संदेश

सितंबर, 2024 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

हिन्दी हो तुम-श्रीमती सुशीला थपलियाल

चित्र
 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला, हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है, हिन्दी की महत्ता को समझाती हुई जनपद-रुद्रप्रयाग से शिक्षिका बहिन सुशीला थपलियाल जी द्वारा रचित कविता-: 🙏📝हिन्दी हो तुम भावनाओं को जगाये वो हो तुम, स्तब्धता को जो मिटाये वो हो तुम। शूरवीरों को ललकारे वो हो तुम, हृदय में नव सृजन भर दे वो हो तुम।। वेदों की वाणी में जो बसी हो वो  तुम, पुराणों की गाथा जिसने लिखी वो हो तुम। सत्यमेव जयते में विरचित वो हो तुम, वीर गाथाओं को सहेजती वो हो तुम।। देश का इतिहास कहती वो हो तुम, मन के उद्दवेगों में बहती वो हो तुम। अश्रु स्वर को जो सहलाये वो हो तुम, कवि की कल्पना में समाये वो हो तुम। हृदय में अनुराग भरती वो हो तुम, दिव्य स्वर में जो निकलती वो हो तुम। शहीदों की गाथा जो विरचती वो हो तुम, वीरगाथाओं को गाती वो हो तुम।। कल्पनाओं में भटकती वो हो तुम, स्वप्न को साकार करती वो हो तुम। हृदय जो झंकृत करे वो हो तुम, उल्लास जीवन में भरे वो हो तुम।। 🙏🏾रचना-:  सुशीला थपलियाल (प्र०अ०)  रा० प्रा० वि० पपडासू  वि० ख०- जखोली, रुद्रप्रयाग।       ‌‌‌‌...

ज्ञान पुंँज शिक्षक-डाॅ० सुमन विष्ट जी

चित्र
 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला, हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है गुरु की महत्ता को समझाती हुई जनपद- अल्मोड़ा से शिक्षिका बहिन डाॅ० सुमन विष्ट जी द्वारा रचित कविता-: 🙏🕉️🙏📝ज्ञान पुँज शिक्षक अपने ज्ञान की ज्योति से,  जो सारे जग को महकाते हैं, वही तो शिक्षक कहलाते हैं। जाड़ा,गर्मी या हो बरसात, जो हर पल अपना फर्ज निभाते हैं, वही तो शिक्षक कहलाते हैं।। बच्चों के संग बच्चा बनकर,  बड़ों को भी दुनियादारी सिखाते हैं, वही तो शिक्षक कहलाते हैं। ज्ञान की जो बातें बताते,  सत्य के पथ पर चलना सिखलाते हैं, वही तो शिक्षक कहलाते हैं।। धर्म-अधर्म की बात बताते,  विज्ञान के प्रयोग कराते हैं,  वही तो शिक्षक कहलाते हैं। अच्छे-बुरे की पहचान कराकर,   अधिकार और कर्तव्य हमें समझाते हैं,  वही तो शिक्षक कहलाते हैं।। स्थिति प्रतिकूल हो या अनुकूल, जीवन पथ पर आगे बढ़ना सिखलाते हैं, वही तो शिक्षक कहलाते हैं। ज्ञान, बुद्धि ,विवेक और साहस की, सौगात जो हमको दे जाते हैं, वही तो शिक्षक कहलाते हैं।। जीवन पथ पर प्रेरणा स्रोत बनकर, जो हमारा मार्ग आलोकित कर जाते हैं,  वह...

हिन्दी अपनी पहचान- श्रीमती अनिता काला

चित्र
 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला, हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है हिन्दी भाषा की महत्ता को बताते हुए जनपद- रुद्रप्रयाग से शिक्षिका बहिन श्रीमती अनिता काला जी द्वारा रचित कविता-: 🙏🏾✍️हिन्दी अपनी पहचान हिन्दी प्यारी है हमें, भारत मांँ की शान। हिन्दी दिवस मना रहे, है हमको अभिमान।। ये भाषा मीठी लगे, ज्यों मिसरी की खान। ये सबको है जोड़ती, अपनी है पहचान।। अंग्रेजी के सामने, इसे बचाओ आज। गर्वित होते हम सदा, करना इस पर नाज।। कितने ग्रन्थ लिखे गए, रचे कई इतिहास। हिन्दी भाषा प्रेम की, लगती सबसे खास।। आज शपत ये लीजिए, देना इसको मान। वरना हिन्दी बिन कभी, नहीं मिले सम्मान।। तुलसी सूर कबीर ने, भरदी इसमें जान। भाषा ये आगे बढ़े, नित रहे स्वाभिमान।। 🙏रचना-: अनिता काला (प्र०अ०) रा० प्रा० वि० जुंटाई, बच्छणस्यूंँ,  वि० ख०-  अगस्त्यमुनि, रुद्रप्रयाग। 🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

हिन्दी का सम्मान- श्रीमती उषा गौड़

चित्र
 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला, हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है हिन्दी भाषा की महत्ता को बताते हुए जनपद- देहरादून से शिक्षिका बहिन श्रीमती उषा गौड़ जी द्वारा रचित कविता-: 🙏🏾✍️हिन्दी का सम्मान  हिन्दी का विकास करके स्वाभिमान अपना जगाएंँ। मातृभाषा है यह हमारी, पहचान इसकी जग से कराएंँ।। हिन्दी को देकर के मान, देना अन्तरराष्ट्रीय पहचान। हिन्दी से है हमारी शान, हिन्दी, हिन्द, हिन्दुस्तान।। अंग्रेजी से न समझो शान, हिन्दी है हमारी आन।  भूलो ना यह बात तुम, अंग्रेजी ने बनाया गुलाम।। बस चौदह सितम्बर को ही नहीं, हो हर पल, हर दिन इसका मान।  पहचाने है धरती सारी, राष्ट्रभाषा का करो सम्मान।। है उस दूब की तरह हिन्दी, लाख उखाड़ लो पर है जिद्दी। उग आती जड़ें प्रस्फुटित, हिन्दी सदा ही रहे पल्लवित।। 🙏रचना-:  उषा गौड (स०अ०)  रा० उ० प्रा० वि० डोईवाला ब्लाक - डोईवाला, देहरादून 🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

गुरु की महिमा- श्रीमती अनिता काला

चित्र
 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला, हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है गुरु की महत्ता पर आधारित  जनपद रुद्रप्रयाग से शिक्षिका बहिन श्रीमती अनिता काला जी द्वारा रचित कविता-: 🙏🏾🕉️🙏🏾✍️गुरु की महिमा चौपाई छन्द  गुरु ब्रह्मा, विष्णु हैं हमारे, गुरु शिव शंकर जैसे प्यारे। गुरु जीवन का पाठ पढ़ाते, सत पथ चलना ये सिखलाते।।  गुरु बिन ज्ञान नहीं मिल पाए, गुरु बिन मानव भटका जाए। गुरु पथ दर्शक भाग्य विधाता, गहरा गुरु व शिष्य का नाता।। गुरु शिक्षा की ज्योति जगाते, ज्ञान पुंज गुरुवर कहलाते। कभी क्रोध भी नहीं दिखाया, आखर पढ़ना हमें सिखाया।। गुरु की नित मैं महिमा गाऊॅं, गुरु चरणों में शीश झुकाऊंँ। गुरु प्रणाम मेरा स्वीकारो,  मेरे घर में कभी पधारो।। मुझको मिला आपसे जो भी, करूंँ दान मैं भी नित वो ही। ज्ञान की राह मैं चल पाऊंँ, नवल ज्ञान की ज्योति जलाऊंँ।। 🙏 रचना-:  अनिता काला (प्र०अ०)  राजकीय प्राथमिक विद्यालय जुंटाई,  बच्छणस्यूंँ,  विकास खण्ड-  अगस्त्यमुनि,  जनपद- रुद्रप्रयाग। 🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

14 सितम्बर, हिन्दी दिवस- श्रीमती सरिता भट्ट

चित्र
 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला, हिम मन मन्थन में हिन्दी दिवस पावन पर्व पर प्रस्तुत है आज जनपद रुद्रप्रयाग से शिक्षिका बहन श्रीमती सरिता भट्ट जी द्वारा रचित कविता-: 🙏🏾✍️14 सितम्बर, हिन्दी दिवस भारत की शान है हिन्दी, भारत की पहचान है हिन्दी। शब्दों का जादू है हिन्दी, वर्णों की पहचान है हिन्दी।। जन-जन की दुलारी हिन्दी, हर्षित मन को करती हिन्दी। कश्मीर से कन्याकुमारी, हिन्दी है संस्कृति हमारी।। हम सबकी है प्यारी हिन्दी, सम्मान की अधिकारी हिन्दी। सबसे सुन्दर सबसे न्यारी, हिन्दी है राष्ट्रभाषा हमारी।। भाषा हिन्दी मेरी अनमोल,  बड़े ही मीठे इसके बोल। बच्चन की मधुशाला हिन्दी, पन्त, निराला की पहचान है हिन्दी।। महादेवी वर्मा के स्वर हैं हिन्दी, प्रेमचन्द की लेखनी हिन्दी। सूर, तुलसी, मीरा के पद हैं हिन्दी, रसखान, कबीर के दोहे हैं हिन्दी।। देश की हर तोतली आवाज हिन्दी, हमारी अस्मिता का मान है हिन्दी। हिन्दी मेरी है अनमोल, बड़े ही मीठे इसके बोल।। 🙏रचना-: सरिता भट्ट (प्र०अ०) रा० प्रा० वि० फलेई  विकासखण्ड- अगस्त्यमुनि जनपद- रुद्रप्रयाग 🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

शिक्षक दिवस - श्रीमती देवेश्वरी सेमवाल

चित्र
 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला, हिम मन मन्थन में शिक्षक दिवस पावन पर्व के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है आज जनपद रुद्रप्रयाग से शिक्षिका बहन श्रीमती देवेश्वरी सेमवाल जी द्वारा रचित कविता-: 🙏🏾🕉️🙏✍️शिक्षक दिवस हमारे मन की व्यथा समझते, मन में दृढ़ संकल्प हैं भरते। हमारी सच्ची पहचान कराते, सच्चे गुरु हैं वे कहलाते।। अच्छे व बुरे में भेद बताते, सच्चा पथ हैं हमें दिखाते। सच्चा मार्गदर्शन जो कराते, सच्चे गुरु हैं वे कहलाते।। बालमन का हैं आकलन करते, हमारे मन की बात को सुनते। कलम पकड़ना हमें सिखाते, सच्चे गुरु हैं वे कहलाते।। आदर्शता का पाठ पढ़ाते, अज्ञानता को हैं सदा मिटाते। ज्ञानरूपी दीप हैं जलाते, सच्चे गुरु हैं वे कहलाते।। हर बाधा, हर पीड़ा को हरते, जीवन लक्ष्य सुदृढ़ हैं बनाते। जीने की सच्ची राह हैं दिखाते, सच्चे गुरु हैं वे कहलाते।। आशावादी हमें बनाते, हर पल नयी राह दिखलाते। जीवन को सुदृढ़ हैं बनाते, सच्चे गुरु हैं वे कहलाते।। 🙏 रचना   देवेश्वरी सेमवाल (स०अ०)  रा० उ० प्रा० वि० कान्दी,  वि० ख०- अगस्त्यमुनि, रुद्रप्रयाग। 🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराख...