पिताजी- श्रीमती सरोज डिमरी
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला, हिम मन मन्थन में "फादर डे" के सुअवसर पर प्रस्तुत है आज जनपद- चमोली गढ़वाल से शिक्षिका बहन श्रीमती सरोज डिमरी जी द्वारा रचित कविता-: 🙏🏻📝पिताजी पिता प्यार की खान हैं, पिता सकल संसार। मात-पिता के सामने, अन्य चीज बेकार।। मात-पिता, स्वामी, सखा, सबके चारों मित्र। भाग-जोग, संजोग से, बनते चित्र-विचित्र।। मित्र बनाया मात ने, लेकर फेरे सात। परमपिता परमात्मा, बनकर आए तात।। पालन-पोषण योग में, करते नित सहयोग। हम बालक मन मौज से, करते हैं उपभोग।। परिवार की रीढ़ हैं, होते सदा सहाय। खान-पान, पालन जगत, सब से देत मिलाय।। अच्छे बच्चे ही सदा, बनते अच्छे बाप। सीखे निज संस्कार से, उद्यम करते आप।। 🙏🏻रचना-: सरोज डिमरी (स०अ०) रा० उ० प्रा० वि० घतोड़ा वि०ख०- कर्णप्रयाग, चमोली 🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड