संदेश

अप्रैल, 2025 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

उत्तराखण्ड अनाज दिवस- श्रीमती उषा सागर

चित्र
 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला,  हिम मन मन्थन में  "उत्तराखण्ड अनाज दिवस" के सुअवसर पर प्रस्तुत है जनपद- पौड़ी गढ़वाल से शिक्षिका बहिन श्रीमती  उषा सागर जी द्वारा रचित कविता-: 🙏🌾✍️अनाज दिवस जीवन की रक्षा करने की खातिर, धरती का सीना चीरकर किसान। मेहनत से अन्न उसमें उपजाते जो, हैं अपने भूमिपुत्र हलधर महान।। भिन्न-भिन्न, फसलें उपजाते, धूप, वर्षा, सर्दी में तपते। स्वयं भूखे-प्यासे रहकर, घर अनाज से सबके भरते।। खो गये बहुत से अनाज, मिट गया वजूद जिनका। पुकारती जननी है इनकी, लौटा दो इन्हें वजूद इनका।। कोदो-झंगोरा, ज्वार-बाजरा, रह गये बस नाम ही इनके। बच गए बस खेत कुछ ही, सरसों, गेंहू और धान के।। धरती उत्तराखण्ड की कभी, उगलती थी सोना ही सोना। आज पड़ा है सूना और रीता, इस पुण्य धरा का हर एक कोना।। लहलहाती थी फसलें यहाँ पर, भरे रहते थे खेत-खलिहान। आज हर तरफ दिखते हैं, बंजर खेत और सूने मकान।। लेकर कलेवा में मण्डुवे की रोटी, गुड़ और छांँछ भरा गिलास। पहुंँचते सब नर-नारी वहाँ, जहाँ जोतता था खेत किसान।। बैठ खेत के किनारे मिलजुल, हल-बैलों सहित सभी के साथ। बड़े चाव से खाते म...

फूलदेई त्योहार - श्रीमती अनिता नौडियाल जी

चित्र
 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला,  हिम मन मन्थन में  'फूलदेई त्योहार' के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है जनपद- टिहरी गढ़वाल से शिक्षिका बहिन श्रीमती अनिता नौडियाल जी द्वारा रचित कविता-: "फूलदेई " आया फूलदेई का त्योहार, पूजें घोघा माता। बच्चों की अहम भूमिका,  प्रकृति से है नाता।। पारम्परिक परिधान में,  नन्हे मुन्ने गीत गायें। सारे मिलाकर एक साथ,  कुसुम तोड़कर लायें।। इन फूलों को घर-घर जा,  देहरी पर सजाएंँ। प्यार से झूमें-नाचें-गायें,  सारे मौज मनाएंँ ।। दिल से दिल मिलता,  हर घर फूलों से सजता। खुशी का यहाँ आलम, उत्साह सब पर छाता।। मान्यता है यह त्योहार, लाता ढेरों खुशहाली। विभिन्न फूलों से लदी रहे, जब हर एक डाली। वसन्त ऋतु में आये, नयी उमंग के साथ। अनोखी खुशबू महकाता, चमन जब दिन-रात।। शुरू होता चैत्र संक्रान्ति से,  यह त्योहार प्यारा। बैशाखी तक मनाने का, है रिवाज हमारा।। 🙏रचना-: अनिता नौडियाल (प्र०अ०) रा० प्रा० वि० चौकी तल्ली  कीर्तिनगर, टिहरी गढ़वाल संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

राम लला शत्-शत् अभिनन्दन - श्रीमती सुशीला थपलियाल

चित्र
 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला,  हिम मन मन्थन में  श्रीराम नवमी पुण्य पर्व के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है जनपद- रुद्रप्रयाग से शिक्षिका बहिन श्रीमती सुशीला थपलियाल जी द्वारा रचित कविता-:  🙏🏾🕉️✍️राम लला शत्-शत् अभिनन्दन राम लला शत्-शत् अभिनन्दन, श्याम स्वरूप मृदुल मधु चन्दन। अयोध्या की पावन धरती में, आप विराज गये सुख वन्दन।। दशरथ सुत कौशल्या माई, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न भाई। मनुज रूप में हुये अवतरित दनुजों से मुक्ति दिलायी।। जनक सुता अति सोम्य स्वरूपा, पायी सिया स्वयंवर जीता। पग-पग साथ निभाया रघुपति का, ‌मान बढ़ाया अपने कुल का।। केवट ने तब महिमा गायी, पार सिन्धु करा नहीं ली उतराई। पिता बचन को खूब निभाया, भक्त रूप हनुमान को पाया।। पापों से बाली को मुक्त कराया, सुग्रीव को राज मुकुट पहनाया। राक्षस कुल में जन्मा रावण, अति विद्वान जाति थी ब्राह्मण।। रावण को मुक्ति देकर प्रभु ने, विभीषण को लंकापति बनाया। सुन्दर प्यारे दो सुकुमार, लव कुश देख उर हर्षाया।। हाथ जोड़ करते हैं वन्दन, खुशहाली देना रघुनन्दन। श्याम स्वरूप मृदुल मधु चन्दन, राम लला शत्-शत् अभिनन्दन।। 🙏🏾...

नववर्ष का नवप्रभात- श्रीमती पुष्पा बहुगुणा

चित्र
 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला,  हिम मन मन्थन  में  नवरात्रि पुण्य पर्व पर प्रस्तुत है जनपद- टिहरी गढ़वाल से शिक्षिका बहिन श्रीमती पुष्पा बहुगुणा जी द्वारा रचित कविता-: 🙏🏾✍️नववर्ष का नवप्रभात नव किरणों का शुभ सन्देश, आई वसुधा पर नई उमंग।  चैत्र नवरात्रि का समय पावन, बजे चहुंँ दिशा मंगल मृदंग।। विक्रम संवत का नव अध्याय, खोल रहा है स्वर्णिम द्वार।  धर्म, कर्म, सृजन, विकास, संग हों सबके शुभ विचार।। माँ दुर्गा का हुआ आगमन, सज गई आरती की थाल। सात्विकता की बह चली बयार, सजग हुआ हर मन-प्राण।। गूँजे जयघोष भक्तों के, माँ की महिमा अपार। शक्ति, भक्ति, ज्ञान की ज्योति, रखें हम सदा साकार।। नवसंवत्सर मंगलमय हो, हर घर में फैले उजियारा। हर्ष, समृद्धि, प्रेम, सौहार्द, बने नया ये वर्ष हमारा।। 🙏रचना-: पुष्पा बहुगुणा (प्र०अ०)  रा० उ० प्रा० वि० पिपोला (उठड़)  वि०ख०- जाखणीधार, टिहरी गढ़वाल 🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड