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लालच का जाल-

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला, हिम मन मन्थन में  प्रस्तुत है आज जनपद- अल्मोड़ा से शिक्षक साथी श्री ख्याली दत्त जी द्वारा रचित कविता-: 🙏लालच का जाल इतना लालच ठीक नहीं मन, तुझे चाहिए बस रोटी दो। गिने-चुने दिन तुझे मिले हैं, इस धरती पर जीने को।। जिस दिन धरती पर आया तू, कितना भोला भाला था। बिन बाती और तेल बिना, घर में गजब उजाला था।। अवगुण रहित सुन्दर तेरा मन, सबका दुःख हर लेता था। अपनी नटखट लीलाओं से, मन प्रफुल्लित कर देता था।। आज लालच में पड़कर तूने, माया जोड़ना शुरू किया। व्यर्थ की अन्धी दौड़-भाग में, अपनों को खुद से दूर किया।। तेरे दाना-पानी का हिसाब, सभी उसने समेटे रखा है। सारे जग का पालनहार, तुझ पर नजर गड़ाए बैठा है।। अब लालच से बाहर आकर, अपने को निर्मल कर ले। धन-दौलत की चाह त्याग, अपने को शीतल कर ले।। 🙏 रचना:-                ख्याली दत्त (स०अ०) रा० प्रा० वि० सकनणा वि० ख०- सल्ट, अल्मोड़ा 🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

गुरु की महिमा- श्रीमती सरिता भट्ट

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📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला, हिम मन मन्थन में "गुरु की महिमा को बताते हुए प्रस्तुत है आज जनपद- रुद्रप्रयाग गढ़वाल से शिक्षिका बहन श्रीमती सरिता भट्ट जी द्वारा रचित कविता-: 🙏🏾🕉️ 🙏 ✍️गुरु की महिमा गुरु चरणों में आनन्द अपार, गुरु ज्ञान के हैं भण्डार। गुरु करें भक्तों का उद्धार, गुरु चरणों में है आनन्द अपार।। गुरु चरणों में जो झुकता है, होता है वो किस्मत वाला। मेरा-तेरा क्यों करता है! गुरु बिन कोई न तरता है।। लगी है किस्ती उसकी किनारे , आये जो गुरु द्वार पे। गुरु चरणों की महिमा भारी, गुरु जैसा नहीं कोई हितकारी।। उनको मिलता ज्ञान निराला, डेरा जो गुरु द्वार पर डाले। जिस पर निराली नजरें डाली, खुलते उसके भाग्य के ताले।। बिन मांँगे सब कुछ मिलता है, जो गुरु द्वार पर आता है। गुरुजी जिनके मन में बसते, कभी नहीं वह जग में फंँसते।। हो जाता है निहाल वो, गुरु द्वार पर आता जो।  गुरु जी से कभी दूर ना होना, इनके बिना है जीवन सूना। पूरी होती सारी मुरादें, आये जो गुरु द्वार पे। जग में आकर सबको सँवारे, नाम ही इनका भव से तारे।। शरणागत जो गुरु के आये, पार वो इस भव से पाए। निश दिन गुरु का ध...

गुरु की महिमा- श्रीमती उषा सागर

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला, हिम मन मन्थन में "गुरु पूर्णिमा" के सुअवसर पर प्रस्तुत है आज जनपद- पौड़ी गढ़वाल से शिक्षिका बहन श्रीमती उषा सागर जी द्वारा रचित कविता-: 🙏🏾🕉️🙏🏾✍️गुरु की महिमा गुरु की महिमा सबसे महान, नित-नित पूजे सारा जहान। मात-पिता, गुरु, देव समान, सबसे ऊंँचा है उनका स्थान।।  अक्षर ज्ञान हमें कराएंँ, नयी-नयी बातें बतलाएंँ। ज्ञान के दाता गुरु महान, नित नित पूजे सारा जहान।। गुरु ज्ञान के हैं भण्डार,  देते ज्ञान हमें अपार। उनका हृदय बड़ा विशाल, निष्ठा, संयम, नेतृत्व बेमिसाल।।  कच्ची माटी को देते हैं, नये-नये सांँचों में ढाल। उनके हाथों की कला महान, नित-नित पूजे सारा जहान।।  जीवन में भर देते हैं वे, सद्गुण और ज्ञान अपार। अज्ञानता का अंधकार मिटा, करते जीवन का उद्धार।।  शास्त्र, साहित्य, गुण, धर्म, काव्य, ग्रन्थ और पुराण। नये-नये आयाम देकर, करें भविष्य का निर्माण।।  सदा उनका ही हो गुण गान, नित-नित पूजे सारा जहान ।। गुरु से बड़ा न कोई हितैषी, गुरु बिना शिक्षा कैसे होती। गुरु जीवन की आधारशिला, उनसे ही ज्ञान अपार मिला।।  गुरु...