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जून, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

यू ट्यूब पर सम्पन्न वेबीनार की आँखों देखी रिपोर्ट-श्री हेमन्त चौकियाल जी

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  📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में  प्रस्तुत है  जनपद-रुद्रप्रयाग  से शिक्षक साथी श्री हेमन्त कुमार चौकियाल जी जी का लेख:- उत्तराखण्ड के एक हजार पाँच सौ शिक्षकों का दिल जीत ले गये पद्मश्री अरविन्द गुप्ता- श्री हेमन्त चौकियाल जी  =========================== यू ट्यूब पर  सम्पन्न वेबीनार की आँखों देखी रिपोर्ट  ========================== गणित, खेल और बच्चे विषय पर अजीम प्रेमजी फाउण्डेशन की ओर से उत्तराखण्ड के शिक्षकों के लिए आयोजित यूट्यूब बेबीनार में शिक्षकों के साथ संवाद करते हुए प्रख्यात विज्ञान प्रसारक, कबाड़ से जुगाड़ की अवधारणा से हजारों विज्ञान की समझ विकसित करने वाले खिलौनाकार, आई० आई ०टी०कानपुर से इलेक्ट्रिक इंजीनियरिंग स्नातक और यहांँ पाँच साल तक गरीब बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षक, तीन हजार से अधिक स्कूलों में कार्यशाला आयोजित करने, बीस देशों के बच्चों के साथ काम करने का अनुभव रखने वाले, 18 भाषाओं में 6 हजार से अधिक मूवीज बनाने वाले, 56 करोड़ लोग जिनके वीडियोज देख चुके हैं, ऐसे बहुमुखी प्रतिभा के धनी पद्मश्री अरविन्द गुप्ता...

ईश्वर का रूप डाॅक्टर-श्रीमती मीना गोस्वामी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के सुअवसर पर प्रस्तुत है जनपद-पिथौरागढ़ से शिक्षिका बहिन श्रीमती मीना गोस्वामी जी की कविता: ईश्वर का रूप डॉक्टर डॉक्टर के रूप में, ईश्वर का रूप हैं आप। जीवन की डूबती किश्ती को,  बचाने वाले पतवार हैं आप।। लोगों की आँखों की अनकही,  बातों को समझते हैं आप। खुद को डुबो कर दूसरों को,  किनारे लगाते हैं आप।।   कुछ नहीं होगा मैं हूँ ना, प्यार से अगर बोल दो आप।  तो सच कहूंँ, तब यमराज के क्रूर, हाथों से छुड़ा बचा लेते हैं आप।। भगवान का दूसरा अवतार हैं आप, अपनी आँखों में आई बूँदें छिपाते हैं आप। जिंदगी बच जाएगी, सेहत सुधर जाएगी, फिर मुस्कराते हुए कहते हैं आप।। इस बार तो ईश्वर ने भी सोचा,  खूब परेशान किया जाए। सब को बीमारी ने रुला दिया, फिर भी आप बिल्कुल ना घबराएँ ।।  निडर होकर मुस्कराते हुए, सब के लिए खड़े रहे आप।।  दुनिया के ऐसे डाक्टर,  धन्य हैं आप, धन्य हैं आप।। 🙏रचना:- श्रीमती मीना गोस्वामी (प्र०अ०) रा० प्रा० वि० भौड़ी  वि०ख०- मूनाकोट जनपद- पिथौरागढ़ 🙏संकलन:-...

बरसात-श्रीमती प्रतिभा पन्त

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में  प्रस्तुत है जनपद-पिथौरागढ़ से शिक्षिका बहिन श्रीमती प्रतिभा पन्त जी की कविता: बरसात  आ गई बरसात अम्मा,  ला दो मुझको छतरी।  बड़ी नहीं छोटी नहीं,  गोल ‌गोल छतरी।।  लाल नहीं पीली नहीं,  हरी नहीं नीली नहीं भागई मुझको अम्मा,  सतरंगी छतरी।।  जाऊंँ जब स्कूल अम्मा,  ओढूंँ तब सतरंगी छतरी। सब सखियों के मन को भायी,  मेरी प्यारी सतरंगी छतरी।।  धूप हो या बारिश अम्मा,  काम आये छतरी। गरमी और बरसात से,  अम्मा हमें बचाये छतरी।।  धूप से बचाये अम्मा,  धूल से बचाये।  बरसे चाहे आसमाँ से,  काली-काली बादरी।। आ गई बरसात अम्मा,  ला दो मुझको  छतरी।।      🙏रचना :-  प्रतिभा पन्त (प्र०अ०)  रा० प्रा० वि० जगथली ब्लाक-  बेरीनाग जनपद- पिथौरागढ़ 🙏संकलन:- टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

एहसास-श्रीमती दमयन्ती राणा

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में  प्रस्तुत है जनपद-चमोली गढ़वाल से शिक्षिका बहिन श्रीमती दमयन्ती राणा जी की कविता: "एहसास" हर आने वाला पल अतीत बन जाता है, किसे पता कब,क्या बदल जाता है।  रह जाते हैं तो बस बीते पलों के कुछ एहसास, जीवन की किताब के कुछ अनमोल एहसास।।  पल-पल में ही पल बदल जाते हैं, हर बदले पल के साथ एहसास बदल जाते हैं।  जाने क्यों पल भर में ख्याल बदल जाते हैं, और रह जाते हैं तो बस बीते पलों के एहसास।।  शायद इसी तरह लोग बदल जाते हैं, इसी तरह दुनिया के समाज बदल जाते हैं।  पल-पल में बदलती इस छोटी सी दुनिया में, रह जाते हैं तो सिर्फ कुछ एहसास बीते पलों के।।  बहुत ही खूबसूरत है एहसास की खुशबू,  जितना भी सोचते हैं उतना ही महक जाते हैं।  एहसास ही मनुष्य को एक दूजे से जोड़े रखता है, एहसास के बिना हर लम्हा अधूरा लगता है।।                          🙏 रचना:-      दमयन्ती राणा (स०अ०) रा० उ० प्रा० वि० ईड़ाबधाणी      ...

मेरे पापा-श्रीमती नर्वदा कौशल जी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में  प्रस्तुत है जनपद-टिहरी गढ़वाल से शिक्षिका बहिन श्रीमती नर्वदा कौशल जी की कविता: मेरे पापा घर से लेकर, दिल में रहना पापा। मेरी खुशियों के लिए, गम भी सहना पापा।।  तुम किसी भी हाल में रहो,  कभी भी, कहीं भी।  मैं तुम्हारे साथ हूँ,  बस यही कहना पापा।।   मैं चलता हूँ तुम्हें देखकर, तुम जीते हो मुझे देख कर।  भरोसे के समन्दर में, यूँ ही बहना पापा।।  तुम्हारे लिए मैं हर गम भी सहूँगा,  बेटा हूँ तुम्हारा बस यही कहूँगा।  अगर मैं बिगड़ भी जाऊँ,  तो सम्भालना मुझे हर कदम पर पापा।।     अगर मैं बदल जाऊँ कभी।  तो दिल से निकाल मत देना पापा।।  🙏रचना:- नर्वदा कौशल (स०अ०) रा० प्रा०वि० नकोट (जुवा)  ब्लॉक- थौलधार  जनपद - टिहरी गढवाल 🙏संकलन:टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

सन्तुलित आहार-श्री अश्विनी गौड़

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📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में  प्रस्तुत है जनपद-रुद्रप्रयाग से शिक्षक साथी अश्विनी गौड़ जी की गढ़वाली कविता: सन्तुलित आहार खान पान अर पोषण मा,  यु ध्यान धन पूरु जी।  संतुलित हो आहार हमारू,  या बात भौत जरूर जी।।   (भोजन का अवयव छिन पांच) तागत अर तुरंत ऊर्जा,  कार्बोहाइड्रेट देंदा।  मिट्ठी चीजों अन्न फसल मा,  भरपूर कीटी तैं रैन्दा।।  आलू ग्यूँ अर चौंळ भात मा,  कोदा झंगोरा जौ का साथ मा।  चीनी गुड़ या मिट्ठि चीजों मा,  कार्बोहाइड्रेट रळ्यूँ मिल्यूँ च।। दाळ, चना, राजमा, छेमी,  अरहर, तोर, गौथ, मसूर।  भट्ट रैंस काळीदाळ,  दै पनीर च्यूँ-मशरूम।।  शरीर रचौण बणौण मा यौ,  प्रोटीन मिलदू यूंमा भरपूर।।  घर्या राडू़ घ्यू बादाम,   घर्या तिलों कु तेल आम।  वसा फैट चर्बी मा धर्दा,  शरीर तागत जमा करि रखदा।।  हरीं भुज्जि या मौसमी फल,  आम अखोड़ किशमिश तरबूज।  संतरा, निंबू, नारंगी, आड़ू,  विटामिन कु योंमा धारू।।  रोग शरीर नजीक ना औ,  स्वस्थ हौंसिय...

वह लड़की याद आती है-श्री दीवान सिंह कठायत

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में  प्रस्तुत है जनपद-पिथौरागढ़ से शिक्षक साथी दीवान सिंह कठायत जी की कविता: वह लड़की बहुत याद आती है घर के सारे काम निपटाकर,  जो समय से स्कूल को जाती है। जिम्मेदारी निभाकर पढ़ाई करती, वह लड़की बहुत याद आती है।।  अपना बैग लटकाए कन्धों पर,  भाई-बहिनों का भी सम्भाले रहती है।  पकड़ अंगुली सुरक्षित ले जाती उनको,  वह लड़की बहुत याद आती है।।  भैया-बहिनों को उत्साहित कर, साथ उनके भाव विभोर हो खेलती है। खुशी के खातिर उनकी जीतकर भी हार जाती,  वह लड़की बहुत याद आती है।। माँ की व्यस्तता से वाकिफ होकर,  अपना पढ़ना रोक जो रोटी बेलने लग जाती है।  जूठे बरतन छोटे हाथों धोए नित -नित  वह लड़की बहुत याद आती है।।  पिता की पंगु आर्थिकी महसूस कर,  अपने पैरों खड़े होने के सपने बुनती है।  हम भी पढ़कर बड़े बन जाए जो सोचे, वह लड़की बहुत याद आती है।। 🙏रचना:- दीवान सिंह कठायत (प्र०अ०) रा० आ० प्रा० वि० उडियारी  वि०ख०- बेरीनाग, पिथौरागढ़ 🙏संकलन:टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

आत्मविश्वास-श्रीमती लता आर्य जी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में  प्रस्तुत है जनपद-नैनीताल से शिक्षिका बहिन श्रीमती लता आर्य जी की कविता: आत्मविश्वास समय, मौसम, परिस्थिति कौन नहीं , जो हमारे आत्मविश्वास को  परखता है। अगर निष्ठा पूर्वक कार्य हो तो, ये हमारे समर्पित भाव को और बढ़ाता है।। जब विश्वास ही हमारा ध्येय हो, स्वयं पथ के पत्थर ढेर हो सकते हैं। दृढ़ संकल्प से ही हम, उस कार्य को पूर्ण कर सकते हैं।। जो हमारे जीवन में खुशियों के भरे रंग, वो जरूर मिटा पायेगा कई भ्रम। अगर सोच का संकल्प हो महान, तभी हो सकता है, हर समस्या का समाधान।। बड़ी सोच का बड़ा कमाल, जीत से ही ईनाम समर्थ होता है। अगर ये आत्मविश्वास कम हो जाये तो, अनमोल समय भी व्यर्थ हो जाता है।। 🙏रचना:- लता आर्य (प्र०अ०) रा० प्रा० वि० मनोरा वि० ख०- भीमताल जिला- नैनीताल उत्तराखण्ड 🙏संकलन:टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

योग दिवस मनाएँगे-श्रीमती किरन जोशी जी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में  प्रस्तुत है जनपद-टिहरी गढ़वाल  से शिक्षिका बहिन श्रीमती किरन जोशी जी की कविता: योग दिवस मनाएँगे   जब से ईश्वर ने जीव जन्तु और मनु रूप बनाया,  तपस्वियों ने तब योग का परचम फैलाया। पंचतत्व को समझे जब वो ऋषि-मुनि, फिर पतञ्जलि ऋषि ने जन मानस को समझाया।। रोग, व्याधि, दुख, दरिद्रता सब दूर रहें, हम तुम सब मिल स्वस्थ और मजबूत रहें। खाना, पानी, हवा, ताप, मिट्टी  सब मिलता है, धरती माता पूजित है सब देती है।। हमारी संस्कृति और वसुधा की रीति निराली है, जब सविता भी पूरब से शीघ्र उदय होते हैं। इस दिन धरा प्रसन्न हो सूर्य मुख झुक जाती है,  फिर अलौकिक छवि को निरख स्वास्थ्य बढ़ाते हैं।। इस वसुन्धरा का सौन्दर्य हम बढ़ाएँगे,  हरा भरा कर इसे व सबको स्वस्थ  बनाएँगे। जब हरियाली से पूर्ण व स्वच्छ ये धरती होगी, फिर सब योगासन कर, योग दिवस मनाएँगे।। 🙏रचना- किरण जोशी (प्र०अ०)   रा० प्रा० वि० मैखण्डी मल्ली                            ...

मिल्खा सिंह - श्री मनोज घिल्ड़ियाल

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में  प्रस्तुत है जनपद-पौड़ी गढ़वाल से शिक्षक मनोज घिल्ड़ियाल जी की कविता: 🙏🌹मिल्खा सिंह (उड़न सिक्ख) 20 नवम्बर 1929 को जो थे जन्मे, अविभाजित भारत के पंजाब में। खोकर दंगों में माता पिता को, शरणार्थी बन मिल्खा सिंह आए दिल्ली में।। 1951 में सेना में भर्ती हो गए थे, खेलकूद में स्पेशल ट्रेनिंग को चुने गए थे। बालीबाल खिलाड़ी निर्मल कौर जो जँच गई, 1962 को यह जोड़ी विवाह में बँध गई।। फर्राटा दौड़ में राष्ट्रमण्डल स्वर्णपदक पाया, चार बार एशियाई स्वर्णपदक कब्जाया। 1960 में पाकिस्तानी धावक को पछाड़ा था जब, जनरल अय्यूब खाँ ने उड़न सिक्ख कहा था तब।। तिरंगा फहरा रहे थे जब वे विदेश में, पद्मश्री से सम्मानित किया गया उन्हें स्वदेश में। 18 जून 2021 को उनका जीवन गतिहीन हुआ, एक भारतीय खेल युग का जैसे अन्त हुआ।। 🙏रचना:- मनोज घिल्ड़ियाल रा० प्रा० वि० कलीगाड़  वि०ख०- रिखणीखाल, पौड़ी गढ़वाल  उत्तराखण्ड 🙏संकलन:- हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

आओ योग करें-श्रीमती ज्योति शाह

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन  में आज प्रस्तुत है जनपद-नैनीताल से शिक्षिका बहिन श्रीमती ज्योति शाह जी की कविता: 🧎‌‌‍आओ योग करें🧎                            आओ योग करें, शरीर को स्वस्थ रखें।  योगासन में सर्वप्रथम, आसन लगाना सीखें हम।। आसन लगाकर ताने मांसपेशियाँ हम, साथ-साथ करें तनाव दूर हम। थकान मिटाते, शक्ति लौटाते, शरीर को करें तरोताजा हम।।  योग से करें हम भावों को वश में,  सर्वप्रथम करें सर्वांगासन हम।  इससे करें मोटापा दूर, थायराइड सक्रिय करें हम।। सीधे लेटें, पैर करें ऊपर हम, धनुरासन है योगासन उत्तम। वृक्षासन कर लम्बाई बढ़ाएँ, मत्स्यासन से उदर मजबूत बनाएँ।। वज्रासन करें, मेरुदण्ड सँवारें, नित्य करें हम प्राणायाम।             और करें हम कपालभाति, जिससे होता श्वास रोगों में लाभ।। करें भ्रामरी प्राणायाम निरन्तर, जिससे नाक,गला निरोग होता। अनुलोम विलोम करके नित्य। रक्त शुद्ध और रक्तचाप सही रहता।।    कर लें जल्दी से...

तम्बाकू जहर है - श्रीमती हेमलता बहुगुणा

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📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में आज प्रस्तुत है जनपद-टिहरी गढ़वाल से शिक्षिका बहिन श्रीमती हेमलता बहुगुणा जी की कविता: *तम्बाकू जहर है*  मत सेवन करो तम्बाकू का,   यह जान लेवा होता है।   फेफड़ों को करता है खराब,   कैंसर का डर रहता है।।  मुँह में दाने छाले पड़ जाते,  मुंँह खराब हो जाता है।  आँतों में सूजन आ जाती,  खराबी अनेकों आ जाती है।।  विश्व में निषेध हो तम्बाकू का यह सब समझाते हैं। इसका सेवन तुम मत करना     सारे विश्व में बतलाते हैं।।  31मई को विश्व ने,  इसका घोर विरोध किया।  मत करना इसका सेवन,  इसे जानलेवा बतलाया।।  आओ, हम सब मिलकर,  दृढ़संकल्प करते हैं।  नहीं करेंगे तम्बाकू का सेवन,  सबको हम बतलाते हैं ।।  🙏रचना :-  हेमलता बहुगुणा (सेवानिवृत्त प्र० अ०)   चम्बा, टिहरी गढ़वाल 🙏संकलन :-टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस-श्रीमती वन्दना जोशी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के पावन पर्व पर  प्रस्तुत है जनपद-चम्पावत से शिक्षिका बहिन श्रीमती वन्दना जोशी जी की कविता: 🧎अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस🧎 ये दिवस बड़े धूमधाम से मनाया जाता, विश्व भर में योग की अलख जगाता। वर्षो से भारतीय ऋषि-मुनियों की जीवन शैली, लम्बी आयु, तन्दुरूस्ती  व स्वस्थता का राज बताता।। 21 जून 2015 को मनाया पहली बार, जन-जन ने सभी योग क्रियाओं को अपनाया। रोगों से बचाता, सकारात्मकता बढ़ाता योग, तन-मन से स्वीकारा, सारे विश्व के मन भाया।। पाँच हजार वर्ष पुरानी भारतीय विरासत, आज सम्पूर्ण विश्व में फैली इसकी ज्योत। योग के प्रणेता पूज्य महर्षि पतंजलि, योगासन, प्राणायाम, स्वस्थ जीवन के स्रोत।। इक्कीस जून वर्ष का होता सबसे बड़ा दिन, योग को दिनचर्या बनाता, पाता दीर्घ जीवन। बड़े-बड़े रोगों का करता योग समूल नाश, धेर्य और मनोयोग से योग पर करो विश्वास।। 🙏रचना:- वन्दना जोशी (स०अ०) रा०आ० क०उ०प्रा०वि० पऊ क्षेत्र- लोहाघाट, चम्पावत 🙏संकलन :-टीम मिशन शिक्षण संवाद गढ़वाल-कुमाऊँ, उत्तराखण्ड

योग हरे रोग - श्रीमती सन्नू नेगी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के पावन पर्व पर  प्रस्तुत है  जनपद-चमोली  से शिक्षिका बहिन श्रीमती सन्नू नेगी जी  जी की कविता: योग दिवस पावन पर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ! 💐💐💐💐💐💐💐 🧎योग हरे रोग🧎           सुन्दर शरीर बनाएँगे, रोगों को दूर भगाएँगे। नित योग और प्राणायाम जब अपनाएँगे। प्राणों का आयाम है, साँसो का निज ध्यान। निरोगी बने काया, तभी जीवन का मान।। पुरखों की आन, ऋषि पतंजलि का वरदान है, करो योग पर मान, संस्कृति की यह पहचान है। साँसो से साँसें जुड़ती, बन जाते हैं प्राणायाम, शरीर को स्वस्थ बनाते, योग के कई आयाम।। सुन्दर सुडौल, गठीला बन जाता है तन, मानसिक शान्ति देता, स्वस्थ हो जाता मन। घर-घर योग की लहर हो, सुबह-शाम के पहर हो, नित आदत में सम्मिलित गाँव-गाँव और शहर हो।। शान्त भाव अनुलोम विलोम कपालभाति है अचूक,  प्रथम प्राणायाम भस्त्रिका जोर जोर से साँसें फूक। बाह्य प्राणायाम कर रेचक से मन शान्त करे भ्रामरी, कण्ठ व्याधि उज्जायी से उद्गीथ स्मरण शक्ति बढ़ाए हमारी।। सूर्य भ...

गंगा दशहरा-श्रीमती माया गुरुरानी जी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में श्री गंगा दशहरा पावन पर्व पर  प्रस्तुत है जनपद-नैनीताल से शिक्षिका बहिन श्रीमती माया गुरुरानी जी की कविता: श्री गंगा दशहरा की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ! 💐💐💐💐💐💐 🙏गंगा दशहरा ज्येष्ठ, शुक्ल, दशमी दिन पावन, माँ गंगा का पृथ्वी पर अवतरण। सगर के पुत्रों का उद्धरण, अत एव गंगा माँ का आवहन।। भगीरथ कीनी घोर तपस्या, स्वर्ग से निकली गंगा माता। वेग रोकने आ गए थे शिवा, जटा से उलझी, पावन त्रिपथगा।। विधि-विधान से भागीरथी का पूजन, गंगा स्नान, दान, ध्यान, तर्पण। निर्मल जल, यम त्रास मिटावन, रुद्राभिषेक है मोक्ष प्रदायन।। द्वारपत्रक से द्वार सजावट, वज्र निवारक मंत्रों की लिखावट। प्राकृतिक प्रकोप संरक्षक सूचक, सांस्कृतिक परम्पराओं के हम वाहक।। 🙏रचना :- माया गुरुरानी (स०अ०) रा०आ०प्रा०वि० धौलखेड़ा हल्द्वानी, नैनीताल 🙏संकलन :-टीम मिशन शिक्षण संवाद गढ़वाल-कुमाऊँ, उत्तराखण्ड

पर्यावरण बचाओ रे-श्रीमती दीक्षा जोशी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में  प्रस्तुत है जनपद-नैनीताल से शिक्षिका बहिन श्रीमती दीक्षा जोशी जी की कविता: 🌳🌳पर्यावरण बचाओ रे🌳🌳 पेड़ लगाओ, धरा सजाओ, इस सबसे ही है जीवन। घर-घर अलख जगाओ रे, पर्यावरण बचाओ रे।। प्लास्टिक जमा न होने पाए, धरती की उपजता ना जाए। प्लास्टिक जमीन से उठाओ रे, पर्यावरण बचाओ रे।। नदियों का पानी साफ रहे, ऐसा अपना प्रयास रहे। बूँद-बूँद से ही घड़ा भरता, एक-एक बूँद बचाओ रे।। आस पास सब साफ रहे, स्वच्छता का आभास रहे। जल और वायु का ये प्रदूषण, जड़ से दूर भगाओ रे।।   🙏रचना:- दीक्षा जोशी (प्र०अ०) रा०प्रा०वि०चोरगलिया  वि०ख०-हल्द्वानी, नैनीताल 🙏संकलन :-टीम मिशन शिक्षण संवाद गढ़वाल-कुमाऊँ, उत्तराखण्ड

परिवर्तन-श्रीमती सन्नू नेगी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में  प्रस्तुत है जनपद-चमोली से शिक्षिका बहिन श्रीमती सन्नू नेगी जी की कविता: परिवर्तन नव सृजन, नव रूप, होता नहीं आसान। छोड़ना पड़ता है कुछ,  छूने को अनन्त आसमान।। यूँ ही न ये वट वृक्ष, बना ऐसे ही विशाल। सूक्ष्म बीज से हुआ, प्रकृति का ये कमाल।। तोड़कर बीज को, धरती फाड़ डाली। तब कहीं जा कर, मुस्कुराती है कली।। परिवर्तन सृष्टि का, नियम है अविराम। तोड़कर, कुछ छोड़कर, मिलता यहाँ नव नाम।। कई बलिदानों से कुछ, प्राण बचते हैं यहाँ। मृत्युलोक है प्राण से, प्राण बनते हैं यहाँ।। 🙏रचना :- सन्नू नेगी (स० अ०) रा० क० उ० प्रा० वि० सिदोली वि० ख०- कर्णप्रयाग, चमोली उत्तराखण्ड 🙏संकलन :-टीम मिशन शिक्षण संवाद गढ़वाल-कुमाऊँ, उत्तराखण्ड

तम्बाकू जहर है भाई-श्रीमती दीक्षा जोशी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में  प्रस्तुत है जनपद-नैनीताल से शिक्षिका बहिन श्रीमती दीक्षा जोशी जी की कविता: 🚭तम्बाकू जहर है भाई🚭 ये तम्बाकू जहर है भाई, ला देता जीवन में तबाही। इससे कैंसर का है खतरा, बना देता है बलि का बकरा।।  इसका प्रयोग करो ना भाई, इसी में है जीवन की भलाई। ना खुद खाना ना खाने देना। जन-जन में ये चेतना जगाना।।  बीड़ी, सिगरेट, हुक्का पानी, ये सब हैं खतरे की निशानी। मुँह का कैंसर, गले का कैंसर, जान बचाना कठिन है भाई।।  जन-जन में ये चेतना जगाओ, तम्बाकू को दूर भगाओ। इससे होवे केवल जग हँसाई, ये तम्बाकू जहर है भाई।।  🙏रचना:- दीक्षा जोशी (प्र०अ०) रा०प्रा०वि० चोरगलिया ब्लॉक-हल्द्वानी, नैनीताल 🙏संकलन :-टीम मिशन शिक्षण संवाद गढ़वाल-कुमाऊँ, उत्तराखण्ड

कन्धे का बस्ता - श्रीमती हेमलता बहुगुणा

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📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में  प्रस्तुत है जनपद-टिहरी-गढ़वाल से शिक्षिका बहिन श्रीमती हेमलता बहुगुणा जी की कविता: 👭कन्धे का बस्ता 👭 एक दिन चुन्नू दौड़ी आई,  अपने बस्ते के पास।  भैया मेरे मुझे बताओ, तुम इतना क्यों हो उदास? लगा रोने जोर-जोर से, दुःख हो रहा मुझको आज। सुबह-शाम कन्धे पर सजता, कोने पर पड़ा हूँ मैं आज।।      जब पढ़ने की बातें होती, किताबें बाहर-अन्दर होती। यह देख कर खुशियाँ होती, जब ज्ञान की बातें होती।। छुट्टी का जब समय आता, झट मैं सबके कन्धे चढ़ जाता। घर जाने को सब तैयार,  बस्ता झूले आर से पार।।   चुन्नू बोली मत रो भैया,  वो दिन जल्दी आयेगा। झूम-झूम कर रोज-रोज, तू कन्धे पर स्कूल जायेगा।। 🙏रचना :- श्रीमती हेमलता बहुगुणा  (सेवानिवृत्त प्र०अ०)  चम्बा, जिला-टिहरी गढ़वाल 🙏संकलन :-टीम मिशन शिक्षण संवाद गढ़वाल-कुमाऊँ, उत्तराखण्ड

गीत खुशी के गाएँगे-श्री दीवान सिंह कठायत

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में  प्रस्तुत है जनपद-पिथौरागढ़ से शिक्षक साथी श्री दीवान सिंह कठायत जी की कविता: गीत खुशी के गाएँगे  हम बच्चे, फिर गीत खुशी के गाएँगे, पहन मास्क दूरी रखकर,महामारी हराएँगे। अपनी अनमोल जान बचाकर,  चेतना अपने परिवारों में लाएँगे।। अब घर पर पढ़ना, हमने लिया है ठान,  साल भर से, शिक्षण विधियाँ ली हैं जान। आॅनलाइन हमको, मिलता जो भी काम, चट पूरा कर लेते, बन सुजान।। करते प्रातः पहले योग ध्यान,  मिलकर फिर प्रार्थना गाते राष्ट्र गान। खाकर कलेवा सब परिवार के बच्चे,  ढूँढते मोबाइल में आज का काम।। अब घर भी अपना, स्कूल सा लगता है,  परेशानी पर सर मैम का सहयोग मिलता है। बिन शिक्षक श्यामपट्ट के, कैसे पढ़ना है हमको,  जान गए  टीवी, मोबाइल, टीचिंग ऐप सभी को।। बन्दी के इन कालों में भी, जीवन सँवारकर दिखाएँगे। बनकर देश के अच्छे बच्चे,  फिर गीत खुशी के गाएँगे।।         🙏रचना:- दीवान सिंह कठायत (प्र० अ०) रा० आ० प्रा० वि० उडियारी  ब्लॉक - बेरीनाग, पिथौरागढ़ 🙏संकलन :- टीम हिम मन ...

प्रकृति का सन्देश - श्रीमती पुष्पा तिवारी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन  में  प्रस्तुत है जनपद-चम्पावत  से शिक्षिका बहिन श्रीमती पुष्पा तिवारी जी की कविता: 🏞️🌳प्रकृति का सन्देश🏞️🌳 जिस प्रकृति ने सब कुछ दिया, उसके साथ हम क्या कर रहे हैं? क्या हम प्रकृति के साथ, सही व्यवहार कर रहे हैं? वनों को काटकर बड़ी-बडी, इमारतें खड़ी कर रहे हैं। जंगलों को नष्ट कर प्रकृति से, यह कैसा खिलवाड़ कर रहे हैं।। जीने को हमें जीवन दिया, रहने को घर, पीने को पानी दिया। खाने को अन्न, शीतल छाया, प्रकृति ने हमें क्या नहीं दिया? वृक्षों से भरा वन दिया, प्राणवायु का वर दिया। सूर्य का प्रकाश दिया, दिन-रात का अन्तर दिया।। पंचतत्वों से बना मानव,  तू क्यों अभिमान करता है? प्रकृति ने तुझे क्या नहीं दिया, फिर तू क्यों दम्भ भरता है? 🙏रचना:- पुष्पा तिवारी रा०उ०प्रा०वि०आमबाग टनकपुर, चम्पावत संकलन:- टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड 

विषम परिस्थितियाँ - श्रीमती सन्नू नेगी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन  में  प्रस्तुत है जनपद-चमोली  से शिक्षिका बहिन श्रीमती सन्नू नेगी जी की कविता: विषम  परिस्थितियाँ परिस्थितियाँ विषम हैं समय बड़ा कठिन, बदल रहा जीवन, मानव बड़ा विकल है। अदृश्य कोई दानव, है साँसों पर हमला, डटकर मुकाबला ही, करना भरोसा सकल है।। क्षण-क्षण साँसे जा रही हैं पल-पल आ रही मौत, मातम छाया चारों ओर क्या झोपड़ी क्या महल है। कराहने की आवाजें करे मन को झकझोर, लम्हा-लम्हा बीत रहा जीने की करनी पहल है।। सामाजिक दूरी बना उम्मीद की डोरी बाँध ले, घर के अन्दर ही रह बाहर जग विकल है। उम्मीदी का दामन थाम है योद्धा सम लड़ना भी, खुद पर भरोसा रख साँस न करनी विचल है।। मासूम बच्चे घर में हो गए परेशान, राह सदा देख रहे कब खुलते स्कूल हैं। पढ़ने को विवश हैं आये कब वो दिवस, यही उम्मीद बस सदा मन में करे हलचल है।। ऑनलाइन पढ़ाई हो तो रही है। कहीं फोन नहीं किसी के पास डाटा। घर में न टी०वी० है न कोई कनेक्शन, सरकार ने दी सुविधा स्वयंप्रभा चैनल हैं।। 🙏रचना:-  सन्नू नेगी(स०अ०) रा०क०उ०प्रा०वि० सिदोली  ब्लॉक-कर्णप्रयाग  जिला-च...

महाराणा प्रताप - श्रीमती सुनीता भटनागर

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन  में महाराणा प्रताप जी की पावन जयन्ती  पर प्रस्तुत है जनपद-नैनीताल  से शिक्षिका बहिन श्रीमती सुनीता भटनागर जी की कविता: 🏹महाराणा प्रताप🏹         पराक्रम, पुरुषार्थ, निडरता,  जिनके पर्याय बने। भारत में महाराणा प्रताप महान, बलशाली राजा हुए।। एक अजब शान, एक निडर आन, जिनका रूप निराला था। मस्तक था ओज से परिपूर्ण, वह बाँका वीर महाराणा था।। 80 किलो का कवच जिनका, 80 किलो का भाला था। कवच, ढाल, तलवार, भाले का, कुल वजन 207 किलो हो जाता था।। भय से सहमा अकबर भी, आधा हिन्दुस्तान देने को तैयार था। पर स्वाभिमानी राणा को, स्वतन्त्रता से प्यार था।। हल्दीघाटी के युद्ध में मुगल, सहमे-सहमे से रहते थे। इस महाप्रतापी राजा को हम, महाराणा प्रताप कहते थे।। यमराज स्वयं बन जाते थे जब, अपने घोड़े चेतक पर चढ़ते थे। क्षत-विक्षत दुश्मन हो जाते थे, नरमुण्ड हवा में उड़ते थे।। जिनकी गरज, गरजते बादल सी, और तलवार चमकती बिजली सी। एक अजब चमक और फुर्ती थी, रग-रग में देशभक्ति झलकती थी।। विष-बीज मातृभूमि में बोने दिया नहीं, सन्द...

बाल श्रमिक - श्रीमती सन्नू नेगी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में बाल श्रम निषेध दिवस पर प्रस्तुत है  जनपद-चमोली  से शिक्षिका बहिन श्रीमती सन्नू नेगी जी की कविता: बाल श्रमिक कॉपी है न किताब, आँखों में न कोई ख्वाब। ये बचपन भी क्या बचपन, दाने-दाने को मोहताज।। दूर किसी ढ़ेर पर, अंगुलियाँ कुरेदता मंजर। ढूँढ रहा निवाला कोई, तन जिसका जर्जर।। घूम रहा इधर-उधर, काँधे पर लटकाए थैला।  पेट की आग बुझाने,  कोई ढो रहा है मैला।।   नन्हें से हाथ, छोटी बाँहें, कैसे करेंगी अभी से काम। जिनमें सजती पेंसिल किताब, मजदूरी करते सुबह से शाम।। दिन भर रद्दी है ढोता, सोचे इनमें क्या होता होगा। रंग-बिरंगे चित्र देखकर, पल में आसमान छूता होगा।। हर दरवाजे से तिरस्कृत, गली की नुक्कड़ से झाँकता। स्कूल के बच्चों की मस्ती, चुपके-चुपके है ताकता।। कब तक बाल श्रमिकता, चलती रहेगी यूँ देश में। कब तक बच्चा बचपन में, घूमेगा मजदूर के वेश में।। शिक्षा  की सुन्दर बगिया में, इन फूलों को खिलने दो। किताब कलम की खाद, माता-पिता को रोजगार दो।। बाल श्रमिक उन्मूलन जैसा, जग में पुण्य कोई काम नहीं। बस्ती-बस्ती और गाँव...

विश्व बाल श्रम दिवस-श्रीमती सरोज डिमरी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में बाल श्रम दिवस पर प्रस्तुत है  जनपद-चमोली से शिक्षिका बहिन श्रीमती सरोज डिमरी की जी की कविता: विश्व बाल श्रम निषेध दिवस जीवन यापन के लिए, बालश्रम जो करते हैं। कुपोषण का शिकार बनते, दीन-हीन बन जाते हैं।। बाल श्रम गरीबी नहीं, गरीबों का शोषण है। इससे गरीबी मिटती नहीं, और ना होता पोषण है।। प्राकृतिक संसाधन परिपूरित, विश्व धरा है भूमि हमारी। बंजर रहने पर भी यह स्वयं को परिपूर्ण बनाती।। जिम्मेदार माँ-बाप सदा ही, अपने बच्चों के हित जीते हैं। आत्मनिर्भर स्वस्थ समाज-हित,  जीवन को जीते हैं।। बच्चे राष्ट्र की संपत्ति होते हैं, हैं समाज की अमूल्य धरोहर। इनका संरक्षण-संवर्द्धन , है हम सबकी जिम्मेदारी।। बच्चा बालश्रम करता यदि दिखे, कोई विद्यालय की राह दिखाना। बाल श्रम से बच्चों को रोक, मानवता का धर्म निभाना।।    सरोज डिमरी (स० अ०) रा० आ० उ० प्रा० वि० गौचर कर्णप्रयाग, चमोली 🙏संकलन :-टीम मिशन शिक्षण संवाद गढ़वाल-कुमाऊँ, उत्तराखण्ड