गणतन्त्र दिवस - श्री गोविन्द बल्लभ भट्ट
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में "गणतन्त्र दिवस राष्ट्रीय पावन पर्व के परिप्रेक्ष्य में " प्रस्तुत है जनपद पिथौरागढ़ से शिक्षक साथी श्री गोविन्द बल्लभ भट्ट जी द्वारा रचित कविता-: 🙏🏾✍️🇮🇳गणतन्त्र दिवस बहुत बड़े संघर्षो की गाथा का, लेखा एक बनवाया था। छब्बीस जनवरी उन्नीस सौ पचास को, संविधान लागू करवाया था।। मेरा देश भारत महान है, ये ही तो गणतन्त्र की शान है। विश्व के सभी देशों में लिखित, हमारा सबसे बड़ा संविधान है।। जाति, धर्म का भेद न जिसमें, नहीं ऊँच-नीच का भेद इसमें समान अधिकार यहाँ सभी के, मिला जीने का हक समान इसमें।। दासता की जंजीरों को काट, स्वतन्त्रता जब हमने पाई थी। देश को एक सूत्र में बांँधने को, संविधान की रचना करवाई थी।। यह गौरव की गाथा है, गर्व से उठा भारत माँ का माथा है। विजय पथ पर जब चलती सेना, स्वयं पर गर्व करती भारत माता है।। विविध संस्कृतियाँ रंग बिखेरती, भारत की एकता का द्योतक है। पर्व पुनीत गणतन्त्र दिवस, हर मन को यह भाता है।। आत्म-मन्थन करना हम सबको, भारत का मान-सम्मान बढ़ाना है। गणतन्त्र के इस महान तीज पर, हम सब ने यह संकल्प लेना है...