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मई, 2023 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

श्री गंगा दशहरा- श्रीमती सरोज डिमरी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में श्री गंगा दशहरा पावन पर्व पर प्रस्तुत है आज जनपद- चमोली गढ़वाल से शिक्षिका बहन श्रीमती सरोज डिमरी जी द्वारा रचित कविता:- 🙏🕉️📝श्री गंगा दशहरा देवी सुरेश्वरि गंगा मैया,  आज करें माँ ध्यान आराधना। जीवन दायिनी गंगा मैया,  माँ करो हमारी सफल साधना।।  हम श्रद्धा से करते तेरा ध्यान,  पूर्ण करो मन के अरमान। मांँ तुझको बारम्बार नमन,  मांँ तेरा नीर नहीं, है यह अमृतपान।।  गंगा तू जीवन धारा है,  उत्पादन-उर्वरता देती।  जन-जन की प्यास बुझाती,  जो मांगो वह वर दे देती।।  जीवन दायिनी मांँ गंगा, निर्मल जल सम रहे भावना। हम करते तुम्हें हार्दिक नमन,  रहे सफल हमारी साधना।।  शस्यश्यामला धरा बनाती,  मांँ तुम सबका पोषण करती।  फल, फूल सब परिपूरित, वाँच्छित धान्य भू पर उगाती।।  तेरी मीठी जलधारा,  सबकी प्यास बुझाती।  हो जाती दूषित गन्दी जब, विकराल बाढ़ बरपाती।।  स्वच्छता का संकल्प लिया है,  नमामि गंगे मैया। आओ! करें आज आह्वान,  मांँ को दूषित ना करना भै...

माँ की ममता- श्रीमती सुमन दुम्का

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में  प्रस्तुत है आज जनपद-  ऊधमसिंह नगर से शिक्षिका बहन श्रीमती  सुमन दुम्का जी द्वारा रचित कविता:- 🙏📝❤️माँ की ममता जिन्दगी की धूप में,  जो छाँव हम पर करती।  वो है माँ।।  हम साया बन कर,  जो सदा साथ रहती।  वो है माँ।।  सुख हो या दुःख हो,  हर हाल में साथ निभाए। वो है माँ।।  जब-जब निराशा जगी मन में,  आशा का दीप दिखाए।   वो है माँ।।  प्यार से गले लगाकर,  सर को सहलाए।  वो है माँ।।  शुभ आशीष दे,  ममता का खजाना लुटाये,  वो है माँ।।  इस धरा पर कोई न अपना,  यदि कोई है,  तो वो है माँ।।   🙏रचना-: सुमन दुम्का (स०अ०)  रा० प्रा० वि० गिद्धपुरी ब्लाॅक-रुद्रपुर, ऊधम सिंह नगर 🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

श्रमिक- श्रीमती सन्नू नेगी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में  प्रस्तुत है आज जनपद- चमोली गढ़वाल से शिक्षिका बहन श्रीमती  सन्नू नेगी जी द्वारा रचित कविता:- 🙏📝श्रमिक जाड़ा गर्मी बरसात सहता,  नहीं किसी से कुछ कहता।।  कर्तव्य पथ का राही वह तो पेट के खातिर चलता रहता। कोई गांँव में कोई शहर  में,  मीलों चलता दोपहर में।।  काम के खातिर रहता,  नहीं किसी से कुछ कहता।। तन पहनने को वसन नहीं,  ना सिर ढकने को झोपड़ी। पैरों में कई छाले पड़े,  कर्ज में डूबी है खोपड़ी।।  पैसों का नित अभाव रहता,  नहीं किसी से कुछ कहता।।  खून पसीना श्रम बेचता,  और बेचता है जवानी। नहीं किसी को दया आती,  चाहे उसकी मर जाए नानी।।   रक्त भले ही जिस्म से बहता,  नहीं किसी से कुछ कहता।।  धरती का वह सीना चीरे,  चट्टानों के सिर वह फोड़े। वही फसल उपजाता है,  रुख दरिया के भी मोड़े।।  दुख दर्द स्वयं ही सहता,  नहीं किसी से कुछ कहता।।  नहीं कोई उसको बहलाता,  सिर भी कोई नहीं सहलाता। अपनी पीड़ा खुद ही सहता,   वही ...

बैशाख पूर्णिमा - महात्मा गौतम बुद्ध जयन्ती

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में बैशाख पूर्णिमा पावन पर्व पर प्रस्तुत है महात्मा बुद्ध और बैशाखी पूर्णमासी पर विशेष संकलित लेख :- बैशाख पूर्णिमा एवं महात्मा गौतम बुद्ध जयन्ती  ======================== आज 5 मई को बैशाख शुक्ल पूर्णिमा तिथि है। हिंदू धर्म में इस तिथि को बुद्ध पूर्णिमा कहा गया है क्योंकि 563 ई०पू० में इस दिन महात्मा बुद्ध का जन्म हुआ था। ई०पू०531 में बोध गया में निरंजना नदी के तट पर महात्मा बुद्ध को पीपल के वृक्ष के नीचे बोधि यानी ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। इसके अलावा ई०पू० 483 में इसी तिथि को महात्मा बुद्ध का महापरिनिर्वाण भी हुआ था यानी इन्होंने देह त्याग किया था। महात्मा बुद्ध के जीवन की ये तीनों बड़ी घटनाएँ बैशाख पूर्णिमा को होने की वजह से बौद्ध धर्म में इस दिन का विशेष महत्व है। हिन्दू धर्म को मानने वाले भी इस दिन को बहुत ही पवित्र और शुभ मानते हैं क्योंकि शास्त्रों में भगवान विष्णु के 10 अवतारों का वर्णन मिलता है जिनमें 9वांँ अवतार बुद्ध को बताया गया है। इसलिए हिन्दू धर्म में इस दिन भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों की पूजा का वि...