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फ़रवरी, 2023 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस विशेषांक - श्री हेमन्त कुमार चौकियाल

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में  राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के सुअवसर पर प्रस्तुत है आज जनपद- रुद्रप्रयाग से शिक्षक साथी श्री हेमन्त कुमार चौकियाल जी का जी का शिक्षाप्रद लेख:- *राष्ट्रीय विज्ञान दिवस विशेषांक* ======================== *🙏📝"मन में उठे एक प्रश्न ने बनाया रमन को" सर रमन"* ======================= क्या आप जानते हैं कि किसी भी, वस्तु, घटना को देखकर आपके मन में जो प्रश्न उठता है वह एक बहुत बड़े आविष्कार का बीज है। यदि इसी प्रश्न रूपी विचार पर आप जल्दी से जल्दी काम शुरू करते हैं तो इस प्रश्न रूपी विचार के जिन्दा रहने के मौके बहुत बढ़ जाते हैं। लगातार इस विचार रूपी प्रश्न पर सोचते रहने और कार्य रूप में परिणित करने पर एक दिन इसका फल एक बड़े आविष्कार के रूप में दुनिया के सामने आता है। दुनिया में आज तक जितने भी बड़े आविष्कार हुए हैं, उनके मूल में एक क्यों? कैसे? वाला प्रश्न ही था। हम सबके जेहन में हर दिन, हर पल, हर क्षण ऐसे प्रश्न उठते हैं। कुछ प्रश्नों पर कुछ देर हम विचार करते हैं तो वे थोड़ी देर हमारे जेहन में जिन्दा रहते हैं। कुछ प्रश्नों ...

सड़क सुरक्षा गीत - श्री अश्विनी गौड़ जी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है सड़क सुरक्षा पर आधारित जनपद- रुद्रप्रयाग से शिक्षक साथी श्री अश्विनी  गौड़ जी द्वारा रचित गढ़वाली गीत :- 📝🚵‍♂️'सड़क सुरक्षा पर गीत' सड़क मा चलण से पैलि,  कुछ ध्यान रखण जरूर जी।  नशा नींद अर तेज रफ्तार से,  रौण कखि  दूर जी।। ओवर स्पीड नि रखण,  गाडी रखण कंट्रोल मा।  गाड़ी कु स्टेंरिग यकरोड्या,  घुमोण नी कबि गोळ मा।।  जीवन च वरदान प्रभु कु,  जीवन सैंक समाळा जी। वाहन गाड़ी मशीन यंत्र छिन,  गाड़ी देखी चलौण जी।।  जिंदगी अनमोल च भारी,  सेकंडों नि गंवोण जी।।  सडक च खाली माना दूर तक,  फिर भी क्वे ए सकदू जी।  अफु त बचण पर हैकु बचौणे,  भारी जिम्मेदारी च जी।।  कलह कलेश अर गुस्सा रोष मा,  गाड़ी कबि नी भगौण जी।  गाड्यू जाम  लगी लंगट्येर,  अग्वड़ि सुदि बि नी क्वचौण जी।। जिंदगी अनमोल च भारी,  सेकंडों नि गंवोण जी। देर अबेर भले ह्वे जाली,  धैर्य मा गाड़ी चलौण जी।। अचणक चलदा-चलदि कबि भी,  झप्प ब्रेक नि लांण ...

पुलवामा हमला- श्रीमती बसन्ती शाह

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में  प्रस्तुत है आज जनपद- रुद्रप्रयाग से शिक्षिका बहन श्रीमती बसन्ती शाह जी द्वारा रचित कविता:- 🙏📝14 फरवरी पुलवामा हमला 14 फरवरी का दिन था वो,  पुलवामा पर हमला हुआ था। कई सैनिक शहीद हो गये, भारतीयों के लिए काला दिन था।। दुश्मनों ने कश्मीर में, न जाने कितने खेल खेले थे। हमको दुख देने वाले, उनके खुशियों के मेले थे।। उसी वाहन को टक्कर दी जिसमें,  सी आर एफ के जवानों की टोली थी। बन्दूकों से भी गोली बरसी,  जिसमें जयहिन्द की बोली थी।। पुलवामा हमले को हम, कभी भूल नहीं पायेंगे।  भारतीयों के लिए ये काला दिन, उस दिन हम खुशी नहीं मनाएंँगे।। शहीद हुए जवानों को हम, शत्-शत् नमन करते हैं। याद उनको करके हम, श्रद्धा सुमन चढ़ाते हैं।। 🙏रचना-: बसन्ती शाह (प्र०अ०)  रा० प्रा० वि० कुमड़ी  ब्लाॅक- जखोली, रुद्रप्रयाग 🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

मातृभाषा - डाॅ० गीता नौटियाल जी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में अन्तरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के सुअवसर पर प्रस्तुत है आज जनपद- रुद्रप्रयाग से शिक्षिका बहन डाॅ० गीता नौटियाल जी द्वारा रचित कविता:- 🙏📝मातृभाषा  रोया-रोया, सिसकियाँ ही सिसकियाँ, माँ की गोद पायी मिल गया था खजाना। दुनिया की भाग-दौड़, हरमन बेचैनी से, तार-तार बेचैनी बसी थी अन्तःस्थल के पार।।  लम्बे वक्त तक अपनों से था दूर, अपनी भाषा बोलने में शर्माता बार-बार। मांँ मिली, मन अभी भी था भारी, अपनी विपदा न सुना सका, यह थी लाचारी।।  मातृ भाषा बिना समझा न सका माँ को,  मिली जो बचपन में  अब न लौटा सका उसको। मातृ भाषा और शर्म असह्य वेदना यह समझा,  संबल जो मानव का विपत्ति का जब साया।।  आज ही नहीं, पहले भी ऐसा हुआ कभी,  गढ़वाली भाई ने नाम-पता पूछा जब कभी।  अभागा था पहचान न बना सका अपनी,  सच्चा होकर झूठा दुगला बना होकर खानदानी।।  बहुत पछताया, रोया, क्या करूँ न समझ पाया,   अचेत, शान्त, अवाक् सा था वहीं पड़ा। अविरल बहते अश्रु ! देखा माँ पोंछती,  बचपन की प्यारी यादें मुझे सत...