हेमवती नन्दन बहुगुणा - श्रीमती सरोज डिमरी जी
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है, आज जनपद- चमोली से शिक्षिका बहिन श्रीमती सरोज डिमरी जी द्वारा रचित कविता-: *हेमवती नन्दन बहुगुणा* क्रान्तिकारी व्यक्तित्व उनका, उत्तराखण्ड की थे शान। हिमालय से धैर्यवान, हेमवती नन्दन थे महान।। प्रिय थी धर्मनिरपेक्षता, हर मानव एक समान। भौगोलिक विषमता की भी, उनको पूरी थी पहचान।। पर्वतीय विकास मन्त्रालय था, उनका एक सपना महान। सपने की परिणति हुई, उत्तराखण्ड को मिली पहचान।। अपनी इन विभूतियों पर हमको होता है अभिमान। ये स्वतन्त्रता के सेनानी, देशभक्ति के थे प्रतिमान।। भारतीय राजनीति के हैं, ये उज्जवल नक्षत्र समान। है इन विभूतियों से ही, भारत उज्ज्वल देदीप्यमान।। ऐसी महान विभूति को, करते हैं उन्हें अर्पित सुमन। हृदय तल से हम उनको , कर रहे हैं शत्-शत् नमन।। रचना-: सरोज डिमरी (स०अ०) रा० आ० उ० प्रा० वि० गौचर, वि० ख०- कर्णप्रयाग, चमोली 🙏संकलन-: टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड