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जनवरी, 2025 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

गणतन्त्र दिवस - श्री गोविन्द बल्लभ भट्ट

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में "गणतन्त्र दिवस राष्ट्रीय पावन पर्व के परिप्रेक्ष्य में " प्रस्तुत है जनपद पिथौरागढ़ से शिक्षक साथी श्री गोविन्द बल्लभ भट्ट जी द्वारा रचित कविता-: 🙏🏾✍️🇮🇳गणतन्त्र दिवस बहुत बड़े संघर्षो की गाथा का, लेखा एक बनवाया था। छब्बीस जनवरी उन्नीस सौ पचास को, संविधान लागू करवाया था।। मेरा देश भारत महान है, ये ही तो गणतन्त्र की शान है। विश्व के सभी देशों में लिखित, हमारा सबसे बड़ा संविधान है।। जाति, धर्म का भेद न जिसमें, नहीं ऊँच-नीच का भेद इसमें समान अधिकार यहाँ सभी के, मिला जीने का हक समान इसमें।। दासता की जंजीरों को काट, स्वतन्त्रता जब हमने पाई थी। देश को एक सूत्र में बांँधने को, संविधान की रचना करवाई थी।। यह गौरव की गाथा है, गर्व से उठा भारत माँ का माथा है। विजय पथ पर जब चलती सेना, स्वयं पर गर्व करती भारत माता है।। विविध संस्कृतियाँ रंग बिखेरती, भारत की एकता का द्योतक है। पर्व पुनीत गणतन्त्र दिवस, हर मन को यह भाता है।। आत्म-मन्थन करना हम सबको, भारत का मान-सम्मान बढ़ाना है। गणतन्त्र के इस महान तीज पर, हम सब ने यह संकल्प लेना है...

राष्ट्रीय युवा दिवस- माधव सिंह नेगी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला, हिम मन मन्थन में "राष्ट्रीय युवा दिवस 2025" के सुअवसर पर प्रस्तुत है, स्वामी विवेकानन्द जी के जीवन पर आधारित एक अति सूक्ष्म आलेख-: 🙏🏾🕉️✍️राष्ट्रीय युवा दिवस 2025  आज सारा देश राष्ट्रीय युवा दिवस मना रहा है। यह विशेष दिन हर वर्ष 12 जनवरी को महान विचारक स्वामी विवेकानन्द की जयन्ती के रूप में मनाया जाता है। 2025 में स्वामी विवेकानन्द की 162वीं जयन्ती है। स्वामी विवेकानन्द का जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता में हुआ था। उनके बचपन का नाम नरेंद्र नाथ दत्त था।स्वामी विवेकानन्द ने छोटी उम्र से ही “उच्च विचार और सादा जीवन” का सार अपना लिया था। उन्होंने अपने गुरु रामकृष्ण परमहंस के प्रमुख शिष्य के रूप में रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं अपने पूरे जीवन में उन्होंने खुद को भारतीय संस्कृति के मूल मूल्यों के प्रसार के लिए समर्पित कर दिया।  मानवता की सेवा और परोपकार के लिए समर्पित स्वामी विवेकानंद ने 1897 में कोलकाता में रामकृष्ण मिशन की स्थापना की। इसके बाद, 1898 में उन्होंने हुगली नदी के किनारे...

मंगलमयी नववर्ष- श्रीमती रेखा पुरोहित

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला, हिम मन मन्थन में "आँग्ल नववर्ष 2025" के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है, जनपद- रुद्रप्रयाग से शिक्षिका बहिन रेखा पुरोहित जी द्वारा रचित कविता-:      ‌‌‌   ‌‌‌‌ ‌‌‌  ‌‌  🙏🏾🕉️✍️ ‌‌मंगलमयी नववर्ष नूतन नव यह वर्ष है, आया ले उल्लास। खुलकर ये जीवन जिएंँ, भर मन में फिर आस।।1।। जीवन नव संकल्प लें, छोड़ पुरानी बात। आयेगा रवि ले खुशी, बीते काली रात।।2।। सारा जग खुश हो रहा, मना रहा नववर्ष। खुशियांँ सबकी देखकर, होता मन में हर्ष।।3।। दिवस, दिनांक बदल गए, बदल गया है साल। अपने हर संकल्प को, जीवन में अब ढाल।।4।। छोड़ो! क्या अब तक हुआ, नई बना लें रीत। करके हम कोशिश नई, अब रच लें नवगीत।।5।। क्षमा दया का भाव भर, दूर करें हर त्राण। अपने हर इक कर्म से, करें जगत कल्याण।।6।। दुख चिन्ता सबकी मिटे, कष्ट रहें सब दूर। आंँखों में सबकी सदा, खुशियांँ हों भरपूर।।7।।  सबके ही घर द्वार में , भरे रहें भंडार। उपजाऊ धरती रहे,  पेट भरे संसार।।।8।। सुखमय ये नववर्ष हो, बढ़े सभी में प्यार। राग द्वेष सब दूर हों, हो न कहीं तकरार।।9।। अवल...
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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला, हिम मन मन्थन में "आँग्ल नववर्ष 2025" के शुभारम्भ की "मधुर बेला" पर प्रस्तुत है, जनपद- चमोली से शिक्षिका बहिन सरोज डिमरी जी द्वारा रचित कविता-:      ‌‌‌   ‌‌‌‌ ‌‌‌  ‌‌   ‌‌ 🙏🏾🕉️🙏 ✍️ नव वर्ष 2025 मंगलमय हो  नव-नूतन की नयी बधाई, मनमोहक ठण्ड है छायी। ओंस, कोहरा, पाला, बर्फ भी, दिसम्बर माह की करते विदाई।।  साल महीने चलते रहते, जवानी के दिन भी ऐसे हैं ढलते। कोई नहीं अजर, अमर रहता,  सब अपने किस्से कहानी कहते।।  सूरज, चन्दा दोनों को देखो!  बारी-बारी फेरे लगाते। एक उदय एक अस्ताचल देखो!  शाश्वत प्रकृति के नियम सिखाते।।  दशा और दिशायें चलती,  पृथ्वी को गतिशील बनाती। आओ करें अनुसन्धान नया,  इतिहास की नयीं कहानी बनती।।  अवनि और अन्तरिक्ष बना है, पवन पानी सब संसार बना है। अथवा, शायद, किन्तु, परन्तु से,  प्यारा सा व्यवहार बना है।।   लाभ-हानि, सुख-दु:ख समय के,   मन ही मन के भाव बनाएँ।  बुरे विचार हटाकर देखो,  आशा के कुछ दीप जलाएं...