संदेश

अगस्त, 2025 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

श्रीकृष्ण चरित- श्रीमती मंजुलता

चित्र
 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला "हिम मन मन्थन" में श्री राधाष्टमी पावन पर्व पर  प्रस्तुत है, आज  जनपद-चमोली गढ़वाल से शिक्षिका बहिन श्रीमती मंजुलता जी द्वारा रचित  कविता-: 🙏🏾✍️श्री कृष्ण चरित छोटा सा है कृष्णा मेरा, काम हैं इनके बड़े निराले। श्याम वर्ण का कृष्ण है मेरा, सबके मन को खूब है भाये।। आधी रात में जन्म लिया, देवकी जी ने जन्म दिया। वसुदेव जी हैं इनके बाबा  नन्द व यशोदा के लाला।। राधा के संग खेले होली, गोपियों के संग झूमे। ग्वालों के संग गाय चराते, कहलाये तब ग्वाले।। कई नामों से जाने जाते, सबके मन को हैं भाये। कृष्ण, श्याम, नन्द लाला, गोपाला, माखन चोर, वंशीधर कहलाये।। मुरली बजावे रास रचाये, राधा जी के मन को भाये। नटखट कृष्णा कितना सलोना, सबके मन को है खूब रिझाये।। मैया यशोदा जी के लला, नन्द बाबा के लाल हो। सांँवले वंशीधर तुम, जग में सबसे प्यारे हो।। 🙏 ✍️ रचना- मंजुलता (स०अ०) रा० उ० प्रा० वि० बौंला  वि० ख०- कर्णप्रयाग, चमोली 🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

लोक पर्व आठों- श्री गोविन्द बल्लभ भट्ट

चित्र
 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला,  हिम मन मन्थन में श्री नन्दाष्टमी एवं लोक पर्व "आठों" पावन पर्व पर प्रस्तुत है, आज जनपद- पिथौरागढ़ से शिक्षक साथी श्री गोविन्द बल्लभ भट्ट जी द्वारा रचित कविता-: 🙏✍️लोक पर्व यह आठों है लोक पर्व यह आठों है, खुशियाँ लाता हजारों है। नए नए परिधानों में सजे, बाल, वृद्ध और नारी है। लोक पर्व यह आठों है।। कुमाऊँ, नेपाल के पश्चिमी अँचल में, दुर्गाष्टमी मनायी जाती है। भाद्रपद मास की अमुक्ताभरण, सप्तमी को गौरा माँ आती है। लोक पर्व यह आठों है।। दूर्वाष्टमी के पावन दिन, शिव गौरा मिलन होता है। झोड़ा, चाँचरी गीत गाकर, आठों खाला में उत्सव होता है, लोक पर्व यह आठों है।। युवा बाल सब मिलकर, नंदी, भृंगी का स्वाँग रचाते हैं। पशुपति नाथ के स्वागत में, हिरण, चीतल भी यहाँ बनाते हैँ। लोक पर्व यह आठों है।। अनेक फल और फूल, गौरा महेश्वर को चढ़ाये जाते हैं। चादर से उछाल, गगन को, लोगों को प्रसाद रूप में देते हैं। लोक पर्व यह आठों है।। चातुर्मास में भीगे बदन में, बिच्छू घास लगाते हैं। रोग व्याधि हरे, हर तन से, शिव गौरा का आशीष पाते हैं। लोक पर्व यह आठों हैं।। 🙏रचना-...

दोहरी डगर-श्रीमती पुष्पा बहुगुणा

चित्र
 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला,  हिम मन मन्थन में एक महिला शिक्षक की व्यथा को उद्घाटित करते हुए प्रस्तुत है,  आज जनपद- टिहरी गढ़वाल से शिक्षिका बहिन श्रीमती पुष्पा बहुगुणा जी द्वारा रचित कविता-: 🙏✍️ दोहरी डगर    सुबह किरणें जब पथ पर बिछतीं,  वो बस्ते में सपने सजा लेती है।  कन्धों पे चॉक और कापी का भार,  मन में घर का दीप जला लेती है।। कक्षा की घण्टी जब बजती है तेज,  हर बच्चा उसका संसार बन जाता।  मुस्कानों की माला पिरोती है वो,  अपने आँसुओं को ओंस बना जाता।। फिर घर की देहरी पर कदम रखती है,  जहाँ बिखरे खिलौने, थकी दीवारें हैं।  चूल्हे की आग, बर्तन की झंकार,  और अधूरे सपनों की पुकारें हैं।। न भोजन का स्वाद, न विश्राम का पल,  बस जिम्मेदारियों की अनसुनी चाल है।  हर रिश्ते में समर्पण की लौ सी,  वो नारी नहीं, एक जीती मिसाल है।। कभी माँ, कभी गुरु, कभी साथी बनी,  हर रूप में खुद को मिटा आयी है।  पर किसी ने न पूछा हाल उसका,  बस हर दफा मुस्कुराहट निभा आयी है।। ओ समय! जरा ठहर तू एक पल, ...

नारी का अस्तित्व - श्रीमती अमिता कालरा

चित्र
 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला,  हिम मन मन्थन में नारी के अस्तित्व को बताते हुए प्रस्तुत है,  आज जनपद- रुद्रप्रयाग गढ़वाल से शिक्षिका बहिन श्रीमती अमिता कालरा जी द्वारा रचित कविता-: 🙏✍️नारी का अस्तित्व  नारी है वेदों की अमर वाणी, सृष्टि की आराध्या, जीवन की कहानी। उसकी कोख में पलता है संसार, उसके बिना अधूरा है हर आकार।। वो देह नहीं आत्मा का प्रकाश है, धरती पर ईश्वर का अनुपम प्रयास है। ममता की गंगा, साहस की गगनचुम्बी शिखर, वो आँसुओं में भी स्वयं जाती है निखर।। वो सीता की करुणा, द्रौपदी की पुकार, वो दुर्गा की शक्ति, सरस्वती का सार। नारी त्याग है, नारी श्रेष्ठ कृति है, नारी ही तपस्या, नारी ही संस्कृति है।। कभी उसे वस्तु समझ ठुकरा दिया, कभी आँसुओं को खेल बना  दिया। कभी झूठे प्रेम से उसे बहलाया गया, फिर अकेला छोड़ कर भुलाया गया।। वो हर चोट को शक्ति में ढाल लेती है, अन्धेरों में भी अस्तित्व की मशाल जला लेती है। उसकी दृष्टि में है स्नेह का सागर, पर उसके क्रोध से काँपे अत्याचारी नागर।। वो आँचल में शीतल छाँव भी लाती है, तो रणभूमि में प्रलय की गूँज सुनाती है। वो...

सरस्वती वन्दना-श्रीमती मंजुलता

चित्र
 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला,  हिम मन मन्थन में  प्रस्तुत है, आज जनपद- चमोली गढ़वाल से शिक्षिका बहिन श्रीमती मंजुलता जी द्वारा रचित कविता-: 🙏🏾🕉️🙏🏾✍️सरस्वती वन्दना  मांँ सरस्वति, मांँ भगवति, तेरा चरणों मा नमन करदा। मांँ सरस्वति, मांँ भगवति, नमन करदा, हम शीश झुकौंदा।। हे! मेरी माता दुर्गा शक्ति, हम सब करदा तेरी भक्ति। तेरा चरणों मा नमन करदा, नमन करदा, हम शीश झुकौंदा।। मांँ सरस्वति, मांँ भगवति, तेरा चरणों मा नमन करदा। नमन करदा, हम शीश झुकौंदा, शीश झुकौंदा नमन करदा।। हे मेरी माता ज्ञान स्वरूपिणी, ज्ञान की देवी ज्ञान दे दे। हंस वाहिनी तू छै माता, तेरा चरणों मा नमन करदा।। मांँ सरस्वति, मांँ भगवति  तेरा चरणों नमन करदा। मांँ सरस्वति, मांँ भगवति, नमन करदा, हम शीश झुकौंदा।। हे मेरी माता शक्ति रूपिणी, एक हाथ माता पुस्तक धारिणी। द्वि हाथ माता वीणा सजौंदी, हे मेरी माता वीणा धारिणी।। मांँ सरस्वति, मांँ भगवति, तेरा चरणों मा नमन करदा। मांँ सरस्वति, मांँ भगवति, नमन करदा, हम शीश झुकौंदा।।   ✍️रचना- मंजुलता (स०अ०) रा० क० उ० प्रा० वि० बौंला  वि० ख०- कर्...

धराली की करुण गाथा-श्रीमती अमिता कालरा

चित्र
 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला,  हिम मन मन्थन में  प्रस्तुत है, धराली (उत्तरकाशी) प्राकृतिक आपदा से सन्दर्भित,  जनपद- रुद्रप्रयाग (गढ़वाल)से शिक्षिका बहिन श्रीमती अमिता कालरा जी द्वारा रचित कविता-: 🙏 ✍️धराली की करुण गाथा पर्वत की गोद में आलिंगित, वह रमणीय धराली ग्राम, जहाँ प्रातः वेला होती थी, भक्ति भाव का धाम।। जहाँ कल-कल करती थी, खीर नदी की पावन धार। आज वहीं गूँज उठी, विपदा की पुकार।। जहाँ बहती थी खीर-गंगा की, अविरल निर्मल पावन धार। वहाँ मनुष्य ने बाँध दिए, पत्थर और दीवार।। लालच ने रोक ली, नदियों की राह पुरानी। और उसी ने लिखी, विनाश की नयी कहानी।। अचानक गगन गरजा,  टूट पड़ा मेघों का घेरा। क्षणभर में बह गया, घर-खेत, सपनों का बसेरा।। शैलखण्डों संग बही, आशाओं की रेखाएँ।। क्रन्दन में डूब गईं, स्मृतियों की पुरानी गाथाएँ।। जब जल-राशि उमड़ी,  मुखवा ग्राम से स्वर गुंंजाए, शिखरों से संकेत देकर, चाह थी जनजीवन बचाएंँ।। पर खीर गंगा की गर्जन थी, इतनी भयंकर विकराल। कि वह आह्वान भी डूब गया, जल के प्रचण्ड काल।। वनदेव के प्रहरी वृक्ष, जड़ों सहित हो गए निर्वासित,...

धरती की पुकार- श्रीमती रेखा चौधरी

चित्र
 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला,  हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है, आज जनपद- चमोली गढ़वाल से शिक्षिका बहिन श्रीमती रेखा चौधरी जी द्वारा रचित कविता-: 🙏 ✍️🌎 *धरती की पुकार* देख! मनुष्य का छेडछाड़, आज प्रकृति फिर से बोली है। अभी तो ये चेतावनी है, अभी तनिक ही डोली है।। मेरे अस्तित्व से तुमने जो, खिलौने जैसा खेला है। कहीं सडकें तो कहीं सुरंगें, कहीं विकास का मेला है।। मन्दिर के स्थान जहाँ थे,  वहाँ रेल स्टेशन है। जिन घाटियों से नदियाँ बहती, वहाँ बाँधों का निष्कासन है।। नदियों का रास्ता मोड़ दिया,  अब चट्टानों को तोड़ दिया। अब उड़ते बादल रोक दिये, वनों के वन झकझोर दिये।। हरियाली की चादर जहाँ थी, वहांँ सीमेण्ट का पलस्तर हुआ। पेड़ों की जड़ों पर कैसा! इसका भयानक असर हुआ।। सूख गये वन, बाग, बगीचे,  मृदा अपरदन करने लगी। कहीं बस्तियाँ, कहीं गाँवों को, प्रलय में बदलने लगी।। बहते झरने ठहर गये अब, जमती बर्फ भी पिघल गयी। देख मानव का विकास अब, धरती माता सहम गयी।। गंगा की बहती धारा को, प्रण पूरा करने दो। उसकी चाल और ढाल को, उसके मन से बहने दो।। मशीनों का अब बोझ मुझसे, बिल्क...

राखी का त्योहार- श्रीमती सरोज डिमरी

चित्र
 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला,  हिम मन मन्थन में "रक्षाबन्धन" पावन पर्व के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है, आज जनपद- चमोली गढ़वाल से शिक्षिका बहिन श्रीमती सरोज डिमरी जी द्वारा रचित कविता-: 🙏 ✍️ राखी का त्योहार  राखी का त्योहार है,  सावन की फुहार है। हम बच्चों ने फूल बनाए, राखी का त्योहार है।। विद्यालय का आंँगन है, हम मित्रों का दामन है।  सुन्दर मन के चित्र बनाए, भीगता हुआ यह सावन है।। हमने राखी को सजाया, मोती धागों से इसे बनाया।  बाजारों में इसकी धूम है, ऑनलाइन इसे मंँगाया।। रोली, चन्दन और सजी मिठाई,  खुश हो झूमें बहिन-भाई। बहन ने टीका लगाया,  भाई ने दी नजर उतराई।। बुआ हमारी आयी है,  खेल-खिलौने लायी है। खुश होकर के हम झूमते, ये दिन बड़े सुखदायी हैं।। छक-कर खीर खिलाएंँगे, बुआ जी के संग गाएंँगे।  पास-पड़ोस में जाएंँगे,  खूब मिठाई बाॅंटेंगे।। सुन्दर-सुन्दर चित्र बनाकर,  राखी का पर्व मनाएंँगे। सपनों का संसार हमारा,  हम रक्षाबन्धन मनाएंँगे।। 🙏रचना-: सरोज डिमरी (स० अ०) रा० उ० प्रा० वि० घतोड़ा, वि०ख०- कर्णप्रयाग, चमोल...

श्रीदेव सुमन जी का बलिदान-श्रीमती मंजुलता

चित्र
 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला,  "हिम मन मन्थन" में प्रस्तुत है आज अमर शहीद श्रीदेव सुमन जी को श्रद्धाञ्जलि अर्पित करते हुए जनपद-चमोली गढ़वाल से शिक्षिका बहिन श्रीमती मंजुलता  जी द्वारा रचित कविता-:  🙏 ✍️श्रीदेव सुमन का बलिदान  देव भूमि उत्तराखण्ड में,  एक रियासत थी टिहरी। जिसमें जन्मा था बलिदानी,  श्रीदेव सुमन सा स्वाभिमानी।। 25 मई 1916 को,  जौल गांँव में जन्म लिये। बड़े होकर श्रीदेव सुमन, स्वतन्त्रता सेनानी बन गये।।   वीर सुमन की सब गाथाएंँ,  सबको प्रेरणा देती हैं। देश-भक्ति की प्रेरणा से,  ओत-प्रोत कर देती हैं।। टिहरी रियासत के अत्याचारों से, नींद चैन की सोए नहीं। जब तक सांँसों में सांँस रही, अत्याचारियों को बख्शा नहीं।। वीर थे बलिदानी थे,  वीरता की प्रतिमूर्ति थे। विरोध तुरन्त उनका कर बैठे, बलिदानी फिर कहलाए।। त्याग, तपस्या की मूरत थे, त्याग करना सिखलाया। देव भूमि उत्तराखण्ड में, था ये वीर निराला।। 1943 को टिहरी रियासत ने,  श्रीदेव सुमन को गिरफ्तार किया। 1944 को फिर श्रीदेव सुमन ने, आमरण अनशन शुरू किया।। वीर...