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संविधान निर्माता तुम्हें प्रणाम-श्रीमती बसन्ती शाह

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में राष्ट्रीय संविधान दिवस पर प्रस्तुत है, आज जनपद रुद्रप्रयाग से शिक्षिका बहिन श्रीमती बसन्ती शाह जी की कविता-  🙏✍️संविधान निर्माता तुम्हें प्रणाम  कोटि-कोटि प्रणाम तुम्हें,  संविधान के निर्माता। कोटि-कोटि प्रणाम तुम्हें, भारत के भाग्य विधाता।। उजड़े भारत की नींव डालने वाले, भारत को एक सूत्र में बाँधने वाले।  कोटि-कोटि प्रणाम तुम्हें, समता का दीप जलाने वाले।। नारी को अधिकार दिलाने वाले, समाज में पुरुषों से कन्धा मिलाने वाले। कोटि-कोटि प्रणाम तुम्हें, भारत का भविष्य सँवारने वाले।। नारी शोषण करने वालों को, दण्ड व्यवस्था का कानून वनाने वाले। कोटि-कोटि प्रणाम तुम्हें, समता का दीप जलाने वाले।। बच्चों को शिक्षा का अधिकार दिलाने वाले, बाल श्रम को अपराध मानने वाले। कोटि-कोटि प्रणाम तुम्हें, विश्व बन्धुत्व की भावना जगाने वाले।। 🙏रचना:- बसन्ती शाह (प्र०अ०)  रा० प्रा० वि० कुमडी़  वि० ख० - जखोली, रूद्रप्रयाग 🙏संकलन:- टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

आजाद जी तुम तैं नमन-श्रीमती सरिता भट्ट

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📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में  उत्तराखण्ड के आजाद पण्डित श्रीधर प्रसाद किमोठी जी की पुण्य तिथि पर प्रस्तुत है, आज जनपद रुद्रप्रयाग से शिक्षिका बहिन श्रीमती सरिता भट्ट जी द्वारा संकलित कविता -  *🙏📝आजाद जी तुम तैं नमन* पट्टी चन्द्रशिला का जांबाज छा तुम,  भिकोना गौं का श्रीधर आजाद छा तुम।  पिता छा तुम्हारा ब्रमानंद किमोठी,  ज्ञान की देवी माँ सरस्वती किमोठी।।  ज्ञान की क्रांति जगै ड्यौरा छोड़ी तैं,  सन्त जीवन बितै तुमन भग्वया चोळा पैरी तैं, पैदल बाटुं कु यन जाळ बिछायि,  शिक्षा की अलख गौं गौं मां जै तैं  जगायि।।  जेल मा रैक सत्याग्रह आन्दोलन करि,  तखि बिटिन नौं तुम्हारू आजाद पड़ि।  निश्वार्थ भाव से सदा काम करि,  कभि क्वे भि लालच नि करि।।  तुम च्हांदा त ऋषिकेश से बद्रीनाथ तक, कखि भी कोठि खड़ि करि द्यौंदा।।  पर आपन सदा अपडु़ जीवन सादापन मा बितायि ये हि कारण आप सदा लोगों का ध्यान मा रौंदा।।  23 नवम्बर का दिन श्रद्धांजलि द्यौंदा तुम तैं।  शत् -शत् नमन तुमु तैं, शत्-शत् नमन तुमु तैं।। 🙏...

मन का तम ना भगाया तो क्या फायदा - श्री सोमपाल जी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में   प्रस्तुत है, आज जनपद नैनीताल से शिक्षक साथी श्री सोमपाल जी की कविता -  ✍️मन का तम ना भगाया तो क्या फायदा?   दूसरों को तो तुम थे जगाते रहे, खुद को ना जगाया तो क्या फायदा? ज्ञान के रंग में सबको रंगते रहे, खुद को ना रंगाया तो क्या फायदा? दीप इतने जलाये कि घर आँगन, सबके सब रोशनी पे फिदा हो गये। इतने फोड़े पटाखे जलीं फुलझड़ी,  तारे सब आसमाँ से विदा हो गए।। रोशनी कर जहाँ से भगा तम दिया, मन का तम ना भगाया तो क्या फायदा‌ ? दूसरों को ..... देखो हर्षित ये सारा गगन हो गया,  देखकर ये तुम्हारे जलते दिये। मेरा दिल भी खुशी से मगन हो गया,  देख संदेश शुभकामनाओं भरे।। छल, कपट, ईर्ष्या मन में पाले रहे, तो शुभ संदेश देने से क्या फायदा? गर सदा मन तेरा जो दुआयें न दे, ऐसी शुभकामनाओं से क्या फायदा ? दूसरों को .... फोन कर हाले दिल पूछते तो रहे, पर सम्मुख कभी भी आते नहीं। सामने तो बड़ा मीठा गाते रहे, पीठ पीछे कभी बतियाते नहीं।। जीवन भर तो रिश्ते बनाते रहे, ना सही से निभाया तो क्या फायदा ? दूसरों को..... 🙏 रचना स...

संस्कृत के महाकवि- कालिदास -श्री कालिका प्रसाद सेमवाल

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में  महाकवि कालिदास जी की पावन जयन्ती के सुअवसर पर प्रस्तुत है, आज जनपद रुद्रप्रयाग से श्री कालिका प्रसाद सेमवाल जी (अवकाश प्राप्त, प्रवक्ता) का लेख -:   संस्कृत भाषा के महाकवि थे- कालिदास ==== ========================       महाकवि कालिदास संस्कृत भाषा के सबसे महान कवि नाटककार थे कालिदास नाम का शाब्दिक अर्थ काली का सेवक है इनकी प्रतिभा, अद्भुत कल्पना शक्ति और उत्कृष्ट नाटक निर्माण के कारण ही भारतीय विद्वानों ने इन्हें कवि कुल गुरु और कवि शिरोमणि की उपाधियाँ प्रदान की थी। कालिदास अपनी अंलकार युक्त सुन्दर सरल और मधुर भाषा के लिये विशेष रुप से जाने जाते हैं उनके ऋतु वर्णन अद्वितीय और बेमिसाल हैं, संगीत उनके साहित्य का प्रमुख अंग है उन्होंने अपने श्रृंगार रस और साहित्यिक सौन्दर्य के साथ-साथ आदर्शवादी परम्पराओं और नैतिक सिद्धान्तों का समुचित ध्यान रखा है।उनका नाम अमर है और उनका स्थान बाल्मीकि और व्यास की परम्परा में है।      महाकवि कालिदास जी का जन्म कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द...

भैला-भैला- श्रीमती अंजना कण्डवाल 'नैना' जी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में श्री हरिबोधनी एकादशी पावन पर्व के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है, आज जनपद पौड़ी गढ़वाल से शिक्षिका बहिन श्रीमती अंजना कण्डवाल 'नैना' जी की कविता -  भैला-भैला भैला भैला इगासी ऐ ग्याई, खेला भैला, खेला भैला। गोरू की गोट घोर ऐ ग्याई खेला भैला, खेला भैला।।  बीती चौमासु देव, बिजी गयेनि, खेला भैला, खेला भैला। देवतों को रांसो, मण्डाण लगावा,  खेला भैला, खेला भैला।। नन्दा का मैत शिवजी सौरस मा, खेला भैला, खेला भैला। तुलसा जी को ब्यौ दिन ऐ ग्याई,  खेला भैला, खेला भैला।। माधो भण्डारी रण जीती ऐग्ये,  खेला भैला, खेला भैला। सैरू गढ़वाल फूलों न सजीग्ये,  खेला भैला, खेला भैला।। गौं कु गुठयारों पंचैती चौक मा, खेला भैला, खेला भैला। बन बनी फूलों न थाली सजावा, खेला भैला, खेला भैला।। गोधन सींगों मा तेल लगावा,  खेला भैला, खेला भैला। फुल माला लेकि पूजन करावा,  खेला भैला, खेला भैला।। बळ्दों की जोड़ी थैं तेल पिलवा,  खेला भैला, खेला भैला। गोरू बछरों पीण्डू खलावा, खेला भैला, खेला भैला।। 🙏 रचना-: अंजना कण्डवाल 'न...

चाचा नेहरू - श्रीमती ज्योति साह

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में बाल दिवस पावन पर्व प्रस्तुत है, आज जनपद नैनीताल से शिक्षिका बहिन श्रीमती ज्योति साह की कविता -  🙏✍️ चाचा नेहरु        भारत का एक लाल, नाम उनका जवाहर लाल। पण्डित मोती के घर में, जन्मे 14 नवम्बर 1889 में।।  इलाहाबाद में हुई पढ़ाई, पन्द्रह वर्ष में गये इंग्लैण्ड।  हैलो पब्लिक स्कूल में शिक्षा पाई, कैम्ब्रिज के बने स्टूडेंट।।  लन्दन विश्वविद्यालय से बैरिस्टरी, स्वदेश आकर वकालत शुरू की। अंग्रेजों के अत्याचार से द्रवित हुए, वकालत छोड़ आन्दोलन में कूदे।।   गाँधी जी राजनीतिक गुरु बने, छोड़े पेरिस के कपड़े पहनने।   स्वदेशी खादी करी स्वीकार,  आन्दोलनों में गये कारागार।।  15 अगस्त 1947 को मिली आजादी, प्रथम प्रधानमंत्री बने जवाहरलाल। किया भारत का चतुर्दिक विकास, जवाहर हृदय सौंदर्य के पुष्पित गुलाब।।  बच्चों से  बेहद प्यार करते, बच्चों से वे मिलते, खेलते।      इसीलिए चाचा कहलाते, 14 नवम्बर बाल दिवस मनाते।। 🙏 रचना-  ज्योति साह (प्र०अ०)...

इगास बग्वाळ - डाॅ० आभा भैंसोड़ा

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला *हिम मन मन्थन* में श्री *हरिबोधनी एकादशी * पावन पर्व प्रस्तुत है, आज जनपद *नैनीताल* से शिक्षिका बहिन श्रीमती आभा भैंसोड़ा * जी की कविता -  *इगास बग्वाळ* उत्तराखण्ड का पर्व है खास, नाम जिसका कहते इगास। कार्तिक मास की एकादशी, धूमधाम से मनाई जाती खुशी।। उत्तराखण्डी दीवाली त्योहार, अन्य नाम कहा जाता बग्वाळ। ग्यारह दिन बाद दीपावली के, दीप अवलि से सजता त्योहार।। ग्यारह दिन बग्वाळ बाद इगास, धूमधाम से मनाते पर्व यह खास। इगास को कहते बूढ़ी दीवाली भी, नई पीढ़ी तक पहुँचे संदेश यह भी।। भैलो एक आग का है खेल, रस्सी में बाँध आग घुमाना विशेष। भैलो खेलने का रिवाज है इगास    रोशनी खास आनन्द, हास, परिहास।। 🙏 रचना :- डॉ० आभा सिंह भैसोड़ा (स०अ०) रा० प्रा० वि०- देवलचौड़ ब्लाॅक- हल्द्वानी, नैनीताल 🙏संकलन:- टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

दीवाली मंगलमय हो - श्रीमती सन्नू नेगी जी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में श्री दीपावली  पावन पर्व पर प्रस्तुत है, आज जनपद चमोली से शिक्षिका बहिन श्रीमती सन्नू नेगी जी की कविता-  दीवाली मंगलमय हो  घर-घर में दीवाली हो, हर आंँगन हरियाली। खुशियों के नव दीप जलें, दुःखी न हो कोई आली।।  सुख-समृद्धि धन धान्य रहे, स्नेह निमन्त्रण रचते रहें। नहीं किसी पर विपदा आये, सब स्वस्थ्य, मस्त, आरोग्य रहें।। लक्ष्मी जी की कृपा रहे, दरिद्रता से दूरी बनी रहे। मांँ सरस्वती का आशीर्वाद, बच्चे-बच्चे पर सदा रहे।।  विचारों में शुद्धता रहे, भेद भाव नित मिटता रहे। सफलता की ऊंँचाइयों को, हर कोई धीरे-धीरे छूता रहे।।  दीवाली के दीपों से नित, जगमग मन चमकते रहें। राग-द्वेष का भाव मिटा, प्रेम भाव नित्य बढ़ते रहें।।  घर का मैल मिटाने के संग, मन का मैल मिटाते रहें। पुत्रों के संग पुत्रियों का भी, सदा मान सम्मान करते रहें।। जीवन है अनमोल सभी का, प्रभु की दयादृष्टि बनी रहे। रामचन्द्र का पावन जीवन, सबका आदर्श बनता रहे।।  🙏 रचना- सन्नू नेगी(स०अ०) रा० उ० प्रा० वि० सिदोली ब्लाॅक- कर्णप्रयाग, चमोली,...

दीपों का त्योहार - सुश्री विजयलक्ष्मी जी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में श्री दीपावली  पावन पर्व पर प्रस्तुत है, आज जनपद नैनीताल से शिक्षिका बहिन सुश्री विजयलक्ष्मी जी की कविता  -  दीपों का त्योहार  आ गया दीपों का त्योहार, छा गया मन में हर्ष अपार। लक्ष्मी मैया पधारो मेरे आँगन में।। रंगोली और चौक पुराएँ, ड्यौढ़ी वन्दनवार सजाएँ। गूँथी है पुष्पों की माल, पधारो मेरे आँगन में।। स्वच्छ और निर्मल नीलगगन है, जगदीश्वरी तुमको नमन है। आवें घर-घर चरण तुम्हार, पधारो मेरे आँगन में।। लक्ष्मी संग माँ शारदा माता, तुम ही जग की भाग्य विधाता। लेकर गणपति को साथ, पधारो मेरे आँगन में।। राजा और रंक वन्दन करते, तुमसे सारे काज सँवरते। जगमग है दीपों से रात, पधारो मेरे आँगन में।। सबकी दीन-दरिद्रता हर कर, घर-घर धन और धान्य भरकर। करने ममता की बरसात, पधारो मेरे आँगन में।। जड़ता और अज्ञान मिटाकर, भेद-भाव मन कलुष हटाकर। मैया भरने ज्ञान प्रकाश, पधारो मेरे आँगन में।। 🙏रचना- सुश्री विजयलक्ष्मी (प्र०अ०) रा० प्रा० वि० चंद्रनगर वि० ख० -रामनगर जनपद - नैनीताल 🙏संकलन:- टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड