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नव वर्ष मंगलमय हो - श्रीमती सुशीला थपलियाल

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला, हिम मन मन्थन में "आँग्ल नववर्ष 2025" के शुभारम्भ की "मधुर बेला" पर प्रस्तुत है, जनपद- रुद्रप्रयाग से शिक्षिका बहिन सुशीला थपलियाल जी द्वारा रचित कविता-:      ‌‌‌   ‌‌‌‌ ‌‌‌  ‌‌   ‌‌ 🙏🏾🕉️🙏 ✍️नव वर्ष 2025 मंगलमय हो  नव उम्मीद नव-नव ज्ञान का प्रसार हो,  श्रेष्ठता हो राष्ट्र में नव चेतना साकार हो।  प्रमाण युक्त हर बिधा चलती रहे अविरल यहाँ,  स्वर्ग से सुन्दर बने हमारा ये जहाँ।।  अग्रणी बनने की चाहत हो तरणि (सूर्य) से तेज की,  ना उपेक्षा हो किसी की सीमा हो परहेज की।  कृतज्ञता का भाव विश्वसनीयता सब में रहे,  विषाद और अपयश का दर्द कोई नहीं यहाँ सहे।।  प्रकृति तथा पशु प्रेम का संकल्प लें मन में सभी,  भूल कर भी छति न पहुँचा सकें इनको कभी।  नव-यौवनाओं के लिए भाव हो वात्सल्य का,  सब की दृष्टि में सानिध्य हो भ्रातृत्व का।।  आशा तथा उम्मीद की लहरें हर दिल में बहे,  आसमां को छूने की चाहत यहाँ सबकी रहे। सूरमा जो देश के खातिर सदा तैनात है, ...