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हेमवती नन्दन बहुगुणा - श्रीमती सरोज डिमरी जी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है, आज जनपद- चमोली  से शिक्षिका बहिन श्रीमती सरोज डिमरी जी द्वारा रचित कविता-: *हेमवती नन्दन बहुगुणा* क्रान्तिकारी व्यक्तित्व उनका,  उत्तराखण्ड की थे शान। हिमालय से धैर्यवान, हेमवती नन्दन थे महान।। प्रिय थी धर्मनिरपेक्षता, हर मानव एक समान। भौगोलिक विषमता की भी, उनको पूरी थी पहचान।। पर्वतीय विकास मन्त्रालय था,  उनका एक सपना महान। सपने की परिणति हुई,  उत्तराखण्ड को मिली पहचान।।  अपनी इन विभूतियों पर हमको होता है अभिमान।  ये स्वतन्त्रता के सेनानी,  देशभक्ति के थे प्रतिमान।।  भारतीय राजनीति के हैं, ये उज्जवल नक्षत्र समान। है इन विभूतियों से ही,  भारत उज्ज्वल देदीप्यमान।।  ऐसी महान विभूति को, करते हैं उन्हें अर्पित सुमन। हृदय तल से हम उनको , कर रहे हैं शत्-शत् नमन।। रचना-: सरोज डिमरी (स०अ०)  रा० आ० उ० प्रा० वि० गौचर,  वि० ख०-  कर्णप्रयाग, चमोली 🙏संकलन-: टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

हिमालय पुत्र हेमवती नन्दन बहुगुणा जी - श्रीमती रेखा पुरोहित

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है, आज जनपद- रुद्रप्रयाग से शिक्षिका बहिन श्रीमती रेखा पुरोहित जी द्वारा रचित कविता-: *हिमालय पुत्र हेमवती नन्दन बहुगुणा* ==================== 25 अप्रैल 1919 को, पौड़ी गढ़वाल के बुघाणी गाँव में। जन्म हुआ हेमवती नन्दन का, पिता रेवती व माँ दीपा के घर में। प्रारम्भिक शिक्षा गाँव में लेकर , इन्होंने शिक्षा स्नातक तक की।   इलाहाबाद विश्वविद्यालय और, डी० ए० वी० कॉलेज से पूर्ण की।। छात्र जीवन से ही बहुगुणा, राजनीति में सक्रिय रहे। गाँधी जी के आह्वान पर, भारत छोड़ो आन्दोलन में जेल गये।। 1952 में प्रथम बार उत्तर प्रदेश में, विधान सभा सदस्य चुने गये। श्रम, वित्त और परिवहन जैसे, विभिन्न विभागों के मंत्री भी रहे।। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद को, दो बार सुशोभित इन्होंने किया। और जन-जन के बीच में अपनी, पैंठ को भी मजबूत किया।। 1971 में प्रथम बार ये, लोकसभा सांसद बने। वित्त, उर्वरक, रसायन के साथ, केन्द्रीय वित्त मंत्री भी रहे।। हिमालय पुत्र नाम से बहुगुणा, जन-जन में  प्रसिद्ध हुए। 17 मार्च 1989 को ये, इस धरती को छ...

श्री हनुमान जन्मोत्सव

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में श्री हनुमान जयन्ती पावन पर्व पर  प्रस्तुत है, श्री हनुमान जी एक विराट व्यक्तित्व  🙏श्री हनुमान जन्मोत्सव अश्वत्थामा बलिर्व्यासो हनुमांश्च विभीषणः।  कृपः परशुरामश्च सप्तैते चिरंजीविनः।।  अर्थात्‌- अश्वत्थामा, बलि, व्यास, हनुमान, विभीषण, कृपाचार्य और भगवान परशुराम ये सातों चिरंजीवी हैं। रामभक्त हनुमान को कई नामों से जाना जाता है, जैसे आञ्जनेय, केशरी नन्दन, मारुति नन्दन, पवनपुत्र  संकटमोचन, शंकर सुवन आदि। माना जाता है कि वह भगवान शिव के 11वें अवतार थे और उनके जन्म का उल्लेख कई पौराणिक कथाओं में मिलता है। पौराणिक ग्रन्थों के अनुसार हनुमान जी का जन्म  चैत्र शुक्ल पूर्णिमा व कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को माना जाता है। हनुमान जी के जन्म की कथा बहुत रोचक है। वे माता अंजनी और वानर राज केसरी के पुत्र थे। माना जाता है कि उनका जन्म कोई साधारण संयोग नहीं था, बल्कि देवतागण, नक्षत्र और भगवान के आशीर्वाद से पृथ्वी से पाप का विनाश करने के लिए हुआ था। मान्यताओं के अनुसार, माता अंजनी को यह वरदान मिला...

भारत रत्न डाॅ० भीमराव अम्बेडकर - श्रीमती सावित्री आर्य

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में डाॅ० भीमराव अम्बेडकर जी की पावन जयन्ती  के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है, आज जनपद- नैनीताल से से शिक्षिका बहिन श्रीमती सावित्री आर्य जी द्वारा रचित कविता-: भारत रत्न डाॅ० अम्बेडकर 14 अप्रैल 1891 को जन्मा,  एक भारतीय बहुज्ञ। विधिवेत्ता, समाज सुधारक,  अर्थशास्त्री और राजनीतिज्ञ।।  भीमाबाई नाम माता का,  पिता थे इनके राम जी,  भीम नाम का बालक इनका कर गया अनेक काम जी।। कोलम्बिया, लन्दन यूनिवर्सिटी से, अर्थशास्त्र में डिग्री पायी। विधि, राजनीति और वकालत में, धाक अपनी खूब जमायी।। स्वतन्त्र भारत के थे ये,  न्याय व कानून मंत्री पहले। इनका नहीं  कोई ‌सानी, संविधान के जनक ये कहलाये।।  पुरस्कार भारत रत्न, 32 उपाधियों, और नौ भाषाओं के थे ज्ञानी। ’डाॅक्टर ऑफ साइंस’ पाने वाले, बने ये पहले हिन्दुस्तानी।। भेदभाव और छुआछूत का,  किया सामना जिसनेे। फिर भी न हिम्मत हारा वो  जग को नई दिशा दिखाई उसने ।। उसी महामानव की जयन्ती, मना रहे हम सब आज। बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर है, उस महान व्यक्तित्व का ...

विश्व स्वास्थ्य दिवस - डाॅ० आभा भैंसोड़ा जी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में विश्व स्वास्थ्य दिवस के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है, आज जनपद- नैनीताल से से शिक्षिका बहिन डाॅ०आभा भैंसोड़ा जी द्वारा रचित कविता-: *विश्व स्वास्थ्य दिवस*  7 अप्रैल को विश्व जागृत होता है, स्वास्थ्य के प्रति जागो कहता है। विश्व स्वास्थ्य दिवस की मंशा, जन जागृति की करता अनुशंसा।। सन 1950 को पहली बार मनाया, प्रतिवर्ष स्वास्थ्य कार्यक्रम कराया। सन् 2022 में है यह मूल आशय, "हमारा ग्रह, हमारा स्वास्थ्य" निश्चय।। कुछ लक्ष्य निर्धारण प्रतिवर्ष होता है,  उच्चरक्तचाप की जटिलता कहता है।  अतिसंवेदनशील समूह बने कहता है, स्वस्थ पर्यावरण की प्रेरणा देता है।। खुद स्वस्थ रह दिवस मनाना बताता है, असुरक्षित स्थान से बचाव सिखाता है। 2022 थीम, हमारा ग्रह,  हमारा स्वास्थ्य,  तभी तो होगा सफल यह कहता है।। 🙏 रचना-: डॉ० आभा सिंह भैसोड़ा (स०अ०) रा० प्रा० वि०- देवलचौड़ ब्लाॅक - हल्द्वानी, नैनीताल 🙏संकलन-: टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड