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बेटी-बेटा का एक समान - श्रीमती सरिता मैन्दोला जी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है, आज जनपद- पौड़ी गढ़वाल से शिक्षिका बहिन श्रीमती सरिता मैन्दोला जी द्वारा रचित कविता-: "बेटी-बेटा एक समान" बेटे हैं कुल के दीपक तो, दो कुलों को रोशन करती हैं बेटियाँ। कठोरता का पर्याय होते हैं बेटे, वात्सल्य व प्रेम की मूर्ति हैं बेटियाँ।। शिवाजी, सुभाष, प्रताप से वीर बेटे, पद्मावती, लक्ष्मीबाई सी वीरांगनाएँ बेटियाँ। कालीदास, चाणक्य जैसे विद्वान हैं बेटे, गार्गी, नायडू, अपाला सी विदुषी हैं बेटियाँ।।  सेना, चिकित्सा, शिक्षा के क्षेत्र में हैं बेटे, तो इन क्षेत्रों में भी उत्तम हैं बेटियाँ। फाइटर जहाज उड़ाते हैं हमारे बेटे तो, अंतरिक्ष में उड़ान भरती हैं बेटियाँ।। बेटों से कमतर नही होती हैं बेटियाँ, बेटों के संग-संग चलती हैं बेटियाँ। अगर इनकी उड़ान को हवा दे दें तो, ऊँचे आसमान को छू लेती हैं बेटियाँ।।  जीवन रूपी गाड़ी के पहिए हैं दोनों, कन्धे से कन्धा मिलाकर चलते दोनों, इतना अन्तर इनमें क्यों करते हो? जीवन सृजन के लिये भी जरूरी दोनों।।  बेटा-बेटी के अन्तर को हमें मिटाना है, इन दकियानूसी विचारों को अब ह...

शहीद दिवस- श्रीमती देवेश्वरी सेमवाल जी

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  📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में शहीद दिवस के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है, आज जनपद- रुद्रप्रयाग से शिक्षिका बहिन श्रीमती देवेश्वरी सेमवाल जी द्वारा रचित कविता-: 🙏✍️शहीद दिवस 23 मार्च 1931 वह दिन था,  गले में उनके फाँसी का फन्दा था।  भारत माँ की जय-जयकार संग,  तीनों ने हँसकर गले लगाया था।।  मातृभूमि की रक्षा के खातिर,  अपना सर्वस्व है अर्पण किया।  शहीद हुए तीनों वीर देकर जान,  आज हैं भारत की सच्ची पहचान।।  चाहे कहीं छपी उनकी तस्वीर न हो,  पर फिर भी महकती उनकी शान है।  वो जियें हैं बस उम्र बहुत थोड़ी सी,  पर आज भी उनका सच्चा सम्मान है।। देशभक्ति के खातिर तीनों ने,  किया सदैव अपना समर्पण।  आज के दिन इन तीनों वीरों को,  करते हैं भावभीनी श्रद्धाञ्जलि का अर्पण ।।  🙏रचना  देवेश्वरी सेमवाल(स०अ०)  रा० उ० प्रा० वि० कान्दी ब्लॉक- अगस्त्यमुनि, रुद्रप्रयाग 🙏संकलन-: टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

फुलारी महोत्सव - श्री हेमन्त कुमार चौकियाल जी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में फूलदेई बाल त्योहार  के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है, आज जनपद- रुद्रप्रयाग से शिक्षक साथी श्री हेमन्त कुमार चौकियाल जी का लेख-: *फुलारी, फूलदेई और घोघा नाच का बाल पर्व*  ========================== *आज मनाया जा रहा बच्चों का अठ्वाड़ा या फूलछोला पर्व* ===================== *विश्व का एक मात्र पर्व है जो बच्चों के लिए, बच्चों द्वारा ही मनाया जाता है।* =========================   चैत्र माह के पहले आठ दिनों तक हर घर की देहरी को विभिन्न रंग-बिरंगे फूलों से गुलजार बनाये रखने वाले बच्चों के प्रिय त्योहार फूलदेई का समापन आज अठ्वाड़ा (आठवें दिन के कार्यक्रम) मनाये जाने के साथ होगा। आठवें दिन के इस पर्व को कहीं अठ्वाड़ा तो कहीं फुलछोला कहा जाता है। अपने अनोखे रीति-रिवाजों और परम्पराओं के लिए विख्यात उत्तराखण्ड का यह त्योहार विश्व का एकमात्र त्योहार है जो केवल और केवल बच्चों के द्वारा, बच्चों के लिए समर्पित है। उत्तराखण्ड के विभिन्न इलाकों में प्रकृति के संरक्षण करने का संदेश देने वाले इस अनोखे त्योहार की परम्परायें भी बेहद...

फूलदेई - डाॅ० आभा भैंसोड़ा जी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में फूलदेई बाल त्योहार  के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है, आज जनपद-नैनीताल से शिक्षिका बहिन डाॅ०आभा भैंसोड़ा जी द्वारा रचित कविता- फूल देई चैत्र माह संक्रान्ति होती, जब घटने लगे, ठण्ड धीरे-धीरे। ऊँची चोटियों पर पड़ी बर्फ, जब पिघलती, बनती है नीरे।।   महीना सर्दी-गर्मी का संगम, होता बड़ा ही दृश्य विहंगम। प्राकृतिक छटा जब फूलों से,  दूर करती अवसाद शूलों से।।   पीली फ्यूँली से चढ़ती हल्दी,  लाल बुरांँश से सजती है माँग। भेटुली फूलों से सजता आँचल, लहंगे की गोट रंग-बिरंगा आँचल।। फूलों से लकदक करती है, प्रकृति अपना सोलह श्रृंगार। चेली कुमाऊंँ की आशीष देती, कहती है दैणों द्वार, भर भकार।।     दुल्हन प्रकृति जब घूंँघट खोले,  मुदित हर मन खाए हिचकोले।  फूलों से कन्याएँ पूजें देई द्वार,  फूल देई, छम्मा देई कहकर बोलें।।    फूल देई, छम्मा देई, दैणों द्वार भर भकार।  य देली सो नमस्कार, पूजे द्वार बारम्बार।। 🙏 रचना-: डॉ० आभा सिंह भैसोड़ा (स०अ०) रा० प्रा० वि०- देवलचौड़ ब्लाॅक - हल...

मुट्ठी में लाल गुलाल - सुश्री विजयलक्ष्मी जी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में होली पावन पर्व  के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है, आज जनपद- नैनीताल से शिक्षिका बहिन सुश्री विजयलक्ष्मी जी द्वारा रचित कविता- 🟣🔹मुट्ठी में लाल गुलाल🟣🔹                  मुट्ठी में लाल गुलाल भरे, सब बालक आज गोपाल बने। करते अबीर-रंगों की बौछार, आयी है होली की बहार।। आगे-पीछे न छोड़ें किसी को, रंग से भिगोते आज सभी को। दादा-दादी, चाचा-चाची, ताई-ताऊ और नई भाभी।। सभी पे करें पिचकारी से वार, हो रही रंगमय जयकार। गली-मोहल्ले में हो रहा हल्ला, बरस रही रंगों की फुहार।। घर-घर गुझिया बनी हजार, संग में कचौरी की है बहार। तन-मन में होली की उमंग भरी, घर-घर में लगी रंगों की झड़ी।। आओ भुलायें सारे वैर भाव, गले मिलें जगायें प्रेम भाव। यही है होली त्योहार का सार, बिखेरें सब पे गुलाल रूपी प्यार।। आओ डालें दुर्गुणों की आहुति, होली के अग्नि कुण्ड में। मानवता की भर-भर पिचकारी, छोड़ें सद्गुणों के झुण्ड में।।  🙏 रचना-: सुश्री विजयलक्ष्मी (प्र०अ०)  रा० प्रा० वि० चन्द्रनगर वि० ख०- रामनगर, नैन...

होली की धूम मची- श्रीमती सरोज डिमरी जी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में होली पावन पर्व  के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है, आज जनपद- चमोली से शिक्षिका बहिन श्रीमती सरोज डिमरी जी द्वारा रचित कविता- 🟣🔹🙏✍️🌸होली की धूम मची 🔹🟣 होली की ऐसी धूम मची है, रंग पिचकारी खूब सजी है। होकर निमग्न हम खेलेंगे, चारों ओर फाग सजी है।। मदमस्त धरा का रूप सजा, नव किसलय का ताज सजा। प्रियतम ने आकर तान छेड़ा, बरबस माथे पर ताज सजा।। रंग गुलाल पिचकारी भरी, लाज लजाती हाय! मरी। हुलियारों की ऐसी यारी, बासन्तिक की आयी बारी।। फागुन की है शोभा न्यारी, खेतों में बिखरी सारी। झूल रही हरियाली जमकर, भीगे हैं सखियाँ सारी।। मधुमास धरा पर यूँ छाया, वन उपवन में आ पसरा, फूल कली की धड़कन में, मस्त मगन मद जो पसरा।। होली धुलण्डी खूब मनाई, अपनी बुराई दूर भगाई। आज हमने जोत जलाई, एक संकल्प की बात दोहराई।। 🙏 रचना-: सरोज डिमरी (स०अ०) रा० आ० उ० प्रा० वि० गौचर वि०ख० - कर्णप्रयाग, चमोली 🙏संकलन-: टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

होली- श्रीमती सावित्री आर्य जी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में होली पावन पर्व के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है, आज जनपद- नैनीताल से शिक्षिका बहिन श्रीमती सावित्री आर्य जी द्वारा रचित कविता- 🙏✍️🌸होली  फागुन मास बसन्त का मौसम, लाया कई त्योहारों को संग। पहले बसन्त पंचमी, शिवरात्रि, फिर आई होली की बारी।। एक था राजा हिरण्यकश्यप, दुराचारी, सन्तों का भक्षक। उसके पुत्र का प्रह्लाद नाम था, जपता था जो नाम प्रभु का।। हिरण्यकश्यप को रास न आया, प्रहलाद का प्रभु नाम को जपना। उसकी बहिन , होलिका को था, वरदान आग में ना जलने का।। बैठ गई वह जलती आग में, ले प्रह्लाद को अपनी गोद में। बचा प्रह्लाद, जली होलिका, तभी से मनाते त्योहार होली का।। 🙏रचना-: सावित्री आर्य (प्र०अ०) रा० क० उ० प्रा० वि० छीडा़गांजा वि० ख०- भीमताल, नैनीताल 🙏संकलन-: टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

आओ होली खेलें - श्रीमती भागीरथी पाण्डेय जी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में होली  पावन पर्व के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है, आज जनपद- नैनीताल से शिक्षिका बहिन श्रीमती भागीरथी पाण्डेय जी द्वारा रचित कविता- 🙏 आओ होली खेलें प्रकृति सारी सज बैठी है, करके सोलह श्रृंगार सखी री। चारों दिशाएँ गूँज उठी हैं, चैती, ठुमरी, फाग सखी री।। बाग-बगीचे फूल खिले हैं, जंगल खिले बुरांँश सखी री। धरती सारी रंग गई है, रंग गया आकाश सखी री।। बाल-वृद्ध सभी रंगे हैं, रंगे सब नर-नारी सखी री। गली-गली में धूम मची है, जुटी भीड़ भारी सखी री।। बैर भाव आज दहन करें सब, राग-द्वेश की जलाएँ होली सखी री। प्रेम, भक्ति, सत्य अपनाकर, जगाएँ हृदय का प्रह्लाद सखी री।। प्रेम रंग में हम भी रंग जाएँ, मलें अबीर, गुलाल सखी री। स्नेहा सुधा सब पर छलकाएँ, खुशियों की करें बौछार सखी री।। व्यंग विनोद से सबको हँसायें, रहे न कोई उदास सखी री। गुझिया, पापड़, कचरी, मठरी, गुड़ की घोलें मिठास सखी री।। मन की सारी मलिनता धोकर, बोलें मीठी बोली सखी री। आओ सब मिल-जुलकर हम, खेलें प्रेम की होली सखी री।। 🙏 रचना-: भागीरथी पाण्डे (प्र०अ०) रा० प्रा० वि० परमा वि०ख० - ...

फूलदेई बाल पर्व - श्रीमती रेखा पुरोहित

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में फूलदेई त्योहार पावन पर्व के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है, आज जनपद-रुद्रप्रयाग से शिक्षिका बहिन श्रीमती रेखा पुरोहित जी द्वारा रचित कविता- *बाल पर्व फूलदेई* फूलदेई का त्योहार आया, बच्चों में उल्लास लाया। भाँति-भाँति के फूलों ने, सबके ही मन को हर्षाया।। फ्योंली से पीली प्रकृति, लाल-लाल जंगल बुरांँश के। छोटी-छोटी टोकरियाँ ले, बच्चे फूल इनमें चुनते।।  नन्हें मुन्नों की भाग दौड़ ने, घर आंँगन सबके महकाए।। हर घर और हर द्वार पर, रंग-बिरंगे फूल सजाए।। रंग-बिरंगे फूलों से, सज गई है घर की देहरी। घोगा की डोली लेकर, बच्चे निकाल रहे हैं फेरी।। गुणगान प्रकृति का करता, बच्चों को समर्पित ये त्योहार। आओ करें दोनों की रक्षा, दोनों ही जीवन–आधार।। 🙏 रचना- रेखा पुरोहित (स०अ०)  रा० प्रा० वि० सौंराखाल जखोली, रुद्रप्रयाग 🙏संकलन-: टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

मैं एक नारी हूंँ-श्रीमती विजया सजवाण

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है, आज जनपद-चमोली से शिक्षिका बहिन श्रीमती विजया सजवाण जी द्वारा रचित कविता- मैं एक नारी हूंँ  शरारत करूँ तो बेटी हूंँ,  देखभाल करूँ तो बहन हूंँ। साथ चली तो साथी कहलायी, फेरो में बँध पत्नी कहलायी।। ममता भरी मैं एक माँ हूँ, आशीष देती दादी माँ हूँ। कभी सावित्री बनकर आयी, कभी सीता बनकर छायी।। अन्नपूर्णा बनकर खिलाती, दुर्गा बनकर दिव्यता दिलाती। कालों के लिए काली हूँ, सुरों की मैं सरस्वती हूंँ।। कभी लक्ष्मी बनकर आयी, कभी बनी शीतला माई। दिव्यता है मुझे मिली हुई, फिर भी सादगी भरी हुई।। कहीं छाया मुझसे कहीं धूप, युग बदले-बदले मेरे रूप। हर रूप में देखे मुझे संसार, फिर भी मैं सब से करूँ प्यार।। 🙏रचना-: विजया सजवाण (स०अ०)  रा० आ० प्रा० वि० गौचर ब्लॉक- कर्णप्रयाग, चमोली 🙏संकलन-: टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

नारी तू अभिनन्दनीय है - श्रीमती कुसुम भट्ट जी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है, आज जनपद-रुद्रप्रयाग से शिक्षिका बहिन श्रीमती कुसुम भट्ट जी द्वारा रचित कविता- 🙏🕉️नारी तू अभिनन्दनीय है      नारी तू पूजनीय है, वन्दनीय है,        सारे जहाँ में अभिनन्दनीय है।  कभी बेटी बनकर घर का आँगन महकाती,  तो कभी बहना बनकर भाई की कलाई सजाती।  पति के लिए तू सम्बल है बन जाती,  तो कभी माँ बनकर ममता है छलकाती।।  दिन का चैन घर गृहस्थी में लगाती,  रात की नींद बच्चों को सुलाने में गुजारती।  न कभी थकती है, न कभी रुकती है, दोहरी जिम्मेदारियाँ बखूबी निभाती।।  बाबुल का घर छोड़ पति का घर स्वर्ग बनाती,  पूरा जीवन संघर्षों में है बिताती।  कोई बाधाएँ दु:ख और कष्ट आते तेरे जीवन में,  पर तू सब कुछ सहकर बाधाएँ पार कर जाती।।  तू घर का कोना-कोना है महकाती,  ममता छलकाती, प्रेम है लुटाती।  क्यों  तुझे कमतर आँका जाये,  बिन तेरे सृष्टि की कल्पना भी नहीं की जाती।। ...

नारी तेरे रूप अनेक-श्रीमती सरोज डिमरी जी

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📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर प्रस्तुत है, आज जनपद- चमोली से शिक्षिका बहिन श्रीमती सरोज डिमरी जी द्वारा रचित कविता- ‌‌ नारी तेरे रूप अनेक  सृष्टि की अनुपम कृति हो तुम,  नर की अर्द्धांगिनी हो तुम। कलाकार की अद्भुत रचना,  नारी तेरे रूप अनेक।।   राधा, रुक्मणि, तारा, सुनैना,  सीता, अहिल्या, लक्ष्मी भी।  कालखण्ड में, अवतारों में,  शोभा न्यारी छवि अनेक।।   धन-धान्य, समृद्धि, सुरक्षा,  बुद्धि ज्ञान का भर दे कोष। सरस्वती सी  समरस वाणी,  बनकर हर लेती सारे दोष।।  देख भाल ,पालन पोषण कर, जन-जन की उद्धारक हो तुम।  माता पिता की राजदुलारी, भाई-बहन की आशा हो तुम।।  नाते रिश्ते सभी निभाती,  युग मर्यादा देख समय की।  वैसा धरती अपना वेश,  जैसे होती माँग समय की।।  🙏 रचना-:  सरोज डिमरी (स०अ०)  रा० आ० उ० प्रा० वि० गौचर कर्णप्रयाग, चमोली। 🙏संकलन-: टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

लोकप्रिय शिक्षा अधिकारी, श्री रड़वाल जी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में  प्रस्तुत है, आज जनपद- रुद्रप्रयाग से मिशन शिक्षण संवाद इकाई का आलेख:- ======================== *अपनी विशिष्ट प्रशासनिक कार्यशैली से श्री रड़वाल जी बने रहे लोकप्रिय शिक्षा अधिकारी* ======================== रुद्रप्रयाग जनपद के सबसे बड़े विकास खण्ड अगस्त्यमुनि का, सन 2012 से खण्ड शिक्षा अधिकारी के पद को सुशोभित कर रहे लोकप्रिय शिक्षा अधिकारी श्री के एल रड़वाल जी, विगत 28 फरवरी को अधिवर्षता आयु पूरी कर सेवानिवृत्त होने पर, मिशन शिक्षण संवाद रुद्रप्रयाग, महोदय को बहुत बहुत बधाई प्रेषित करता है।  विगत 12 वर्षों में श्री रड़वाल जी ने छात्र और शिक्षक हित में अनेक यादगार कार्य किए। अगस्त्यमुनि नगर में सामूहिक रूप से राष्ट्रीय पर्वों को मनाने के फैसले ने जहाँ अगस्त्यमुनि के सांस्कृतिक स्वरूप में एक नया अध्याय प्रारम्भ किया, वहीं दूसरी ओर अभिभावकों और जनप्रतिनिधियों को भी एक साथ एक मंच पर बच्चों से रूबरू होने का भी अनोखा मौका उपलब्ध करवाया। श्री रड़वाल जी की इस पहल की न केवल समाजिक संगठनों ने प्रशंसा की, बल्कि शिक्षाविदों...