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जनवरी, 2023 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

बेटियाँ- श्रीमती देवेश्वरी सेमवाल जी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में राष्ट्रीय बालिका दिवस के सुअवसर पर प्रस्तुत है आज जनपद- रुद्रप्रयाग से शिक्षिका बहन श्रीमती देवेश्वरी सेमवाल जी  द्वारा रचित कविता:- 🤷‍♀️ बेटियाॅं  जन्म के साथ ही खुशियाँ लाती हैं बेटियाँ,  ईश्वर की सौगात होती हैं बेटियाँ।  त्याग और समर्पण सिखाती हैं बेटियाँ,  नये-नये रिश्ते बनाती हैं बेटियाँ।।  माँ-बाप की दुलारी होती हैं बेटियाँ,  चाँद सी प्यारी होती हैं बेटियाँ।  सच्ची मोती सम होती हैं बेटियाँ,  हर कार्य में तत्पर होती हैं बेटियाँ।।  अनमोल हीरा होती हैं बेटियाँ,  न परायी और न पराया धन हैं बेटियाँ।  बड़ा ही अनमोल खजाना होती हैं बेटियाँ,  क्योंकि परिवार को एक माला में पिरोती हैं बेटियाँ।।  घर-आँगन का श्रृंगार हैं बेटियाँ,  सच्चे रिश्तों का आधार हैं बेटियाँ।  फूलों की महकती फुलवारी हैं बेटियाँ,  जीवन की एक अनमोल धरोहर हैं बेटियाँ।।  हम सबकी जान होती हैं बेटियाँ,  हर एक के मुकद्दर में कहाँ होती बेटियाँ।  जो घर ईश्वर को पसन्द ...

वीर माधो सिंह भण्डारी-श्रीमती पुष्पा बहुगुणा

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है आज जनपद- टिहरी गढ़वाल से शिक्षिका बहन श्रीमती पुष्पा बहुगुणा श्री  द्वारा रचित कविता:- 📝वीर माधोसिंह भण्डारी          एक सिंह रैन्द-वण,  एक सिंह गाय का।  एक सिंह माधो सिंह,  और सिंह काहे का।।  अग्र पंक्ति माधोसिंह के,  शौर्य को हैं दर्शाती।  जिनके शौर्य की गाथाएंँ भरत भूमि है गाती।।    वक्ष चौड़ा,भुज विशाल,  और अति बलवान था।  शत्रु भय से काँपते,  ऐसा गुंजायमान था।।  प्रसिद्ध नाम माधोसिंह,  वीरभद्र उपनाम था।  सोणबाण कालू भण्डारी,  पिता का नाम था।।    सन् 1595 गाँव मलेथा में,  जन्म हुआ उस वीर-भड़ का।  कम उम्र में ही वह वीर,  राज सेना में शामिल हुआ।।  वीर शौर्यवान था वह,  इसलिए सेनाध्यक्ष बना।  मुगलों और गोरखों में,  भयंकर भय पैदा हुआ।।    माधो सिंह भण्डारी की,  चहुँ ओर थी गरिमा।  भारत-चीन की जिन्होंने,  निर्धारित की थी सीमा।।  तिब्बती मा...

स्वामी विवेकानन्द- श्री मनोज कुमार घिल्ड़ियाल

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में राष्ट्रीय युवा दिवस पर प्रस्तुत है आज जनपद- रुद्रप्रयाग गढ़वाल से शिक्षक साथी श्री मनोज घिल्ड़ियाल जी द्वारा रचित कविता:- 🙏📝स्वामी विवेकानन्द माता भुवनेश्वरी देवी की धार्मिकता, और पिता विश्वनाथ की बौद्धिकता। बाल नरेन्द्र नाथ को अद्भुत बनाती है, उत्कण्ठा गुरु रामकृष्ण समीप ले जाती है।। मिला समाधान जिज्ञासाओं को जब, शान्त हुआ मन जीवन बदला तब।कश विश्वधर्म सम्मेलन में प्रतिभाग किया जब, युवा संन्यासी रूप में उद्भव हुआ तब।। शिकागो जाकर उन्होंने जब भाषण दिया, अमरीकी भाई-बहनों कह सम्बोधित किया। यह सुन जनसमूह मन्त्रमुग्ध हो गया, अपलक देख ताली बजाता रह गया।। इसे आध्यात्मिक भाषण कहा गया था, तब सारे संसार को प्रभावित किया था। यूरोपीय अखबारों ने ऐतिहासिक कहा था, और सम्मेलन का प्रभावी व्यक्ति कहा था।। शीघ्र ही वे फिर विश्व क्षितिज पर छाए, हिन्दू धर्म, आध्यात्म को फिर रखा जिलाए। बहुमुखी प्रतिभा से युवाओं को खूब भाए, यही युवा सन्त स्वामी विवेकानन्द कहलाए।। 🙏रचना:- मनोज घिल्डियाल (स०अ०)  रा० प्रा० वि० कलीगाड वि० ख०- रिखणीखाल, पौड़ी ग...

शिशुलोक पत्रिका विमोचन एवं सम्मान समारोह - श्री हेमन्त कुमार चौकियाल जी

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📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में  प्रस्तुत है आज राजकीय प्राथमिक विद्यालय- जैली, ब्लाॅक - जखोली जनपद-रुद्रप्रयाग में आयोजित लोक संस्कृति दिवस के सुअवसर पर छात्र, शिक्षक एवं विशिष्ट जन सम्मान समारोह, विद्यालय की वार्षिक पत्रिका शिशुलोक का लोकार्पण एवं कवि सम्मेलन की आख्या-: *पत्रिका के लोकार्पण के अवसर पर उत्तराञ्चल शिशुलोक सम्मान से हुए बच्चे, शिक्षक और समाजसेवी सम्मानित*  उत्तराखण्ड के गाँधी के नाम से विख्यात स्व० इन्द्रमणि बड़ोनी जी के जन्मदिन "लोक संस्कृति दिवस" पर रा०प्रा०वि० जैली में मुख्य अतिथि के रूप में बच्चों व उपस्थित समुदाय को संबोधित करते हुए रुद्रप्रयाग के मुख्य शिक्षा अधिकारी श्री विनोद प्रसाद सिमल्टी ने विद्यालय के शैक्षिक और शिक्षणेत्तर वातावरण की प्रशंसा करते हुए कहा कि विद्यालय द्वारा बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए बहुत सराहनीय कार्य किया जा रहा है। उन्होंने विद्यालय की सप्तम वार्षिक पत्रिका शिशुलोक का अवलोकन करते हुए कहा कि यह पत्रिका बच्चों के लेखन कौशल के साथ संवेगात्मक विकास में भी मदद कर रही है। बच्चों द्वारा हस्त निर्मित मासिक...