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जुलाई, 2022 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

हरियाली तीज- श्रीमती पुष्पा तिवारी जी

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📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में हरियाली तीज पावन पर्व पर प्रस्तुत है आज जनपद-चम्पावत से शिक्षिका बहिन श्रीमती पुष्पा तिवारी जी की कविता-: 🙏🕉️🌳📝हरियाली तीज शिव-शक्ति हमारा मन, हरियाली तीज। वाकई सात मंजिला, बात सही चक्रों का यह। जो करे विश्वास उसी ने, सजाया अपना शरीर का दरबार।।  शक्ति का स्थान मूलाधार तो है, कुण्डली मारकर साँप लिपटा। जो कर्म ऊर्जा से हटाये, वह स्वयं जगत में महान बना।। छः पंखुड़ियों का यह शरीर, स्वाधिष्ठान चक्र को बनाए महान। अपने को आत्मविश्वास से भर दो, तब चक्र करता अपना काम।। पीला वर्ण हमारे शरीर का , जगा दो इसे कर्म और धर्म से। लक्ष्मी है इसकी अधिष्ठाता, इसे कर दो कर्म से महान।। हृदय चक्र का क्या कहना! प्रेम से भर दो घर और संसार। मन के भंवरे को मत  दुलाओ, कर दो अपने मन का स्वच्छ विचार।। चक्र विशुद्ध कण्ठ हमारा,  करें लोकहित परहित से डर।  आठों सिद्धि हमारे ही अन्दर , रे मनुष्य!  इसको जान।। मैं कौन हूंँ, उत्तर मिला, तू शिव में है, शिव तुझ में है। कुण्डली सुषुम्ना त्रिवेणी यह सब, तू ही तो ही शिव शक्ति है।। सांँस के बिना...

पावस ऋतु -श्रीमती माधुरी नैथानी जी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है आज जनपद पौड़ी-गढ़वाल से शिक्षिका बहिन श्रीमती माधुरी नैथानी जी की कविता-: 📝पावस ऋतु  पावस ऋतु सुन्दर आयी है,  सुन्दरता को संग लायी है।  बेल, लता, फूलों से सजकर,  यह वसुन्धरा यूँ मुस्काई है।।  चटक रही कोमल कलियाँ,  बलखाती तट सारी नदियाँ।  मन मयूरा नाचते रहते, मेघ मल्हार हैं गाते फिरते। मन पावस बेला छायी है, पावस ऋतु सुन्दर आयी है।। नीले अम्बर घिरते बदरा, माथे गगन सजा है कजरा। इस  चपला चंचल चहक रही,  वन बगिया सारी महक रही है।  पुलकित पवन हर्षायी है,  पावस ऋतु सुन्दर आयीहै।। हर डाली झूला झूल रहे,  मन मीत पपीहा कूक रहे।  सखियों सब पेंग बढ़ाती है,  मेघ-मल्हार गाती हैं। चातक उन्मादी छायी है, पावस ऋतु सुन्दर आयी है।। तन-मन चितवन, कन-कन पुलकित। चलती पवन सन-सन, चूड़ी बजती खन-खन। पायल धुन लहरायी है, पावस ऋतु सुन्दर आयी है।। दस्तक देतीं बचपन यादें,  मन कहता है कूदें भागें।  स्मृतियों की उन झीलों से,  आँखे भर-भर आयी हैं। नित जलधारा टपकायी ह...

हरेला पर्व - डाॅ० आभा भैंसोड़ा

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 🙏📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में उत्तराखण्ड के लोक पर्व हरेला के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है आज जनपद- नैनीताल से शिक्षिका बहिन डाॅ० आभा भैंसोड़ा जी की रचना:- 🙏📝🌳🌱हरेला पर्व श्रावण सौर १ प्रविष्टे, कर्क संक्रान्ति, हरेले की धूमधाम मनायी जाती। सूर्य नारायण करते प्रस्थान,  मिथुन से कर्क प्रवेश गतिमान।। आषाढ़ माह में, सावन से पूर्व, दस दिन पहले, हरेला बोते। मान्यता हरेला, बोने के दिन से , फसल बुआई पूर्णता तब से।। हरेला बो कर प्रतिष्ठित करते, मन्दिर में स्थापित कर देते। दसवें दिन हरेला कटता, सर्वप्रथम ईश्वर को चढ़ता।। कामना ईश्वर से करते हैं, हरेले जैसी हरियाली आये। माता बहनें, पूजन करती, घर में सबके खुशहाली लाये।।  घर वालों को आशीष देती,  चिरंजीवी रहो, जागृत रहो।  धनधान्य सब घर में आए,  हरियाली सी खुशियाॅं छाये।।     फूल से सदा मुस्काते रहना, धरती सा विस्तार रखना। आकाश सा उच्च शिखर हो, बुद्धि तुम्हारी अति प्रखर हो।।    🙏 रचना :- डॉ० आभा सिंह भैसोड़ा (स०अ०) रा० प्रा० वि०- देवलचौड़ ब्लाॅक - हल्द्वानी, नैनीताल ?...

हरेला महोत्सव- श्रीमती गंगा आर्य जी

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 प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में उत्तराखण्ड के लोक पर्व हरेला के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है आज जनपद- पिथौरागढ़ से शिक्षिका बहिन श्रीमती गंगा आर्य जी की रचना:- *"हरेला महोत्सव"* हरेला महोत्सव की चली बयार, प्रकृति में छायी खुशियों की बहार। आओ हरेला पर्व मनायें, हम सब मिलकर वृक्ष लगायें।। प्रकृति का यह अनमोल उपहार,  हमको पेड़ लगाकर इसे सजाना है। जीवनोपयोगी वृक्षारोपण करके,  इसअभियान को कामयाब बनाना है।। वृक्षारोपण नहीं करोगे तो, रिमझिम फुहार कहाँ पाओगे। वृक्ष नहीं तो प्राणदायिनी हवा,  फिर कहांँ से पाओगे।। अब ये प्रण हम सब को लेना है,  हर अवसर पर वृक्ष लगाना है। चहुँ दिशि होगी जब हरियाली, जीवन चहक उठेगा जैसे डाली-डाली।। हरेला पर्व पर वृक्ष लगाकर,  धरती मांँ का आंँचल भर दो। दागदार चुनरी धानी कर दो, धरा पर पेड़-पौधों की वर्षा कर दो।। इन्हीं से धरा मुस्काती है,  सजती और संँवरती है। आओ हम सब वृक्ष लगायें, धरती को हम स्वर्ग बनायें।। हरेला पर्व की चली बयार, चहुँ ओर छायी खुशियों की बहार। घर, आँगन, मोहल्ले और विद्यालय सब,   अपने ...

पाती वतन के नाम लिखूँ- श्री सोमपाल जी

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 प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में   प्रस्तुत है आज जनपद-नैनीताल से शिक्षक साथी श्री सोमपाल जी की रचना:- पाती वतन  के नाम लिखूँ पाती वतन के नाम लिखूँ, मैं गिन–गिन कर इल्जाम लिखूँ।  पाती वतन के नाम लिखूँ।। गाँधी, नेहरू, पटेल, सुभाष, अरमान बाबा साहेब का बिका।  अशफाक, भगत और चन्द्रशेखर,  उस बिस्मिल का बलिदान बिका। मैं उन वीरों का बलिदान लिखूँ,  मै पाती वतन के नाम लिखूँ।। ऐ भारत मां! तेरे आंँचल पर हैं, दाग बहुत से लगे हुऐ। हर घर आँगन चौराहे पर हैं,  नाग बहुत से बसे हुए। उन विषधरों  का विषगान लिखूँ,  मै पाती वतन के नाम लिखूँ।। दे देकर झूठे आश्वासन,  नेता ठगते लाचारों को। बेईमान पुलिस दोषी को छोड़,  पकडे़ निर्दोष बेचारों को। इस दुनिया को बेईमान लिखूँ,  मै पाती वतन के नाम लिखूँ।। कहने को भाई-भाई पर,  कोई किसी को नहीं भाता। थोड़े से रुपयों की खातिर, भाई-भाई को मरवाता। मै रिश्तों का अपमान लिखूँ,  मै पाती वतन के नाम लिखूँ।। हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई,  कहते हम भाई-भाई हैं। इनकी हरकत को देख-...

गुरु पूर्णिमा - श्रीमती सरोज डिमरी

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प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में  गुरु पूर्णिमा के सुअवसर पर प्रस्तुत है आज जनपद-चमोली से शिक्षिका बहिन श्रीमती सरोज डिमरी जी की रचना:- *गुरु पूर्णिमा* महर्षि पराशर को कीर्तिमान पुत्र, वेदव्यास रूप में मिला। महाभारत की कथा का सृजक,  आषाढ़ पूर्णिमा को मिला।। अपने पुत्र शुकदेव को, सब पुराण कंठस्थ कराये। अन्य शिष्यों को भी,  इसका अमृत पान कराये।। महाभारत की कथा जन-जन को, वैशम्पायन द्वारा सुनायी गयी। तब से अब तक ये कथाएँ, जन मानस ने जी भर गायीं।। ऋषि वेदव्यास जी का जन्म, आषाढ़ पूर्णिमा तिथि को हुआ। तब से इस दिन को फिर, गुरु पूर्णिमा कहा गया।। आज महर्षि वेदव्यास जी के, जन्मदिवस को हम मनाते हैं। इसीलिए इस आषाढ़ पूर्णिमा को,  गुरु पूर्णिमा हम कहते हैं।। वेदव्यास के ज्ञान से, अपना ज्ञान बढ़ाते हैं। धन्य भाग हमारे जो हम, मानुष जन्म पाए हैं।। गुरु आदरणीय जन होते,  जिनसे सीख सदा मिले।  वहीं प्रेरक-मार्गदर्शक बनकर,  हमें गुरु सा समान मिले।। आओ! आज गुरु पूर्णिमा पर, संकल्प हम भी यह करें। नित नव सृजन और ज्ञान का, सम्मान हम सदा करें।। 🙏रचना-: स...

मेरी चाहत - डाॅ० आशा विष्ट जी

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 प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में  प्रस्तुत है आज जनपद-नैनीताल से शिक्षिका बहिन डा॓० आशा विष्ट जी की रचना:- 📝मेरी चाहत बच्चे मेरे दिल के टुकड़े, बच्चे मेरी शान। बच्चों से ही मिल पाया, मुझे बहुत बड़ा सम्मान।। बच्चों से ही मेरी रोटी, बच्चों से ही मेरा पानी। बच्चों पर ही मेरा जीवन, टिका हुआ है आजीवन।। बच्चे अगर पूछें मुझसे, मुझको क्या अच्छा लगता है? मैं तो बस यही कहूॅंगी, जो तुमको अच्छा लगता है।। मन-मस्तिष्क तो बन जाऊँ कहता, एक सुन्दर सी छोटी कविता‌‌। जिसको तुम जीवन भर गाओ, उतरे मन में ऐसी कविता।। और सुनो तो यह भी चाहती, बना पाऊँ एक सुन्दर कहानी‌। अच्छे बुरे सभी को सुहाती, हो जाये थोड़ी सी हैरानी।। चाहत तो यह भी है मेरी, फिर से बन जाऊँ बच्ची। फिर से सीखूॅं अच्छी बातें, बन जाऊँ सबकी सच्ची।। चाहत है मेरी, नन्हे बच्चे, पढ़-लिखकर बनें सब अच्छे। जो मैं करने से रही वञ्चित, उसको बच्चे करेंगे सञ्चित।। देश का गौरव मान बढ़ेगा, मस्तक मेरे भी सम्मान चढ़ेगा। बने मेरा देश महान, यही मेरी कल्पना उड़ान ।। 🙏रचना-: डॉ० आशा बिष्ट (प्र०अ०) रा० प्रा० वि० धुलई  वि० ख० - भीम...

स्कूल चलो - श्रीमती गंगा आर्य जी

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 प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में    विद्यालय खुलने के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है आज जनपद पिथौरागढ़ से शिक्षिका बहिन श्रीमती गंगा आर्य जी की रचना स्कूल चलो गर्मी की छुट्टियाँ दबे पांँव चली गईं, छात्रों में खुशी की लहर दौड़ गई। प्यारे बच्चों! अब तुम वापस आ जाओ, सूने पड़े स्कूल को आकर तुम सजाओ।। नाना-नानी, मामा-मामी, सब को अब तुम बाय-बाय कह दो। नई शिक्षा नीति होने वाली है लागू, आओ! नया कोर्स आकर तुम पढ़ो।। होमवर्क मिला था जो तुमको, उसको कहीं भूल न जाना तुम। नयी सुबह की तैयारी करके, नयी उमंग के साथ स्कूल आना तुम।। अण्डे,केले, फल और दूध, कर रहा है तुम्हारा इन्तजार। आस लगाकर बैठा हुआ है, मध्याह्न भोजन को आहार।। खूब हो गयी मौज-मस्ती, सिर्फ पढ़ाई अब करनी है। सूनी पढ़ी है शाला तुम्हारी, अब आकर ये सजानी है।। सूना पड़ा है स्कूल आंँगन, सूना पड़ा है विद्यालय भवन। नजरें ढूंँढ रही बार-बार तुमको, अपनी टोली लेकर जल्दी से तुम आ जाओ।। 🙏 रचना-  गंगा आर्या (प्र०अ०)  रा० प्रा० वि० भट्टीगांव वि० ख० बेरीनाग, पिथौरागढ़ 🙏संकलन :-टीम मिशन शिक्षण संवाद गढ़वाल-कुमाऊ...