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आओ हरेला पर्व मनायें- श्री प्रियदर्शन डोभाल जी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में हरेला पावन पर्व के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है आज जनपद- नैनीताल से शिक्षक साथी श्री प्रियदर्शन डोभाल जी द्वारा रचित कविता:- 🙏🌳📝आओ हरेला पर्व मनायें पर्यावरण सुरक्षा हेतु , मिलकर सब वृक्ष लगायें।  जीव-जन्तु जितने धरती पे,  सबके प्राण बचायें।।  आओ हरेला पर्व मनायें, आओ हरेला पर्व मनायें।।  कटे वृक्ष यदि भूल से कोई,   तो उनकी जड़ ना उखाड़ें।  फिर पनपेंगें और फल देंगें, गर उनको गले लगायें।।  सिंचित कर जल से उनको, फिर हरा-भरा कर जायें।  जीव-जन्तु हैं धरा पे जितने, सबके प्राण बचायें।।  आओ हरेला पर्व मनायें,  आओ हरेला पर्व मनायें।।  चिड़ियों का कोलाहल हो नित,  हवा सुगन्धित पायें।  मेघा भी बरसे तब रिमझिम, और फसल लहरायें।।  आओ हरेला पर्व मनायें,  आओ हरेला पर्व मनायें।। वृक्ष कटे ना अब कोई "हेमू", कसम सभी मिल खायें।  वृक्षारोपण कर धरती को, मिलकर सब स्वर्ग बनायें।।  आओ हरेला पर्व मनायें,  आओ हरेला पर्व मनायें।। 🙏 रचना-:  प्रियदर्शन ...

गर्मी का मौसम - श्रीमती सूरी भारती

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है आज जनपद- टिहरी गढ़वाल से शिक्षिका बहन श्रीमती सूरी भारती जी द्वारा रचित कविता:- 🙏🌞🌳 ⛱️📝गर्मी का मौसम आया मौसम अब गर्मी का, भागा मौसम जी सर्दी का।  गर्म कपड़े अब नहीं सुहाते , पहनो तो पसीना खूब बहाते।।  सूरज जी भी अब लगे भड़कने, तेज धूप से पशु  पक्षी लगे तड़पने।  दोपहर में आती तेज गर्म हवाएँ, तपती गर्मी से जीव-प्यासे अकुलाए।।  नदी तालाब भी सब सूख गये, जाने कहांँ तपती रेत में डूब गये।  घर में आ गये पंखा, कूलर, ए०सी०, लू से लगती बीमारी कैसी-कैसी।। रसना, आमरस, जूश खूब भाते, आइस-क्रीम, कुल्फी सब खूब खाते।  आया महीना अब गर्म जून का,  तेज हवाएँ लायी संकेत मानसून का।।  आसमान से गिरते मोटे-मोटे ओले, लगते हैं जैसे नमक चीनी के गोले। गर्मी ने भाई दिन-रात सताया,  मच्छर, मक्खियों ने भी शोर मचाया।।  सूरज दादा अब बस रहम करो,  थोड़ा गर्मी कम किया करो।।  🙏रचना-  सूरी भारती (प्र०अ०)  रा० प्रा० वि० उठड़ वि० ख०- जाखणीधार, टिहरी गढ़वाल 🙏संकलन- टीम हिम मन ...

हरियाली का त्योहार हरेला - श्रीमती उषा सागर

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में हरेला पावन पर्व पर प्रस्तुत है आज जनपद- पौड़ी गढ़वाल से शिक्षिका बहन श्रीमती उषा सागर जी द्वारा रचित कविता:- 🙏🌳🦚हरियाली का त्योहार हरेला उत्तराखण्ड का पावन हरेला,  त्योहार है हरियाली का।  मास पवित्र सावन हैआया,  मौसम त्योहारों की खुशहाली का।। नये-नये वृक्ष लगाकर,  धरती को खूब सजायें।  ऑक्सीजन का स्रोत बढ़ाकर,  पर्यावरण को शुद्ध बनायें।। घर, विद्यालय, जंगल, राहें,  सभी जगहों पर वृक्ष लगायें।  कर श्रृंगार धरती का हम,  आपदाओं से इसे बचायें।। यूंँ तो हरेला वर्ष में,  तीन बार मनाया जाता है।  चैत्र, श्रावण, आश्विन में,  हर साल यह त्योहार आता है।। सबसे महत्वपूर्ण हरेला,  सावन का माना जाता है।  पवित्र सावन मास में ही,  शिव पार्वती को पूजा जाता है।। हरियाली तीज, रक्षा बन्धन,  हर्षोल्लास से मनाई जाती है।  बहिन, बेटियाँ इन त्योहारों में,  पीहर अपने आती हैं।। देकर उनको उपहार सगुन में,  सदा सत्कार किया जाता है।  उत्तराखण्ड का पावन हरेला...

हरियाली-श्रीमती विजया सजवाण

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में हरेला पावन पर्व पर प्रस्तुत है आज जनपद- चमोली गढ़वाल से शिक्षिका बहन श्रीमती विजया सजवाण जी द्वारा रचित कविता:- 🙏🕉️🌳🌏हरियाली 🦜🦚🪴 छम-छम करती आयी बूंँदे,  हरी चुनरी धरा को पहनायी।  नाचे देव, वन मयूर, नभ सब,  हरियाली की महक जब छायी।।  बर्षा ऋतु बनी बड़ी पावन, सावन माह संक्रान्ति जो आयी।  गूंँज उठे बम-भोले के जयकारे,  हरेला त्योहार की कथा सुनायी।।  जौ, गहत, मक्का, भटृ, तिल, गेहूं,  सब मिलकर मन्दिर व घर में उगाया।  नौ दिन सींचा सबने पानी से,  दसवें दिन देव पूजन से जगाया।।  हरा रंग सुख-समृद्धि का मान,  हरियाली का सब पूजन करते।  हरी चूड़ियाँ, हरे वस्त्र धारण कर शिव भक्ति से सब मन भरते।। मेहल की टहनी सजी खेतों में, सुख शान्ति का आशीष दे जाती।  लहराती हुई वन-उपवन हरियाली सबके मन को है यह खूब भाती।। बाग-उपवन झूल रहे सब,  मोरों की भी आयी है बहार।  कोयल ने भी राग छेड़ दिया,  बेलपत्र से शिव ने किया श्रृंगार।। 🙏रचना-: विजया सजवाण(स०अ०)  रा० उ...