।  मैं बहना अपने भाई की,  हूँ उनके जीवन का दर्पण।   प्रतिक्षण-प्रतिपल रहती हूँ,  ‌भाई के सुख-दुःख में अर्पण।।         शादी के बन्धन में बंधकर, पति का घर आबाद किया। माँ बनकर अपने बच्चों के, ममत्व का सोभाग्य मिला।।  सारे दर्द अपने भुलाकर, मैं ही खुशहाली लाती। हर क्षण, हर पल दुनिया को, मैं ही रोशनी देने वाली।। वो महान शक्ति है नारी, शक्तिस्वरुपा सम्मानित। जीवन के हर क्षेत्र में संग, है जो देवों से भी पूजित।।  नारी है सर्वस्व अग्रणी, त्याग, बलिदान, ममता की मूर्ति। कर्तव्यनिष्ठ, पूरक पुरुष की, ईश्वर की हो सुन्दर कृति।। 🙏रचना-: सुशीला थपलियाल (प्र०अ०) रा० प्रा० वि० पपडासू वि० ख०- जखोली जनपद- रुद्रप्रय...

🙏 ब्वे - श्री मनोज घिल्डि़याल

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला, हिम मन मन्थन में "अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस" के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है जनपद पौड़ी गढ़वाल से शिक्षक साथी श्री मनोज घिल्डि़याल जी द्वारा रचित गढ़वाली कविता-: *🙏🏾✍️ब्वे* अफु त तचणी रैंद व, अपड़ि गैती घाम नि चितांद।  अर हैंकखुणै,  डाली छैल बण जांद व।।  अफु त भिजणी रैंद व, अपड़ि गैती गिल्लि नि चितांद।  अर हैंकखुणै, छतुल बण जांद व।।  अफु त भुक्कि रैंद व, अपड़ि भूख नि चितांद।  अर हैंक खुणै, रुट्टी गप्फा बण जांद व।।  अफु तिसलि रैंद व, अपड़ि तीस नि चितांद।  अर हैंकखुणै, पाणी घुटाक बण जांद व।।  अफु बिज्जि रैंद व, अपड़ि निंद नि चितांद।  अर हैंक खुणै, घुघूती बसूती बण जांद व।।  अफु सैणी किटेणी पत्वलेणी रैंद व, अपड़ि खैरि विपदा नि चितांद।  अर हैंकखुणै, धरति बण जांद व।। 🙏रचना-: मनोज घिल्ड़ियाल  रा० प्रा० वि० गाडियूंँ  प्रखण्ड- रिखणीखाल  जिला- पौड़ी गढ़वाल 🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड