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तुम बच्चे हो बड़े प्यारे- सोमपाल सिंह

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन  में बाल दिवस के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है आज जनपद- नैनीताल से शिक्षक साथी श्री सोमपाल सिंह जी द्वारा रचित कविता-: 📝👩‍❤️‍👨 तुम बच्चे हो बड़े प्यारे तर्ज- तुझे सूरज कहूॅं या चन्दा  तुम बच्चे हो बड़े प्यारे, तुम हो जग के उजियारे। तुम हो भारत माता की, ऑंखों के झिलमिल तारे।। ७ तुम्हें देख के माॅं जीती है। तुम्हें देख-देख ऑंखों से, वो प्रेम का रस पीती है।। तन-मन तुम पर है वारा, वारे अपने सुख सारे। तुम हो भारत माता की, ऑंखों के झिलमिल तारे।। तुम्हें देख तनिक सा पीड़ित, उस बाप का दिल रोता है। तुम्हें देख-देख खुश होता, मन में सपने बोता है।। तुम सुन्दर वृक्ष सा बढ़कर, हरना उसके दुख सारे। तुम हो भारत माता की, ऑंखों के झिलमिल तारे।। मम्मी जब सुबह जगाये, तब जल्दी से जग जाना। स्कूल रोज तुम आकर, पढ़ने में ध्यान लगाना।। गुरुजनों का कहना मानो, बन जाओ उनके प्यारे। तुम हो भारत माता की, ऑंखों के झिलमिल तारे।। तुम दीपक हो कुल के, कोमल हो बुलबुल से। नहीं अभी समझ है पूरी, बालक हो चुलबुल से।। तुम हो भारत की धरोहर, हम सब मिल तुम्हें सॅं...

ईगास बग्वाळ- श्रीमती सन्नू नेगी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में हरिबोधनी एकादशी पावन पर्व पर प्रस्तुत है आज जनपद- चमोलाी गढ़वाल से शिक्षिका बहन श्रीमती सन्नू नेगी जी द्वारा रचित गढ़वाली कविता-: *🙏🕉️🪔📝ईगास बग्वाळ* आवा अबकी इगास खूब मनौला, छोड्यां भीतरू दिवा-बत्ती जगौला। द्यो-द्यपतों मूं धूप-धुप्यांणु दिखोला, म्वौर-डिंडा्ळी फूलोंन  सजौला।।  आँयी चा ईगास  बग्वाल बल्, स्वांळी-पकौड़ी, दूध-भात बड़ोला। ग्वोरु -बल्दूँ  तें  पिन्डू-भात खवेतें, सींगों पर तौंकी त्यौल लगौला। हात की राखुड़ी इने-उने निं फरोंदा, गौड़-बाछी का पुछडा पर लगोंदा। दौळी-छिलकु का फाड़ा ल्यायां, स्यौळून तौंका भैलू बडौंदा।।  माधो सिंह भण्डारी गाथा कू पर्व, वैका वीरता का किस्सा सुणौला। ईगास मनाई किले उत्तराखण्ड मा, नौना-बाळूं तैं पर्व कू महत्व बतौला। बनवास बे रामचन्द्रजी आया अयोध्या, बग्वाळ कू त्योहार तब छां मनौदा। वीं बात कु पता ग्यारा दिन बाद चली, उत्तराखण्ड  मा  इगास तबी मण्डौन्दा।। ✍️ रचना-: सन्नू नेगी (स०अ०) रा० क० उ० प्रा० वि० सिदोली क्षेत्र- कर्णप्रयाग, चमोली 🙏संकलन- टीम हिम मन मन...

ईगास-बग्वाळ - श्री मनोज घिल्ड़ियाल

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में हरिबोधनी एकादशी पावन पर्व पर प्रस्तुत है आज जनपद- पौड़ी गढ़वाल से शिक्षक साथी श्री मनोज घिल्ड़ियाल जी द्वारा रचित कविता-:            🙏🕉️🔯📝ईगास बग्वाळ श्रीराम रावण को पराजित करके, वन से लौटे थे जब घर अपने। अयोध्यावासियों ने उनके स्वागत में, दीप जलाये थे तब घर अपने।। यह शुभ सूचना गढ़वाल में, कार्तिक शुक्ल एकादशी पहुॅंच पाई थी‌। तब गढ़वासियों ने अपनी खुशी, ईगास पर्व के रूप में मनाई थी।। इस दिन छिल्ले रस्सी से बाॅंधकर, फिर ऊॅंचे स्थान पर ले जाकर। फूलझड़ी सा जलाकर घुमाया जाता है, जिसे भेैलो खेलना कहा जाता है।। आज गौमाता का पूजन भी होता,  मॅंडुवा झिंगोरा भात खिलाया जाता। पूड़ी, पकोड़ी, स्वाळे पकाये जाते हैं, और पास-पड़ोस में बाॅंटे जाते हैं।। आओ सब मिलकर इगास मनाऍं, अपनी संस्कृति को आगे बढ़ाऍं।। 🙏रचना-: मनोज घिल्डियाल (प्र०अ०) रा० प्रा० वि० कलीगाड़ वि० ख०- रिखणीखाल, पौड़ी गढ़वाल 🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड