गौचर मेला-श्री सरोज डिमरी
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला "हिम मन मन्थन" में कृषि एवं औद्योगिक विकास मेला गौचर के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है, आज जनपद चमोली गढ़वाल से शिक्षिका बहिन श्रीमती सरोज डिमरी जी द्वारा रचित कविता-: 🙏✍️गौचर मेला 14 नवम्बर बाल दिवस से, मेले का आगाज होता। 20 नवम्बर 7 दिनों तक, साप्ताहिक यह आयोजन होता।। जनपद चमोली की हृदय स्थली, गौचर मैदान में मेले की बयार चली। ऐतिहासिक धरोहर के विकास के साथ बढ़ी, सांस्कृतिक विरासत है हमारी, देखो पली-बढ़ी।। प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर, औद्योगिक विकास की विरासत। अपनत्व का प्रतीक है, मन का भाव उद्दीप्त है।। गौचर मेला जनमानस पर्यटकों का सिरमौर है, चाक चौबन्द व्यवस्था में मौसम के अनुरूप है। विभिन्न विभागों, समूहों और उद्यमियों के, सुन्दर-सुन्दर स्टॉल सजे हैं।। विभिन्न उत्पादों और हस्तशिल्पों की, सुन्दर-सुन्दर प्रदर्शनियाँ लगी हैं। प्रतिदिन आयोजित सांस्कृतिक संध्या में, बढ़ चढ़कर के कलाकार भाग लेते हैं।। स्थानीय से राष्ट्रीय स्तर के, कलाकार...