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मधुमास- श्रीमती उषा सागर

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में वसन्त पञ्चमी पावन पर्व के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है आज जनपद- पौड़ी गढ़वाल से शिक्षिका बहन श्रीमती उषा सागर जी द्वारा रचित कविता:- 🙏🏻📝🌹मधुमास🪻🍁🌷 मांँ सरस्वती के आगमन पर, सजने लगी धरती सारी। खिलने लगे फूल रंग-बिरंगे, वन, उपवन, खेतों में बारी-बारी।। मधुमास आ गया निराला,  कूकने लगी कोयल प्यारी-प्यारी। भौंरों के गुंजन से महक उठी, सारी दुनिया जैसे कोई फुलवारी।। पीले फूलों ने सरसों के, सारे खेतों को है घेरा।  लाल, गुलाबी, नीले फूलों ने भी, धरा पर है सुन्दर रंग बिखेरा।। मांँ सरस्वती के स्वागत में बैठी है, सज-धज कर प्रकृति सारी। पीत वसन पहने हुए हैं, घर-घर सारे नर नारी।। आम्र मंजरी ने खुश्बू से अपनी, घर आंँगन को महकाया है। गीत सुनाकर भंँवरों ने, मादकता को बिखराया है।। ‌ पीत वसन, पीत पुष्प, पीत तिलक से, अभिनन्दन है मात तुम्हारा। देकर शुभाशीष हमें,  करो मात उद्धार हमारा ।। सौन्दर्य और यौवन जब दिखे धरा पर, है यह शुभ सन्देश तुम्हारा। गन्ध-सुगन्ध मकरन्द से, अभिनन्दन है मधुमास तुम्हारा।। 🙏🏻रचना-: उषा सागर (स०अ०)...

कुछ सपने - श्रीमती सुषमा नेगी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है आज जनपद- देहरादून से शिक्षिका बहन श्रीमती सुषमा नेगी जी द्वारा रचित कविता:- 🙏📝 कुछ सपने तू फूलों को मत शूल बना, कांँटों पर कोई फूल खिला। वक्त गवाही माँगेगा कल, अभी को ना तू भूल बना।। कर्म ही संग जाएगा तेरे, बातें ना तू फिजूल बना। पर्वत चट्टानों से गुजरे जो, ऐसी ही कोई गूल बना।। जो बुरे विचारों को कुचले, ऐसा कोई त्रिशूल बना। जो हाथों से तराशना था, उसको तू मत धूल बना।। तोड़ उन्हें जो प्रगति में बाधा, कुछ नए उसूल बना। दे निशानी दुनिया को, कुछ ऐसा तो मकबूल बना।। तू नियमों से परे होकर, जगहित में कोई नियम बना। नव चिन्तन नव निर्माण करें, तू ऐसा कोई रसूल बना।। हर दीपक ही प्रकाश बिखेरे, तू ऐसा कोई स्कूल बना।। 🙏रचना-: सुषमा नेगी (स०अ०)  रा० प्रा० वि० आर्यनगर काठबंगला नगर क्षेत्र, जनपद- देहरादून 🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड