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बेटियाँ - श्रीमती बीना कठैत जी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में बेटी दिवस पर प्रस्तुत है, आज जनपद टिहरी गढ़वाल से शिक्षिका बहिन श्रीमती बीना कठैत जी की कविता - बेटियाँ  खिलती हुई कलियाँ हैं बेटियाँ, माँ-बाप का दर्द समझती हैं बेटियाँ। सुख-दुःख में साथ निभाती हैं बेटियाँ, ससुराल और मायके की शान हैं बेटियाँ।। दो घरों की लाज हैं बेटियाँ, कल हैं तो आज हैं बेटियाँ। माँ के रूप में बेटियाँ, बहन के रूप में बेटियाँ।। पत्नी के रूप में बेटियाँ, सृष्टि का आधार हैं बेटियाँ। वंश की रचनाकार हैं बेटियाँ, भाई की कलाई की शान हैं बेटियाँ।। माँ-बाप की जान हैं बेटियाँ, काली का रूप हैं बेटियाँ। लक्ष्मी का स्वरूप हैं बेटियाँ, परिवार को स्वर्ग बनाती हैं बेटियाँ।। घर से लेकर बाहर तक की, जिम्मेदारी निभाती हैं बेटियाँ। कितनी भी मुश्किलें आयें, फिर भी नहीं घबराती हैं बेटियाँ।। हर धर्म को निभाती हैं बेटियाँ, देश के उच्च पदों पर आसीन हैं बेटियाँ। देश की आन बान और शान है बेटियाँ, माँ-बाप का अभिमान हैं बेटियाँ।। 🙏 रचना- बीना कठैत (स०अ०) रा० प्रा० वि० मगरू भिलंगना, टिहरी गढ़वाल 🙏संकलन:- टीम हिम मन मन्थन, उत...

स्कूल में प्रवेश - श्रीमती रेखा पुरोहित जी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है, आज जनपद रुद्रप्रयाग गढ़वाल से शिक्षिका बहिन श्रीमती  जी रेखा पुरोहित जी की कविता - 👭✍️स्कूल में प्रवेश प्रथम बार जब शाला आते, आँसू आँखों में भर लाते। पल्लू मांँ का पकड़ करके,  उसके पीछे वो छिप जाते।।  थोड़ा-थोड़ा वह शरमाते, कुछ कहने में वो घबराते। खुशी और डर दोनों के ही, भाव उनके चेहरे पर आते।।  मुझे नहीं है यहांँ रहना, कोई नहीं है यहांँ अपना। मांँ मुझे मत छोड़ के जाओ, संग मेरे कक्षा में आओ।।  भाव उसका ऐसा दिखता,  शाला में वो रहना चाहता। पर घर की याद जैसे आती, अश्रुधार आंँखों से बहती। नजरें उसकी ढूंँढने लगती, किसी परिचित अपने को। पर अपरिचित जब सब लगता, विचलित उसके मन को करता।।  धीरे-धीरे जब मन उसका, पाठशाला में रमने लगता। शिक्षक,साथी और स्कूल को अपना फिर वो समझने लगता।।  🙏 रचना :- रेखा पुरोहित (स०अ०)  रा० प्रा० वि० सौंराखाल विकासखण्ड- जखोली जनपद- रुद्रप्रयाग 🙏संकलन:- टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

मैं और मेरा समाज - श्रीमती सरोज डिमरी जी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है, आज जनपद चमोली गढ़वाल से शिक्षिका बहिन श्रीमती सरोज डिमरी जी की कविता - ✍️मैं और मेरा समाज   समाज के साथ अपने,  सुख-दुख बाँटना है।  पर शायद मैं और मेरी कल्पना, समाज का ही तो एक अंग हैं।। हर कदम पर अमिट छाप दे जाना, धरती माँ के इस कर्ज को जरुर चुका जाना। पर्यावरण संवर्द्धन कर समाज की सेवा करना, यह आदर्श मिसाल कायम करना है।। मानवता का कोना-कोना, सदा पुष्पित-पल्लवित होता है। निर्जन स्थल भी मानवता के आगे, नतमस्तक होता है।। शर-सन्धान अगर कर लेता है, निशाना नहीं चूकने पाता। जीवन जी सन्तुष्ट हो जाता, मानव कृत-कृत्य हो जाता।। 🙏 रचना- सरोज डिमरी (स०अ०) रा० आ० उ० प्रा० वि०- गौचर वकर्णप्रयाग, चमोली 🙏संकलन:- टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

हिन्दी- सुश्री विजयलक्ष्मी जी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है, आज जनपद नैनीताल से शिक्षिका बहिन सुश्री विजयलक्ष्मी जी की कविता - ✍️हिन्दी संस्कृत ने संस्कृति बनायी, हिन्दी ने हिन्दुस्तान। ऐसी देवमयी भाषा को, कोटि कोटि प्रणाम।। माँ की ममता-पिता का प्यार है हिन्दी, सरल-सौम्य, मर्यादित संस्कार है हिन्दी। मेरे हृदय का उद्गार है हिन्दी, प्रेम का पारावार है हिन्दी।। सृष्टि का अह्लाद है हिन्दी। आत्म-अन्तर्नाद है हिन्दी। मेरी वाणी का साज है हिन्दी, मेरी धड़कन की आवाज है हिन्दी।। कश्मीर से कन्याकुमारी तक, जोड़ती तार है हिन्दी। भारत माँ का अनुपम दुलार है हिन्दी,  लक्ष्मीबाई का शौर्य प्रताप की आन है हिन्दी।। अशफाक की शहादत शेखर की शान है हिन्दी, सुभाष का स्वाभिमान भगत का बलिदान है हिन्दी। मेरी जान है, मेरी पहचान है हिन्दी, सूर के पद तुलसी की चौपाई है हिन्दी।। कबीर की साखी में समाई है हिन्दी, दादा-नाना के किस्सों का विस्तार है हिन्दी। नानी-दादी की कहानी का आधार हिन्दी, मेरा सम्मान है, मेरा प्राण है हिन्दी।। मेरी उन्नति और उत्थान है हिन्दी, बसन्त की बहार, रंगों की फुहार है हिन्दी...

गुरु पर्व - श्रीमती मीना गोस्वामी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है, आज पिथौरागढ़ से शिक्षिका बहिन श्रीमती मीना गोस्वामी जी की कविता - *गुरु पर्व*   याद है गुरु आपकी महिमा,  आँखों में घूमती आपकी गरिमा। मीठी यादें, मीठे गीत, मीठी कविता व मीठा संगीत।। आपने सिखाया स्वरों का ज्ञान, जिससे थे हम सभी अंजान। अनपढ़ से शुरू कर ज्ञानी तक पहुँचाया, जीवन की कठिन डगर पर चलना सिखाया।। आपके ज्ञान से दूर हुए अज्ञान के अँधेरे, छँटे दुःख के बादल आए नये सवेरे। एक ने दुनिया में पहला कदम रखना सिखाया, दूसरे ने ज्ञान की रोशनी से जीवन चमकाया।। फिर हर कदम पर मिले गुरु के कई रूप, हर उम्र हर मोड़ पर आपके मिले कई स्वरूप। कितने भी गुण गाऊँ आपका है मुझ पर उपकार, कुछ भी कर लूँ फिर भी ऋण नहीं सकती उतार।।          🙏 रचना -   मीना गोस्वामी(प्र०अ०)    रा० प्रा० वि० भौड़ी  ब्लाक- मूनाकोट, पिथौरागढ़ 🙏संकलन:- टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

कालजयी गुरु - श्रीमती जया चौधरी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला *हिम मन मन्थन* में प्रस्तुत है, आज *जनपद चमोली* गढ़वाल से शिक्षिका बहिन श्रीमती *जया चौधरी* जी की कविता - ✍️कालजयी गुरु डगमगाते लड़खड़ाते, कदम गिरते उठते। मजबूत खड़ा किया तुमने, ज्ञान के स्तम्भों से।। छोटी नाजुक उँगलियों को, कलम पकड़ाके। वर्णों के मोती इकट्ठे कर, शब्द सागर किये तुमने।। पिता तुल्य सम्बल तुम्हीं, मासूम आँखों के। वाणी की ममता भी हो, तुतलाती बोलों के।। मजबूत धुरी भी हो, जीवन किले की पहली। पहचान का दर्पण भी हो, अच्छे बुरे को समझने का।। निर्माता कुम्हार बनकर, साकार करने का बल हो। कच्ची गीली मिट्टी को, कुछ सीखने की खुशी हो।। नन्हीं सी आँखों में, अज्ञान तम को चीरते हो। ज्ञान के प्रकाश से, भविष्य सँवारते हो।। छोटी सी कक्षाओं में, कालजयी तुम गुरु हो। सच्चे निर्माता बनकर, मार्गदर्शी वाणी से जीवन के पाठ सिखाते हो।। फैलती जब शिष्य की कान्ति चिर आत्मिक शान्ति भी हो। उज्ज्वल राष्ट्र बनाने को तत्पर, अनमोल तजुर्बों की सृजनशील सीख भी हो।। 🙏 रचना-  जया चौधरी (स०अ०) रा० प्रा० वि० बलखिला मलारी, वि० ख० - जोशीमठ, चमोली उत्तराखण्ड 🙏संकलन:- टीम ह...

बस तुम अच्छे बन जाओ - श्रीमती सुषमा नेगी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है, आज जनपद देहरादून से शिक्षिका बहिन श्रीमती सुषमा नेगी जी की कविता - बस तुम अच्छे बन जाओ मुझको उड़ना संग तुम्हारे, बस तुम अच्छे बन जाओ। मुझको जुड़ना मन से तुम्हारे, बस तुम अच्छे बन जाओ।। जो बाधाओं को पार करे, ऐसे तुम अपने पग ढूँढो। उत्साह भरो अपने मन में, आशाओं का गगन छूलो।। दूर रहो हर दुर्भाव से, बस तुम अच्छे बन जाओ।  मुझको जुड़ना मन से तुम्हारे, बस तुम अच्छे बन जाओ।। जीवन में बस आगे बढ़ना, सबका आशीष पाना तुम। गलत बात पर कभी कहीं भी, शीश मत झुकाना तुम।। खुशियों वाला पाओ हर दिन, बस तुम अच्छे बन जाओ। मुझको जुड़ना मन से तुम्हारे, बस तुम अच्छे बन जाओ।।  जिस पथ पर भी जाओगे तुम, उसको आलोकित कर देना। नन्हें-नन्हें कदमों से तुम, सुन्दर जीवन रच देना।। हर मन को तुम भाते जाना, बस तुम अच्छे बन जाओ। मुझको जुड़ना मन से तुम्हारे,  बस तुम अच्छे बन जाओ।। 🙏 रचना- सुषमा नेगी (स०अ०)  राo प्राo विo आर्यनगर काठबँगला  नगर क्षेत्र देहरादून  जनपद- देहरादून 🙏संकलन:- टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

ज्ञान के दीपक-श्रीमती ललिता जोशी जी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में  प्रस्तुत है, आज जनपद पिथौरागढ़ से शिक्षिका बहिन श्रीमती ललिता जोशी जी की कविता - ज्ञान के दीपक   ज्ञान के दीपक हैं शिक्षक, मार्ग के दर्शक हैं शिक्षक।  नमन है इनके चरण में, रहें सदा इनकी शरण में।। आदर भाव जगाएँ मन में,  ज्ञान के हैं दीप शिक्षक।  सभ्यता के हैं ये रक्षक, संस्कृति के हैं संरक्षक।। सगुणकारी धर्मरक्षक, अन्धकार के हैं ये भक्षक।  कीर्तिमान जगाएँ मन में, ज्ञान के हैं दीप शिक्षक।।  दिव्य ज्ञान दर्शाते शिक्षक, अन्धकार हटाते शिक्षक। ह्रदय में शक्ति दीप जलाते, जीवन पथ पर चलना सिखाते।।  🙏 रचना -  ललिता जोशी (स०अ०) रा० उ० प्रा० वि० पुगौर वि०ख० - मूनाकोट, पिथौरागढ़ 🙏संकलन:- टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

नगाधिराज हिमालय:-श्रीमती माधुरी नैथानी जी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में  प्रस्तुत है, आज जनपद पौड़ी गढ़वाल से शिक्षिका बहिन श्रीमती  माधुरी नैथानी जी का लेख- ✍️"नगाधिराजः हिमालय"  अस्त्युत्तरस्यां दिशि देवतात्मा, हिमालयो नाम नगाधिराज:। पूर्वापरो तोयनिधिं वगाह्य, स्थित पृथिव्या इव मानदण्ड:।।-कुमार सम्भव  (उत्तर दिशा में हिमालय नाम का पर्वत राज है। जो देवतात्मा है। यह पूर्व और पश्चिम सागरों का अवगाहन करके पृथ्वी के मानदण्ड के समान स्थित है।) गिरिराज हिमालय अगर भूगोल होता तो उसे स्मरण दिलाने वाला नक्शा हटा देने से उसे भुलाया जा सकता था।हिमालय इतिहास भी नहीं है जिसे प्रगति शील बना कर बुलाया जा सके।  हिमालय भूतकाल और भविष्यत् काल नहीं केवल वर्तमान काल है। डॉ विद्या निवास मिश्र ने "अस्ति की पुकार हिमालय "निबन्ध में "अस्ति"( है)को शानदार शब्दों में परिभाषित किया है विद्योत्तमा के "अस्ति" शब्द ने कालिदास‌ को संस्कृत साहित्य का महान कवि होने का गौरव प्रदान किया, और हिमालय ने अपने आशीर्वाद से युग- युगान्तर के लिए अमरत्व प्रदान किया। हिमालय धैर्य, साहस, विनम्रता और...

हिन्दी दिवस - श्रीमती देवेश्वरी सेमवाल

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में हिन्दी दिवस के पावन पर्व पर प्रस्तुत है, आज जनपद रुद्रप्रयाग से शिक्षिका बहिन श्रीमती देवेश्वरी सेमवाल जी की कविता - हिन्दी दिवस हर एक जन की भाषा हिन्दी,  सम्पूर्ण भारत की आशा है हिन्दी।  जिसने इस सम्पूर्ण देश को जोड़ा है,  बस ऐसा मजबूत धागा है यह हिन्दी।।  सारे हिन्दुस्तान की गाथा है हिन्दी,  बस एकता की अमिट छाप है हिन्दी।  हर एक के दिलों का उद्गार है हिन्दी,  बस सबके जीवन की आश है हिन्दी।।  माँ की लोरी की तान है हिन्दी,  सबके दिलों की मुस्कान है हिन्दी।  माँ के भजनों की धुन है यह हिन्दी,  सबके सपनों की उम्मीद है हिन्दी।।  माँ के ममत्व में छिपी है हिन्दी,  पिता की सच्ची छाया है हिन्दी।  हिन्दुस्तान की सच्ची पहचान है हिन्दी, बस भारत माँ की सच्ची शान है हिन्दी।।  🙏रचना   देवेश्वरी सेमवाल (स० अ०)    रा० उ० प्रा० वि० कान्दी   ब्लाँक- अगस्त्यमुनि, रुद्रप्रयाग 🙏संकलन:- टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

एक शिक्षक - श्रीमती पूनम भट्ट

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में शिक्षक दिवस के पावन पर्व पर प्रस्तुत है, आज जनपद टिहरी गढ़वाल से शिक्षिका बहिन श्रीमती पूनम भट्ट जी की कविता - 🙏 🕉️✍️एक शिक्षक गर्मी की धूप में निश्छल,  हवा के झोंके जैसा।  हरदम हरपल नित नए,  स्वप्न को आकार देता। एक शिक्षक ही कर पाता है।।  नन्हे तुतलाते शब्दों को,  एक नया आयाम देता।  कच्ची मिट्टी पाकर,  गढ़ने में जुट जाता।  एक शिक्षक ही कर पाता है।।  सुप्त ज्ञान को करके जागृत,  नई बुलन्दियों तक पहुंँचाता।  भूले भटके कदमों को,  सही राह है दिखाता। एक शिक्षक ही कर पाता है।। ज्ञान का अंकुर प्रस्फुटित करता,  स्वयं से पहचान करवाता।  नवीन शिक्षण विधियाँ अपनाता,  सदा नवाचारी प्रयास करता।  एक शिक्षक ही कर पाता है।। सबको आगे बढ़ने का संकल्प, प्रयासरत रहने को तत्पर।  कामयाबी पर गर्वित होता,  नाकामयाबी में भी सीख बतलाता।  एक शिक्षक ही यह कर पाता है।।  🙏रचना    पूनम भट्ट (स०अ०)  रा० प्रा० वि० वीड  चम्बा, टिहरी ग...

शिक्षक सम्मान - श्रीमती भागीरथी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में शिक्षक दिवस के पावन पर्व पर प्रस्तुत है, आज जनपद नैनीताल से शिक्षिका बहिन श्रीमती भागीरथी पाण्डेय जी की कविता - 🙏🕉️✍️शिक्षक सम्मान नन्हीं अंगुली पकड़कर के जो, करा देते हैं अक्षर ज्ञान। जीवन बंसी के सुरों में, भर देते विद्या की तान।। लुटा कर अपना ज्ञान खजाना, शिष्य को कर देते धनवान। इसीलिए तो गुरु के आगे, नतमस्तक होते भगवान।। सब पद, प्रतिष्ठा से ऊपर, होता शिक्षक का स्थान। दुनिया की दौलत से बढ़कर, गुरुजनों से पाया जो ज्ञान।। समझे शिक्षक की गरिमा को, डाॅ० राधाकृष्णन जी महान। शिक्षाविद, दार्शनिक जगविख्यात, बढ़ाई भारत रत्न की शान।। राष्ट्रपति पद सुशोभित किया, छोड़ी न शिक्षक की पहचान। अपना जन्मदिन समर्पित करके,  दिया शिक्षकों को सम्मान।। 🙏 रचना -  भागीरथी पाण्डे,(प्र० अ०) रा० प्रा० वि० परमा,  ब्लॉक हल्द्वानी, नैनीताल 🙏संकलन:- टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

श्रीकृष्ण - श्रीमती रेखा पुरोहित जी

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📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है, आज जनपद रुद्रप्रयाग गढ़वाल से शिक्षिका बहिन श्रीमती रेखा पुरोहित जी की कविता- श्रीकृष्ण यशोदा की आँख का तारा, नन्द का लाला वो नन्दलाला। गोपियों का जो कान्हा प्यारा, दाऊ का भी है बहुत दुलारा। बाल गोपाल वो सबसे न्यारा।। मोरपंख जो सिर पे लगाता, माखन जिसको बहुत ही भाता। मधुवन में गायों को चराता, अधरों पर मुरली जो सजाता। मुरलीधर कान्हा कहलाता।। पूतना ने जब विष पिलाया, राक्षस योनि से मुक्त कराया, कालिया नाग को नाच नचाया, गोपियों के संग रास रचाया। वो मोहन लीलाधर कहलाया।। कंस और शिशुपाल को मारा, उग्रसेन को  राज दिलाया। माता पिता को भी मुक्त कराया, द्वारिका नगरी को बसाया। कान्हा द्वारकाधीश कहलाया।। दुर्योधन को बहुत मनाया, टले युद्ध यह मार्ग बताया। सदा धर्म का साथ निभाया, सारथी पार्थ का खुद को बनाया। फिर पार्थ सारथी वो कहलाया।। कुरुक्षेत्र की रणभूमि में, गीता का उपदेश सुनाया। मार्ग कर्म का जग को दिखाया, सत्य की जय हो यह समझाया। फिर योगेश्वर कृष्ण कहलाया।। 🙏  रचना  रचना:–रेखा पुरोहित (स०अ०)  रा० प्रा० ...

मेरे अँगना आना - श्रीमती पूनम भट्ट जी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है, आज जनपद टिहरी गढ़वाल से शिक्षिका बहिन श्रीमती पूनम भट्ट जी की कविता - मेरे अँगना आना कृष्णा ओ कृष्णा, मेरे अँगना भी आना, आए तुम नन्द बाबा के घर, मेरे घर भी आ जाना।। कृष्णा ओ कृष्णा, मेरे अँगना भी आना। तुमने बनाया गोकुल को धाम, बनाना मेरे मन को भी धाम।। कृष्णा ओ कृष्णा, मेरे अँगना भी आना। संग राधा रानी को लाना, उन संग रास रचाना।। कृष्णा ओ कृष्णा, मेरे अँगना भी आना। ओ माखनचोर दिल में बस जाना, अपनी नटखट लीलाएंँ दर्शाना।। कृष्णा ओ कृष्णा, मेरे अँगना भी आना। जैसे दिया अर्जुन को ज्ञान, मुझे भी बतला जाना।। कृष्णा ओ कृष्णा, मेरे अँगना भी आना, भक्तों के हृदय में बसने वाले, मेरे हृदय में बस जाना।। 🙏 रचना -  पूनम भट्ट (स० अ०) रा० प्रा० वि० वीड, वि० ख० - चम्बा, टिहरी गढ़वाल 🙏संकलन:- टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड