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जनवरी, 2024 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

मेरे राम पुनः आ जाओ-पं० जुगल किशोर त्रिपाठी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में श्रीराम मन्दिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह पावन पर्व के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है आज उत्तर प्रदेश के जनपद- झाँसी  से शिक्षक साथी पं० जुगल किशोर त्रिपाठी जी द्वारा रचित कविता:- 🙏🏻🕉️📝मेरे राम पुनः आ जाओ मेरे राम सुनो अर्जी मम, बाट तुम्हारी हेरुँ कब से। आओ सुनलो टेर मेरी तुम, आँखें प्यासी हैं कब से।। आज पुकारे जगत तुम्हें है, अपनी रुप राशि दिखलाओ। हे जग के आराध्य देव प्रभु, मेरे राम पुनः आ जाओ।। बसे राम तुम जन-जन के, उर में, अति जन-जन हर्षित हैं। सीताराम जपें प्राणी सब, हो आराध्य, सब गर्वित हैं।। रामायण घर-घर में गाते, चर्चा करते आपस में नर। भाई राम जैसा न कोई, रहते इक-दूजे के वश में नर।। पावन, पुण्य, पुनीत अयोध्या, सरयू जिस तट बहती है। देती शीतल, सुखद लहर है, आओ! सबसे कहती है।। नारायण हैं राम जानकी, नारायणी सीता मैया। भरत, लखन, रिपुसूदन भाई, परें सभी इनके पैंया।। मातु-पिता, गुरु, बड़ों को मानो, प्रेम सहित सब सन्मानो। भाई-भाई, बहुओं में प्रेम हो, राम राज्य ये तब मानो।। राम आयेंगे फिर घर में अब, काट के फिर वनवास अभय। होगी...

जय श्री राम - श्रीमती अनीता नौडियाल

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में श्रीराम मन्दिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह पावन पर्व के सुअवसर पर प्रस्तुत है आज जनपद- टिहरी गढ़वाल से शिक्षिका बहन श्रीमती अनीता नौडियाल जी द्वारा रचित कविता:- 🙏🏻🕉️📝"जय श्रीराम" राम-मय बच्चा-बच्चा, राम-मय पूरा देश। राम ही जग संरक्षक, राम ही अयोध्या नरेश।। राजा दशरथ थे पिता, माता थी कौशल्या माई। श्री हरि को अयोध्या नगरी, जन्म धरने को है भायी।। चैत्र मास, शुक्ल पक्ष, नवमी तिथि को जन्मे वे। रघुकुल के भाग्य और, अयोध्या नगरी के धन्य थे।। कौशल्या, कैकई, सुमित्रा, तीन थी उनकी माई। राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न, चार थे वे प्यारे भाई।। धर्म पत्नी सीता मैय्या, जिनका है उज्ज्वल चरित्र। हनुमान परम भक्त जिनके, सुग्रीव जैसे कई मित्र।। अनगिनत राक्षस मारे, थे गुरु उनके विश्वामित्र। लव-कुश से सुन्दर उनके, जन्में दो प्यारे पुत्र।। शत्रुता कर बैठा था, प्रभु श्रीराम से लंकेश। हे लंकापति! हे अज्ञानी! वे हैं प्रभु मानव भेष।। धर्मपथ पर अग्रसर प्रभु, करने लगे युद्ध भीषण। सर्वनाश हुआ रावण का, लंकापति बने विभीषण।। त्याग, तप और धर्मपालन की, ये कहान...

अवध में राम आये हैं- सोमपाल सिंह प्रजापति "सोम"

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में श्रीराम मन्दिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह पावन पर्व के सुअवसर पर प्रस्तुत है आज जनपद- नैनीताल से शिक्षक साथी श्री सोमपाल सिंह जी द्वारा रचित कविता:- 🙏🏻🕉️📝अवध में मेरे राम आये हैं सारी दुनिया में बाजे शहनाई, अवध में मेरे राम आये हैं।  अवध में मेरे राम आये हैं,  अवध में प्रभु राम आये हैं।।  हमने सच-सच बात बताई, अवध में भगवान आये हैं।।  सारी दुनियांँ में...... कोयल मीठे गीत सुनाये, भंवरे गुन-गुन राम धुन गायें।  आयेंगे वहांँ पर देवता सारे, सबके सब बस राम को निहारें।।  देखो! मयूर नाच नचाई,  सकल गुण निधान आये हैं।।  सारी दुनिया में .... नदियांँ कल-कल शोर मचावें, सागर उमड़-घुमड़ लहरावे।  प्रकृति की छटा निराली, चहुंँ दिशि में फैली हरियाली।।  पर्वत रहा शीश नवायी,  अवध में मेरे राम आये हैं।।  सारी दुनिया में..... कजरारे मेघा घिर आए,  चपला चमके शोर मचाये। हर कोई है दर्शन का प्यासा,  हमको भी है दर्शन की आशा।।  सब देवों ने दुन्दुभी बजाई, गुणों की वहांँ खान आये हैं...

घुघूती त्योहार - श्रीमती अमिता क्वीरा

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में उत्तराखण्ड के पावन लोकपर्व घुघूती त्योहार के शुभ अवसर पर प्रस्तुत है आज जनपद- नैनीताल से शिक्षिका बहन श्रीमती अमिता क्वीरा जी द्वारा कुमाऊँनी लोक भाषा में रचित  कविता:- 🙏🏻📝🕊️घुघूती त्योहार 🕊️ घुघुती को त्यार एगि,  बड़ घुघुत बड़ुल लगि।  ऐ जाओ पहाड़ा,  लागि गो निसासा।।   इज बाब की याद एगि,  दिद मैतै कि बाट लागि।  पू घुघुत टोकर में धरि,  नान्तिना कै काखि में धरि।।                ऐ जाओ पहाड़ा,  लागि गो निसासा।।  बागस्वर में म्यल लगल,  सरयू को तीर सरयू को तीर।  बागनाथा में बॉंधि जाओ,  तुम एबेर चीर तुम एबेर चीर।।  हर बरस ऊन लिजि,  चीर कै खोलण लिजि।  ऐ जाओ पहाड़ा,  लागि गो निसासा।।  रानिबाग कत्यूरी औनी,  सारी रात जाग लगूनी।  गार्गी में डुबुक मारनी,  तुम किलैनि देखि जानि।।  पितरौंक आशीष लिजि,  देवभूमिक मान लिजि। ऐ जाओ पहाड़ा,  लागि गो निसासा।।    🙏🏻रचना-: अमि...

सावित्रीबाई फुले-श्रीमती देवेश्वरी सेमवाल

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में देश की पहली महिला शिक्षिका श्रीमती सावित्रीबाई फुले की पावन जयन्ती पर पर प्रस्तुत है आज जनपद- रुद्रप्रयाग गढ़वाल से शिक्षिका बहन श्रीमती देवेश्वरी सेमवाल जी द्वारा रचित कविता:- सावित्रीबाई फुले महाराष्ट्र के सतारा जिले के,  एक छोटे से गाँव में जन्मी। समाज सेविका और कवयित्री,  सावित्रीबाई फुले नाम से है भायी।।  भाई-बहनों में सबसे छोटी,  दलित परिवार में जन्मी थी।  पढ़ना-लिखना चाहती थी,  पर पिता ने पढ़ने नहीं दिया।।  9 वर्ष की छोटी सी आयु में ही,  ज्योतिराव फुले संग हुआ विवाह।  पति से पढ़ने की इच्छा जाहिर की,  ज्योतिराव फुले ने दिया पूरा साथ।।  पढ़ने जाती थी जब सावित्रीबाई फुले,  उन पर करते थे लोग बहुत बुरा प्रहार।  फिर भी सावित्रीबाई फुले ने डटकर,  किया सामना और मानी नहीं हार।।  स्वयं शिक्षा को हासिल करके,  जग में कमाया ऊंँचा नाम।  बालिकाओं की शिक्षा के लिए,  1948 में पुणे में खोला बालिका विद्यालय।।  ज्योतिराव फुले के सहयोग से, ...

शुभ मंगलम् - श्रीमती सरोज डिमरी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में आँग्ल नव वर्ष के शुभागमन पर प्रस्तुत है आज जनपद- चमोली गढ़वाल से शिक्षिका बहन श्रीमती सरोज डिमरी जी द्वारा रचित कविता:- 🙏🏻🕉️📝शुभ मंगलम्  नव जनवरी के आगमन को,  उत्सुक खुशियों की मस्ती में। हर चेहरे पर रौनक है, धूम मची है बस्ती में।।  नववर्ष की शुभकामना। नए वर्ष की शुभकामना।। इस ठण्डी बहार में,  31 दिसम्बर की रात में। जबरदस्त जश्न मना कर,  नए वर्ष के उल्लास में।।  नववर्ष की शुभकामना। नए वर्ष की शुभकामना।। खुशी भरे लम्हों पर, रौनक है चेहरे पर।  बीते हुए दिनों को, जाते हुए पलों को।।  नववर्ष की शुभकामना। नए वर्ष की शुभकामना।। आंँखों की शोभा न्यारी को, उल्लास पर्व और त्योहार को। मदमस्त रंगों की होली मिले,  आस्था की महाशिवरात्रि को।।  नववर्ष की शुभकामना। नए वर्ष की शुभकामना।। दफ्तरों के कामकाज,  नौकरी-पैसा-घर-बार।  खेती किसानी या दरबार,  ढेर सारी शुभकामना।।  नववर्ष की शुभकामना। नए वर्ष की शुभकामना।। खिलते हुए सुमन पर,  नई-नई इमारतों पर।  कर्मरत ...