माँ तुम - श्रीमती वन्दना जोशी
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला "हिम मन मन्थन"में प्रस्तुत है, आज जनपद-चम्पावत, से शिक्षिका बहिन श्रीमती वन्दना जोशी जी द्वारा रचित कविता-: 🙏✍️ माँ तुम मांँ तुम ईश्वर का दिया, अनुपम उपहार हो। जन्म-जन्मान्तर तक, तुम्हारी जय जयकार हो।। इस धरती पर लाई, धन्यवाद बारम्बार हो। श्रद्धा, दया, प्रेम, त्याग की, मूरत साकार हो।। ईश्वर के रूप में, हर जीव ने मांँ को पाया। मांँ के आंँचल में, सम्पूर्ण संसार समाया।। कदम-कदम पर चलना, जीना सिखाया। हार जीत में हर पल, साथ निभाया।। गिरते, पड़ते, उठते, दौड़ते होश संँभाला। मांँ को अपने आस-पास, संँभालते पाया।। थक हार कर जब, घर वापस आया। मांँ को ठण्डी छांँव लिए, इन्तजार में पाया।। तुम धैर्य हो, सहनशक्ति का पुंँज हो। मांँ तुम नव जीवन की, जन्मदाता हो।। अतुलनीय अप्रतिम, ईश्वरीय उपहार हो। आने वाली पीढ़ी की, भाग्य विधाता हो।। 🙏 रचना-: वन्दना जोशी (स०अ०)...