संदेश

अगस्त, 2024 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी- माधव सिंह नेगी

चित्र
 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला, हिम मन मन्थन में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पावन पर्व के सुअवसर पर प्रस्तुत है बलराम, श्रीकृष्ण एवं योगमाया के जन्म की कथा पर आधारित कविता-: 🙏🏾🕉️🙏🏾✍️श्रीकृष्ण जन्माष्टमी वर्षा ऋतु कृष्ण भाद्रपद मास,  भरणी नक्षत्र चन्द्र दिवस खास। माता रोहिणी पिता वसुदेव।  तिथि षष्ठी को जन्मे बलदेव।।  वर्षा ऋतु भादों का मास,  द्वापर में धरती के लिए खास।  कृष्ण पक्ष की तिथि अष्टमी,  कहलाती कृष्ण जन्माष्टमी।।  रोहिणी नक्षत्र दिवस बुधवार,  मध्य रात्रि अरु कंस कारागार।  देवकी-वसुदेव बने मात-पिता,  नारायण ने लिया मनुज अवतार।। बाहर थी घनघोर घटा छायी,  योग माया भी धरती पर आयी।  नन्द बाबा घर गोकुल धाम,  माता बनी यशोदा मायी।। मध्य रात्रि घनघोर अन्धेरा,  सैनिक दे रहे थे जब पहरा।  योगमाया ने माया फैलाई,  सबको घनघोर निन्द्रा आयी।।  तब चतुर्भुज रूप लिया प्रभु ने, मात-पिता से कहा प्रभु ने। गोकुल मुझको छोड़ आओ, वहाँ से कन्या उठा कर लाओ।। नन्द-यशोदा घर जन्मी कन्या, उसे गोकुल से मथुरा लाओ।...

भद्रा विचार- डॉ० आभा सिंह भैसोड़ा

चित्र
 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला, हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है आज जनपद नैनीताल से डाॅ० आभा सिंह भैसोड़ा जी द्वारा रचित कविता-: 🙏🏾🕉️🙏🏾✍️भद्रा का विचार  भद्रा होती सूर्य देवता की पुत्री, बहिना होती हैं, शनि देव की। मांँ का नाम है उनकी छाया, लंबे केश उसके, काली काया।।  नाम भद्रा का है गुणकारी, कर्म उतने ही हैं अशुभकारी। भद्रा से क्यों होता परहेज, उपस्थिति उसकी करे विघ्न विशेष।।  सूर्य देव को थी महान चिन्ता, विवाह भद्रा का हो थी दुश्चिन्ता। देवों से करते रहते प्रार्थना, कैसे भद्रा न हो अभद्र मना।।  तब ब्रह्मा जी बोले हे भद्रा! तुम पृथ्वी पर राज करोगी। करे जो तुम्हारा अपमान, उसका मिटा दो तुम नामनिशान।।  तब से भद्रा का सब करते परहेज, जनेऊ, त्योहार कोई नया हो काम। भद्र काल में दे देते हैं विश्राम, प्रकोप से भद्रा के बचने को करते।।  प्रातः काल स्मरण द्वादश नाम, धन्या, दाधिमुखी, महामारी ,विष्टि। खरानना, भद्रा, कालरात्रिका, महारुद्रा, महाकाली, असुरक्षिकारी, कुलपुत्री, भैरवी।। 🙏🏻रचना- डॉ आभा सिंह भैसोड़ा(स०अ०)  रा० प्रा० वि० देवलचौड़,  हल...

हिमवन्त कवि चन्द्रकुंवर-हेमन्त चौकियाल

चित्र
 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला, हिम मन मन्थन में  प्रस्तुत है आज हिमवन्त कवि स्व० चन्द्रकुंवर बर्वाल की पावन जयन्ती पर जनपद-रुद्रप्रयाग से शिक्षक साथी श्री हेमन्त चौकियाल जी का शोध पत्र-: 🙏🏾✍️"हिन्दी का कालिदास, प्रकृति का चितेरा कवि चन्द्रकुँवर बर्त्वाल" शाश्वत मृत्यु का यशोगान करते हुए जीवन रूपी बंधन से मुक्त होने की कल्पना को, नदी का अपने उद्गम को लौटने का रूपक कवि चन्द्रकुँवर बर्त्वाल के साहित्य के बाहर दुर्लभ है।  झर जायेंगे फूल, हरे पल्लव जीवन के, पड़ जायेंगे पीत एक दिन शीत मरण के.. जैसे दार्शनिक शब्दों में गूढ़ बात को जिस सरलता व सहजता से बर्त्वाल जी ने लिखा है वह उनके अल्पजीवन में उनके साहित्य की गहराई का सहज अंदाजा दे जाता है।  विश्व साहित्य के इतिहास पर नजर दौड़ाएंँ तो कई कवि ऐसे हुए हैं, जिन्होंने बहुत कम उम्र में ही अपने द्वारा रचित साहित्य से अपना ऊँचा मकाम बनाया है। बहुत कवियों ने मार्मिक प्रेमगीत लिखे हैं, विरह गीत लिखे हैं, लेकिन मृत्यु का स्वागत जिस उल्लास से चन्द्रकुँवर बर्त्वाल ने किया है वह उनके साहित्य के बाहर दुर्लभ है। वे विश्व...

रक्षाबन्धन - माधव सिंह नेगी

चित्र
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला, हिम मन मन्थन में रक्षाबन्धन पावन पर्व प्रस्तुत है रक्षाबन्धन त्योहार मनाने पर आधारित एक कविता-: 🙏🏾🕉️🙏🏾✍️रक्षाबन्धन  श्रावण शुक्ल 15 वीं तिथि, कहलाती है पावन पूर्णिमा।  सतयुग से ही श्रावण पूर्णिमा, सनातन धर्म की है रक्षा तिथि।। हुआ इन्द्र वृत्तासुर घोर संग्राम,  इन्द्रपत्नी शची ने दी इन्द्र को विदाई।  बाँधा उनके हाथ रक्षा का विधान,  ये पावन घड़ी श्रावण पूर्णिमा को आयी।।  वामन रूप रख्यो प्रभु नारायण,  बलि को पाताल लोक पहुंचाये।  नारायण से बलि ने की याचना,  रहो मेरे घर, यह मेरी प्रार्थना।।  माता लक्ष्मीजी पड़ी गहन सोच में,  सावन पूर्णिमा को गयी पाताल लोक में।  राजा बलि को बनाया अपना भाई,  बलि को रक्षा सूत्र तब बांध आयी।।  दक्षिणा बलि ने जब देनी चाही,  लक्ष्मीजी ने प्यार से कही ये वाणी।  यदि दक्षिणा तुम देना चाहते हो भाई,  मुझे मेरे पति वापस दे दो मेरे भाई।। राजसूय यज्ञ युधिष्ठिर ने किया, अग्रपूजा का सम्मान कृष्ण को दिया। शिशुपाल ने किया इसका घोर विरोध, प्रभु ने...