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नवंबर, 2025 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

गौचर मेला-श्री सरोज डिमरी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला  "हिम मन मन्थन" में कृषि एवं औद्योगिक विकास मेला गौचर के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है, आज  जनपद चमोली गढ़वाल से शिक्षिका बहिन श्रीमती सरोज डिमरी जी द्वारा रचित कविता-: 🙏✍️गौचर मेला  14 नवम्बर बाल दिवस से,  मेले का आगाज होता।  20 नवम्बर 7 दिनों तक,  साप्ताहिक यह आयोजन होता।।  जनपद चमोली की हृदय स्थली,  गौचर मैदान में मेले की बयार चली।  ऐतिहासिक धरोहर के विकास के साथ बढ़ी,  सांस्कृतिक विरासत है हमारी, देखो पली-बढ़ी।।  प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर,  औद्योगिक विकास की विरासत। अपनत्व का प्रतीक है,  मन का भाव उद्दीप्त है।।  गौचर मेला जनमानस पर्यटकों का सिरमौर है,  चाक चौबन्द व्यवस्था में मौसम के अनुरूप है। विभिन्न विभागों, समूहों और उद्यमियों के, सुन्दर-सुन्दर स्टॉल सजे हैं।।  विभिन्न उत्पादों और हस्तशिल्पों की, सुन्दर-सुन्दर प्रदर्शनियाँ लगी हैं। प्रतिदिन आयोजित सांस्कृतिक संध्या में, बढ़ चढ़कर के कलाकार भाग लेते हैं।।  स्थानीय से राष्ट्रीय स्तर के,  कलाकार...

बाल मन - डाॅ० विनीता खाती

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला  "हिम मन मन्थन" में बाल दिवस के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है, आज  जनपद अल्मोड़ा से शिक्षिका बहिन डाॅ० विनीता खाती द्वारा रचित कविता-: 🙏✍️🌹बाल मन  तुम्हारा फूलों सा ये मन, तुम्हारा नाजुक सा ये मन। पल भर में मुरझा जाता है,  कुछ पल में फिर खिल जाता है।।  कभी अकड़ कर गुस्सा दिखाते, कभी झगड़ कर बातें मनाते। पल-पल में तुम रूठ जाते हो, फिर जल्दी मान भी जाते हो।।  घर का खाना तुम्हें न भाता,  बाहर का खाना बहुत सुहाता।  ऑर्डर पर जो आ जाता,  वहीं तुम्हें बहुत लुभाता।।  कितनी सुन्दर तुम्हारी दुनिया!  खुशी, मौज, मस्ती की पुड़िया। खेल-मेल में तुम हो रमते रहते,  तुम्हें घुमाये समय का पहिया।।    हर रोज मांगें तुम्हारी बढ़ती,  जब वो पूरी  नहीं हो पाती। तब तक याद मांँ तुमको आती, मांँ सब कुछ पूरा कर जाती।। 🙏रचना-: डॉ० विनीता खाती (स०अ०)  राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय गाड़ी,  विकास ख‌ण्ड- ताड़ीखेत, अल्मोड़ा 🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

अपना उत्तराखण्ड- श्रीमती पुष्पा बहुगुणा जी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला  "हिम मन मन्थन" में उत्तराखण्ड स्थापना दिवस के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है, आज  जनपद टिहरी गढ़वाल से शिक्षिका बहिन श्रीमती पुष्पा बहुगुणा जी द्वारा रचित कविता-: 🙏✍️अपना उत्तराखण्ड पच्चीस बसन्तों का सफर सुहाना, वीरों की धरती देवों का ठिकाना। गूँज उठे फिर वीर गाथाएँ सारी, जय हो तुम्हारी! जय हो तुम्हारी! तुमसे ही फूले फागुन के रंग, तुमसे ही महके हर इक अंग। गंगोत्री की धारा पावन है, केदार धाम तुम्हारा सावन है।। नैनी झील की झिलमिल झाँकी, मुनि की रेती फूलों की वादी। हर शिखर गगन से करता संवाद, 'जय उत्तराखण्ड' अमर है नाद।। शौर्य, संस्कृति, शालीनता का मान, स्त्री-पुरुष दोनों में अद्भुत सम्मान। गाँव-गाँव में शिक्षा की ज्योति, मेहनत, ममत्व, मातृभूमि की भक्ति।। रजत जयन्ती पर प्रण ये लेंगे, विकास की राह स्वयं चुनेंगे। न भ्रष्टता, न भेदभाव की छाया, देव भूमि का गौरव सदा लहराया।। चलो फिर गाएँ मिलकर आज, उत्तराखण्ड तेरा उज्ज्वल साज। जय-जय उत्तराखण्ड कहें गर्व से! तेरे पुत्र-पुत्री कहें गदगद स्वर से।। 🙏रचना-: पुष्पा बहुगुणा (प्र०अ०)   रा...

जवाहर लाल नेहरू- श्रीमती सुशीला थपलियाल

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला  "हिम मन मन्थन" में बाल दिवस पावन पर्व  के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है, आज  जनपद रुद्रप्रयाग से शिक्षिका बहिन श्रीमती सुशीला थपलियाल जी द्वारा रचित कविता-: ‌‌‌‌  🙏✍️जवाहर लाल नेहरू मोती लाल नेहरू जी के घर,  एक विभूति ने जन्म लिया।  पिता के सानिध्य में उनका नाम जवाहर लाल पडा़।।  ‌‌‌           ‌‌ 14 नबम्बर 1889 में,  इलाहाबाद में पैदा हुए।  बच्चों के अति प्रिय थे वो,  चाचा नेहरू कहे जाने लगे।।  स्वाधीनता की मांँग हेतु,  1929 में तिरंगा फैराया।  आगे चलकर इस विभूति ने,  भारत का मान बढ़ाया।।  1942 से 1946 तक,  उनको कारावास मिला।  वहाँ पर रहकर भी तुमने कई रचनाओं को जन्म दिया।।  गुटनिरपेक्ष आन्दोलन के सूत्रधार, भारत की खोज के रचनाकार।  भारत के प्रथम प्रधानमंत्री बने,  स्वतन्त्रता का स्वप्न किया साकार।।  माता स्वरूपरानी थी उनकी,  पत्नी कमला नेहरू जी।  पुत्री रत्न इन्दिरा जी को पाया,  जो प्रथम महिला प...

अपना उत्तराखण्ड- डाॅ० विनीता खाती

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला  "हिम मन मन्थन" में उत्तराखण्ड स्थापना दिवस पावन पर्व  के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है, आज  जनपद अल्मोड़ा से शिक्षिका बहिन श्रीमती विनीता खाती जी द्वारा रचित कविता-: 🙏✍️अपना उत्तराखण्ड  धन्य है मेरे उत्तराखण्ड की धरती,  श्रद्धा यहांँ कण-कण में बसती।  देश भक्ति मिट्टी से महकती, प्रेम भावना हर दिलों में रहती।।  दिव्य पर्वत राज हिमालय,  को धारण करें इसका शीश।  चार धाम यहांँ विराजे,  देते हैं हमको आशीष।।   गंगा, यमुना, सरयू, काली,  से बना इसका आंँचल।  जो सींचे यहांँ की धरती,  देकर पावन शीतल जल।।  रीति-रिवाज परम्पराओं की, है यहांँ खनक। कौतिक, मेले, त्योहारों की, है अजब रौनक।।  सबसे निराली सबसे अनूठी,  संस्कृति है यहांँ की। नित नए रंगों को लेकर, सारे जग में महकती।।  केदार खण्ड और मानस खण्ड, नाम से है भूमि वर्णित। अति प्राचीन पुराणों में, महिमा इसकी है लिखित।।  महापुरुषों की है ये जननी, देवों की पावन भूमि। मेरा उत्तराखण्ड, मेरी जन्मभूमि, मेरी कर्म...

ईगास बग्वाळ- श्री मनोज घिल्ड़ियाल

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला  "हिम मन मन्थन" में ईगास बग्वाळ पावन पर्व पर  प्रस्तुत है, आज  जनपद पौड़ी गढ़वाल से शिक्षक साथी श्री मनोज घिल्ड़ियाल जी द्वारा रचित कविता-: 🙏✍️ईगास-बग्वाळ  रामचंद्रजी जब रावण मारिक, अयोध्या एन लंका जीतिक। तब वखा मनख्यूंन सुख सन्ति आणैकि, खुशि मनै छै द्यू बत्ति जलैकि।। गढ़देश पौंछद-पौंछद यु रैबारा, दिन हौरि बीत गिन ग्यारा। इलै ए खुणै ईगास बुले ग्या, डांडि कांठ्यूं ईगास बग्वाळ तब मनै ग्या।।  ए दिन गोर बछुरों खुट्टा ध्वेकि, कपाल फर हल्दु चौंल पिंठै कैकि। सिंगों फर तेल लगैकि, ऊंका गालम माला पैरंदी।।  क्वादु झुंगरै ढिंडा खवाकि, गौड़ि-बाछी पूजा कैकि। स्वाला, भूड़ा, पक्वड़ा पकैकि, ख्वाल द्वारम बंटे जैंदी।।  कुंलै लखुड़ रस्सा फर बांध जलैकि, तब मुण्डमाथ वैथैं घुमैकि। भैलो नाच गान कैकि ख्यलदीं, इन कैकि ईगास बग्वाळ मनदी।।  🙏रचना-: मनोज घिल्डियाल (स०अ०) रा० प्रा० वि० गाड़ियूंँ  प्रखण्ड- रिखणीखाल, पौड़ी गढ़वाल 🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड