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मई, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

विश्व तम्बाकू निषेध दिवस-श्रीमती उषा गौड़

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन  में  तम्बाकू निषेध दिवस पर प्रस्तुत है जनपद देहरादून से शिक्षिका बहिन श्रीमती उषा गौड़ जी की कविता: विश्व तम्बाकू दिवस विश्व तम्बाकू निषेध दिवस मनायेंगे, 31मई को तम्बाकू रहित विश्व बनायेंगे। शपथ हम सब लेंगें और दिलायेंगे, विश्व को स्वस्थ सब मिल बनायेंगे।। तम्बाकू का सेवन और धूम्रपान, कई बीमारियों के थामे हैं दामन। दुनिया को जागरूक कर ये है बतलाना, धूम्रपान को सबसे है छुड़वाना ।। तम्बाकू है केंसर का जन्मदाता, फिर क्यों तुम इसकी आदत हो डालते। जब इस बीमारी की चपेट में आते, फिर सारे जीवन हैं पछताते।। मुहँ के केंसर को दावत मत दो, बहुत सी उम्मीदों को टूटने मत दो। अपनों की खुशियों को लौटा दो, संकल्प आज पूरा तुम कर दो।।    उषा गौड़ ( स० अ० ) रा० उ० प्रा०वि०-डोईवाला      ब्लॉक -डोईवाला     जनपद - देहरादून 🙏संकलन :- टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

तम्बाकू निषेध दिवस - श्रीमती आभा भैंसोड़ा

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला  हिम मन मन्थन  में  तम्बाकू निषेध दिवस पर प्रस्तुत है जनपद नैनीताल से शिक्षिका बहिन श्रीमती आभा भैंसोड़ाजी की कविता: तम्बाकू निषेध दिवस सन 1987 से शुरुआत, तम्बाकू निषेध दिवस खास। 31मई को मनाया जाएगा, डब्ल्यू० एच०ओ० ने रखी ये बात।। विश्व में लाखों मौतें होती, तम्बाकू खाकर जीवन खोती। असमय मौत से बचे रहें लोग, जागरूकता अभियान चले रोज।। तम्बाकू में मौजूद है निकोटीन,  घातक, जीवन कर देता क्षीण। तत्व कई मौजूद इसमें जो होते, कैंसर सी घातक बीमारी कराते।। मुंँह, गला,  श्वास और फेफड़ा, तम्बाकू सेवन से हो जाता है मरा। प्रति वर्ष टोबैको की कुछ होती थीम, 'छोड़ने के लिए प्रतिबद्ध', है इस वर्ष थीम।। डॉ० आभा सिंह भैसोड़ा (स०अ०) रा० प्रा० वि० देवलचौड़ ब्लॉक-हल्द्वानी, नैनीताल 🙏संकलन :-टीम मिशन शिक्षण संवाद गढ़वाल-कुमाऊँ, उत्तराखण्ड

वो पुरानी किताब-श्रीमती दीक्षा जोशी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में  प्रस्तुत है जनपद नैनीताल से से शिक्षिका बहिन श्रीमती दीक्षा जोशी जी की कविता: वो पुरानी किताब वो पुरानी किताब,  जैसे जिन्न का चिराग।  जिसके अक्षरों को पहचान,  मैंने शब्द पढ़े।। जिसके शब्दों को मिलाकर, मैंने वाक्य गढ़े। जिसके वाक्यों को मिलाया , और कविताएंँ पढ़ीं।।  जिसकी कविताओं को पढ़कर , गुनगुनाया मैंने। वो पुरानी किताब, जैसे जिन्न का चिराग।।  जिसकी कहानियों को पढ़कर, मैंने खुद को जिया। जिसमें चांँद का हठ देखा, देखी मुन्नी को गुड़िया।।  गुब्बारे रंगीन थे कविता में,  नन्हीं लाल चुन्नी थी कहानी में। वो पुरानी किताब,  जैसे जिन्न का चिराग।  जिसे पढ़कर मैं बड़ी हुई कक्षाओं की सीढियांँ चढ़ी।।  बड़ी होकर डिग्रियाँ भी लीं,  जिसके कारण मैं आज पढ़ाती हूंँ वहीं।  वो पुरानी किताब, जैसे जिन्न का चिराग।।       🙏रचना:-दीक्षा जोशी( प्र०अ०)     रा०  प्रा० वि०  चोरगलिया, ब्लॉक-हलद्वानी, नैनीताल 🙏संकलन :-टीम मिशन शिक्षण संवाद गढ़व...

अन्तर्राष्ट्रीय माउण्ट एवरेस्ट दिवस-श्री मनोज घिल्ड़ियाल

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में माउण्ट एवरेस्ट  विजय दिवस पर प्रस्तुत है जनपद पौड़ी गढ़वाल से शिक्षक साथी श्री मनोज घिल्ड़ियाल जी की कविता: अन्तर्राष्ट्रीय माउण्ट  एवरेस्ट दिवस संस्कृत में देवगिरि पर्वत कहते जिसको, नेपाली में सागर माथा कहते उसको, तिब्बत में में पर्वतों की रानी जो है, दुनिया की पर्वत चोटी सबसे ऊँची वो है।। 8848मीटर मानक ऊंँचाई बताया जिसने, नेपाल से चीन तक लोकेशन बताया उसने। वे ब्रिटिश जियोग्राफर जार्ज एवरेस्ट हैं, उन्हीं के नाम पर यह माउण्ट एवरेस्ट है।।   हिलेरी व तेनजिंग नोर्गे सबसे पहले थे वो, 29 मई 1953 को इस चोटी पर चढ़े थे जो, प्रत्येक पर्वतारोही का एवरेस्ट विजय लक्ष्य है,  एवरेस्ट पहुंँचने से पहले उसे न रेस्ट है।।  2008 में एडमण्ड  हिलेरी के निधन के बाद, नेपाल द्वारा उन्हें किया जाता है याद, 29मई  प्रतिवर्ष इस मौके पर कार्यक्रम होते हैं। अन्तर्राष्ट्रीय एवरेस्ट दिवस जिसको कहते हैं।।  मनोज घिल्डियाल (स०अ०) रा० प्रा ०वि०कलीगाड ब्लॉक - रिखणीखाल पौड़ी - गढ़वाल 🙏संकलन :-टीम मिशन शिक्षण संवाद गढ...

अब तो तू मान - श्रीमती बीना कठैत

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में  प्रस्तुत है जनपद टिहरी गढ़वाल से शिक्षिका बहिन श्रीमती बीना कठैत जी की कविता: अब तो तू मान  इस धरा को सबने लूटा, तभी तो उसका गुस्सा फूटा। चारों ओर हाहाकार मचाया, दुनिया को उसने जगाया।। मत कर तू इतना जुल्म इंसान, कि धरा पर नहीं रहेगा तेरा निशान। अब तो तू जाग जा इन्सान, धरा है तुम सब के लिए वरदान।। मानव ने अपनी पूर्ति खातिर, इस धरा पर खूब कहर मचाया। तभी तो उसने अपना रूप दिखाया, कहीं बादल फटे, कहीं बाढ़, कहीं तूफान आया।। धरा ने मानव को फिर जगाया, फिर भी इन्सान बाज न आया। अब तो उसने अपना रौद्र रूप दिखाया, इन्सान को एक बार फिर से जगाया।। चारों ओर महामारी आई, अपने साथ कोरोनावायरस लाई। किसी बहन का भाई गया, किसी माँ बेटा, किसी पत्नी का पति गया, किसी बाप का बेटा।। साँसों के लिए सब तड़प रहे, अपनों के लिए सब बिलख रहे। फिर भी इन्सान बाज न आया, तभी तो प्रकृति ने अपना कहर ढाया।। हे इन्सान अब तो तू जाग, अब न लगा इस धरा पर आग। अब तो तू मान, प्रकृति है हम सब के लिए वरदान।। 🙏रचना:- बीना कठैत (स०अ०)  रा०प्रा०वि० मगरू ब्लॉक-भिल...

आशा के फूल-श्रीमती अमिता क्वीरा

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में  प्रस्तुत है जनपद नैनीताल से शिक्षिका बहिन श्रीमती अमिता क्वीरा जी की कविता: आशा के फूल पीठ में बस्ता संग में साथी, जब हम जाते थे स्कूल। वो भी कितने सुन्दर दिन थे, कहीं पड़ ना जाये उनमें धूल।। ईश वन्दना करके हम सब,  सुन्दर करते थे व्यायाम,  तन और मन को खुश रखने के, पूरे होते सारे आयाम।।  आनन्दम् के अन्तर्गत हम,  करते अनेक गतिविधियाँ,  अन्जाने में ही पा जाते, जीने के कौशल की निधियाँ।। पाठ्यपुस्तकों के माध्यम से, हो जाता विषयों से मेल, सीखने के प्रतिफलों तक पहुँचना, लगता था सब जैसे खेल।।   एक किरण है उम्मीदों की, मन में हैं आशा के फूल, जल्दी ही पीठ में बस्ता होगा, हम सब जायेंगे स्कूल।। श्रीमती अमिता क्वीरा (प्र०अ०) रा०प्रा०वि०अमृतपुर  वि०ख० -भीमताल, जिला-नैनीताल 🙏संकलन :-टीम मिशन शिक्षण संवाद गढ़वाल-कुमाऊँ, उत्तराखण्ड

खुद की सुरक्षा करना -श्रीमती हेमलता बहुगुणा

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📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में  प्रस्तुत है जनपद टिहरी गढ़वाल से  शिक्षिका बहिन श्रीमती बहिन श्रीमती हेमलता बहुगुणा जी की कविता: खुद की सुरक्षा करना  सुनो-सुनो, ऐ! देशवासियों, बात हमारी तुम सुनना। बाहर बढ़ी है लहर कहर की, अपने घर में ही रहना।।  कोरोना का ताण्डव है ये, इससे बचकर ही रहना अपना मिले, मिले पराया, दूरी बनाकर ही रखना।।  सेनीटाईजर, मास्क लगाकर, घर बाहर भी तुम जाना। पड़े जरूरी काम तुम्हारा, तब ही बाहर तुम जाना।।  करोगे तुम खुद की सुरक्षा,  चार सुरक्षित हो जायेंगे। चार के सुरक्षित होने से, घर-गाँव सुरक्षित हो जायेंगे।।  इसी सोच को लेकर ही, आगे कदम बढ़ाना है। घर की रक्षा, देश की रक्षा, सोच का दायरा बढ़ाना है।।  🙏रचना:- हेमलता बहुगुणा ( प्र०अ०) रा०उ० प्रा० वि० सुरसिंहधार ब्लॉक-चम्बा, टिहरी गढ़वाल 🙏संकलन :-टीम मिशन शिक्षण संवाद गढ़वाल-कुमाऊँ, उत्तराखण्ड

'माहौल'-श्री विनोद सुयाल जी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में  प्रस्तुत है जनपद नैनीताल से  शिक्षक साथी श्री  विनोद सुयाल जी की कविता: *माहौल*  शब्द क्यों नि:शब्द से हैं,  आज के माहौल में।  है आग फिर भी क्यों धधकती,  आज के माहौल में।।  क्यों दरख़्तों के साए में,  पंछी नहीं हैं बैठते।  बस आँधियाँ ही आँधियाँ,  क्यों आज के माहौल में।।  क्यों ज़ुल्म बढ़ता जा रहा,  इंसानियत के दौर में,  बस वेदना ही वेदना क्यों,  आज के माहौल में।।  ख्वाहिशें मंजिल को देखो, बढ़ती जाती हैं ये क्यों।  दिल की मुफलिसी को देखो,  आज के माहौल में।। क्यों सिसकती हैं बेटियाँ,  खुद के घिरे माहौल में।  क्यों बन्द हैं किवाड़ सारे,  जुर्म के माहौल में।। तुम भी पले हो आज तो क्या, कमी है माहौल में।  वो भी मरे हैं आज तो,  क्या कमी है माहौल में? तुम जागते हो शान से,  तुम भागते हो शान से।  पर वो क्यों बेचैन हैं,  आज के माहौल में।।  दिल के दरख्तों की दुआ,  वह भी न समझे क्या करें, इस जिस्म क...

राष्ट्र के आधार हैं बच्चे-श्रीमती दुर्गा भट्ट

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में  प्रस्तुत है जनपद रुद्रप्रयाग से  शिक्षिका बहिन श्रीमती दुर्गा भट्ट जी की कविता: 👭राष्ट्र के आधार हैं बच्चे👭 माना कि कोरोना एक महामारी है, किन्तु दृढ़ इच्छाशक्ति कब हारी है।  स्कूल कॉलेज सब बन्द पड़े हैं, लगती एक लाचारी है।। लेकिन प्यारे बच्चों के खातिर, ऑनलाइन पढ़ाई जारी है। प्यारे बच्चों कोरोना से नहीं है डरना, हम सबको डटकर है लड़ना।। बार-बार साबुन से जो धोये हाथ, कोरोना उसके कभी न आए पास। दो गज दूरी से करेंगे बात, खेलेंगे फिर, जीवन भर साथ।। घर के बाहर मास्क एक हथियार, सेनेटाइज करें हाथ बार-बार। चेहरा ना छुएँ बार-बार, यह भी हो सकता है कोरोना का द्वार।। तन-मन की हम करें सफाई, इसी में हम सबकी भलाई। ताजे फल और सब्जियाँ खाएँ,  कोरोना को मार भगाएँ।। करें जो योग हर रोज, रहें जीवन भर निरोग। जब प्यारे बच्चों स्वस्थ रहोगे, तभी तो आप सब मस्त रहोगे।।  शिक्षक का संसार हैं बच्चे, राष्ट्र के आधार हैं बच्चे।। 🙏रचना:- दुर्गा भट्ट (स०अ०)  रा० आ० प्रा० वि० चोपता  ब्लॉक-अगस्त्यमुनि, रुद्रप्रयाग 🙏संकलन :...

बुद्ध पूर्णिमा-श्रीमती ललिता जोशी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में  प्रस्तुत है जनपद पिथौरागढ़ से  शिक्षिका बहिन श्रीमती ललिता जोशी जी की  कविता: *बुद्ध पूर्णिमा*  मास था बैशाख पावन दिन पूर्णिमा, धर्म गा रहा इस दिन की पावन महिमा। इसी दिन जन्मे धरा पर थे प्रबुद्ध, बोधित्व प्राप्त कर बने भगवान बुद्ध।। भारत की पावन धरा पर जन्म लेकर, जीवन के मूल रहस्य किये उजागर। भू पर सामान्य नर का रूप लेकर, बौद्ध धर्म को आध्यात्म की ऊँचाई देकर।। वास्तविक नाम था सिद्धार्थ उत्तम, गौतमी के पालन से कहलाए गौतम। कर्मफल में था अटल विश्वास उनका, दस आज्ञाओं के पालन से था सरोकार उनका।। दूर रहने को कहा हत्या, चोरी,  झूठ और दोषारोपण से। दुराचार, लालच, घृणा, अज्ञान,  निंदा और अपवित्र भाषण से।। महामारी के इस दौर में आओ,  उनका आभार करें। बुद्ध पूर्णिमा के पावन उद्देश्य को,  सब मिलकर साकार करें।। ललिता जोशी (स०अ०) रा० उ० प्रा० वि० पुगौर ब्लॉक-मूनाकोट, पिथौरागढ़ 🙏संकलन :- टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

बुद्ध पूर्णिमा-श्रीमती किरन नैथानी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में  भगवान गौतमबुद्ध जी की पावन जयन्ती पर प्रस्तुत है जनपद पौड़ी गढ़वाल से शिक्षिका बहिन श्रीमती किरन नैथानी जी की कविता: बुद्ध पूर्णिमा भगवान बुद्ध का जन्म दिवस, बुद्ध पूर्णिमा का त्योहार। गौतम बुद्ध के रुप में, विष्णुजी का नौवाँ अवतार।। जग में देख जरा, व्याधि, दुख, मन हुआ बहुत हताश। वैरागी मन रुका न महल में, ज्ञान की करने लगे तलाश।। बोधगया में की कठिन तपस्या,  लगा वहीं पर ध्यान I दिव्य ज्ञान की प्राप्ति से, सिद्धार्थ गौतम बने भगवान।। जीवन चक्र को जाना, जग को समझाया यथार्थ ज्ञान। धर्य, करुणा, सत्य, सेवा, दया, नैतिकता से हटे अज्ञान।। सम्यक्‌ कर्म, सम्यक् वचन, सम्यक् ज्ञान, सम्यक् स्मृति। सम्यक् ध्यान, सम्यक्‌ प्रयास, रहे सबकी सम्यक् दृष्टि।। आत्म अनुभव बिखेरे दुनियाँ में, प्रासंगिक हैं उपदेश, पशुबलि की घोर निन्दा की, अहिंसा का दिया संदेश।। दीक्षा से हो गया, सम्राट अशोक का जीवन परिवर्तित। प्रायश्चित कर बनाया, अपने जीवन को आध्यात्मिक।।  बुद्धपूर्णिमा के दिन हुआ, जन्म, ज्ञान और महाप्रयाण। वैशाख पूर्णिमा पावन दिन है, ...

बुद्ध पूर्णिमा-श्रीमती अनिता नौडियाल

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में  भगवान गौतमबुद्ध जी की पावन जयन्ती पर प्रस्तुत है जनपद टिहरी गढ़वाल से शिक्षिका बहिन श्रीमती अनिता नौडियाल जी की कविता: बुद्ध पूर्णिमा पांँच सौ तिरेसठ ईसा पूर्व,  बैशाख पूर्णिमा आई। धरा -गगन पर शशि ने,   निराली छटा  बिखराई।। राजा शुद्धोधन एवं मायादेवी को,  मानो मिला वरदान। एक सुन्दर बालक जन्मा,   नेपाल में लुम्बिनी स्थान।। अद्भुत आभा चेहरे पर, दिव्य कान्ति लिए। पूरे राजमहल में,  जगमग करने लगे दिये।। इस अद्भुत बालक को,  'सिद्धार्थ' नाम दिया। आगे चलकर 'गौतम बुद्ध',  नाम से प्रसिद्ध हुआ।। राजपाट का मोह छोड़, सत्य की खोज में चले। बोधगया में बैठ गये, एक पीपल के वृक्ष तले।। जहांँ उन्हें सत्य का ज्ञान प्राप्त हुआ था। यह बैशाख पूर्णिमा का ही दिन था।। चार सौ तिरासी ईसा पूर्व,  बैशाख पूर्णिमा का ही दिन। कुशीनगर में निर्वाण प्राप्त किया, अन्तिम सांँसे गिन।। गौतम बुद्ध माने जाते, भगवान विष्णु के नौवें अवतार। इसीलिए इस दिन को,  पवित्र मानता आ रहा संसार।। 🙏रचना:-  अनित...

श्रीदेव सुमन जी-श्रीमती नर्वदा कौशल

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में  श्रीदेव सुमन जी की पावन जयन्ती पर प्रस्तुत है जनपद टिहरी गढ़वाल से शिक्षिका बहिन श्रीमती नर्वदा कौशल जी की कविता: 🙏श्रीदेव सुमन जी टिहरी गढ़वाल की  बमुण्ड पट्टी, जौल ग्राम में जन्म लिया। 25 मई 1916 को जन्म लेकर, गढ़ भूमि को धन्य किया।। माँ तारा देवी, पिता हरिराम के घर, एक अनोखा गुल खिला । माता पिता की पावन सोच से,            नाम श्रीदेव सुमन मिला।। छोटी उम्र 1930 में, नमक सत्याग्रह में भाग लिया। दो हफ्ते के कारावास में दरिन्दों ने, इनको कष्ट बहुत दिया।। जुल्म किया था जनता पर, टिहरी सामन्तशाही ने भारी। नयी फसल हो या दूध दही घी, या हो पैसा देनी पड़ती थी बेगारी।। सामन्तशाही के खिलाफ जब, इन्होंने पहले आवाज उठाई। डाल के कारागार इनको राजा ने, हाथ पैरों में भारी बेड़ी पहनाई।। खाने में रेत और भूसा दिया, पर सुमन तनिक ना डोला। मातृभूमि की रक्षा हेतु उन्होंने, अपने प्राणों को ही तोला।। 84 दिन की भूख हड़ताल से, निकली उनकी जान। 25 जुलाई 1944 को मातृभूमि की, रक्षा हेतु हो गया सुमन बलिदान।। आज उनके...

श्री नृसिंह जयन्ती-श्रीमती सुषमा नेगी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में श्री नृसिंह जयन्ती पावन पर्व पर प्रस्तुत है जनपद देहरादून से  शिक्षिका बहिन श्रीमती सुषमा नेगी जी की कविता: 🙏🕉️श्री नृसिंह जयन्ती विष्णु ने प्रहलाद बचाने को,  लिया नृसिंह अवतार।  आधा नर-आधा सिंह का वेश,  प्रभु ने धरती पर दिया उतार।।  पुत्र रूप में हिरण्यकश्यप ने,  भक्त प्रह्लाद को पाया। पुत्र बना विष्णु भक्त, जो असुर को तनिक न भाया।। पिता के अत्याचारों का,  प्रहलाद विरोध करता था।  उसका विष्णु भक्ति का भाव,  हिरण्यकश्यप को स्वीकार न था।।  भक्ति-भाव मिटाने को,  कई जुल्म प्रहलाद पर ढाये।  हर जुल्म पर पर बच गया,  जब संकट उस पर आये।। क्षुब्ध होकर अग्नि में,  होलिका की गोदी बिठाया।  होलिका तो जल गई,  प्रह्लाद वापस आया।।  हिरण्यकश्यप बोला गुस्से में,  तेरा भगवान कहाँ है? प्रह्लाद बोला विनम्र भाव से,  वो तो सभी जगह है।। इस खम्भे में भी बोलो,  क्या भगवान तुम्हारा है? हाँ सुनकर प्रह्लाद से,  हिरण्यकश्यप फिर से हारा है।।  क्र...

श्री नृसिंह जयन्ती-श्रीमती माया गुरुरानी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में श्री नृसिंह जयन्ती पावन पर्व पर प्रस्तुत है जनपद नैनीताल से से शिक्षिका बहिन श्रीमती माया गुरुरानी जी की कविता: श्री नृसिंह जयन्ती बैशाखी, शुक्ल पक्ष, चतुर्दशी तिथि, नर और सिंह सम आकृति। हरि विष्णु अवतारी चतुर्दशी तिथि, भक्त प्रह्लाद रक्षक, महास्मृति।। हिरण्यकश्यपु नास्तिक संहारक, प्रह्लाद धर्मी प्रिय भक्त बालक। कण-कण में विष्णु का वो सुदर्शक, खम्भ चीर आए प्राणरक्षक।। नित्यकर्म निवृत्त, विष्णु प्रतिमा, संग महालक्ष्मी की उपासना। गंगाजल, पंचमेवा और हो तिल काला, स्वर्ण आदि दान, गायत्री जपमाला।। अधर्म से धर्म को हों प्रशस्त, शुभ कर्म, शुभ दृष्टि में हों समस्त, कठिन समय के देव रक्षक, मुखाकृति सिंह, विपत्ति भक्षक।। माया गुरुरानी (स०अ०) रा० आ० प्रा० वि० धौलाखेड़ा ब्लाॅक-हल्द्वानी, नैनीताल 🙏संकलन :-टीम मिशन शिक्षण संवाद गढ़वाल-कुमाऊँ, उत्तराखण्ड

सड़क सुरक्षा-श्रीमती सरोज डिमरी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में वैश्विक सड़क सुरक्षा सप्ताह के अन्तर्गत प्रस्तुत है जनपद  चमोली से शिक्षिका बहिन श्रीमती सरोज डिमरी जी की कविता: सड़क सुरक्षा सड़क सुरक्षा सप्ताह मनाओ,  जागरूकता अभियान चलाओ। संयुक्त राष्ट्र संघ की अन्तर्राष्ट्रीय व्यवस्था, स्वास्थ्य, स्वस्थता की जिम्मेदार व्यवस्था।। यातायात के नियम अपनाओ, सड़क सुरक्षा सप्ताह मनाओ। टॉफी चॉकलेट लेते-देते, भाईचारा खूब बढ़ाओ।। दो पहिया वाहन जब भी चलाओ, सिर पर हेलमेट जरूर लगाओ। चौपहिया वाहन जब भी चलाओ, सीट बेल्ट को इस्तेमाल में लाओ।। सड़क सुरक्षा जागरूकता, मानव प्रेम और मानवता। जन-जन में जागरूकता फैलाना है,  अनमोल जीवन को सुरक्षित बनाना है।।  जीवन रक्षा अपने हाथों में अपनाना है, गति को नियंत्रित करना है। सड़क दुर्घटनाओं को कम करना है,  बाएँ से ओवरटेक नहीं  करना है।। ड्राइविंग लाइसेंस साथ रखना, गाड़ी के कागज पास रखना। सड़क सुरक्षा से जीवन रक्षा करना, जीवन है अनमोल अपना।। आपकी सुरक्षा सिर्फ नारा नहीं, जीवन जीने का तरीका है। जागरूकता बिना यह रीता है। खुशियाँ साथ होती है...

मुसीबतों का सागर-श्रीमती रेखा रावत

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में  प्रस्तुत है जनपद रुद्रप्रयाग  से शिक्षिका बहिन श्रीमती रेखा रावत  जी की कविता: मुसीबतों का सागर  महामारी की दूसरी लहर से,  स्तब्ध सारा देश है।  लगता है ये बहरूपिया है,  इसका न कोई वेश है।।           क्या करें, क्या ना करें?  सब कुछ समझ से बाहर है।  ये बस एक वाइरस नहीं है,  ये तो मुसीबतों का सागर है।।  ये आता है, जाता है,  और जाकर फिर आ जाता है।  ऐसे भी क्या किसी के घर में,  कोई बिन बुलाये जाता है? मास्क पहनना और हाथ धोना,  ये ही इसका बचाव है।  और सामाजिक दूरी रख कर,  सबका करना रख-रखाव है।।     अनदेखी और लापरवाही न करना,  ये हम सब की जिम्मेदारी है।  नियमों का पालन करना ही महामारी पर भारी है।। 🙏 रचना:रेखा रावत  (स०अ०) रा० प्रा० वि० तिमली भरदार ब्लॉक-जखोली, जनपद-रुद्रप्रयाग 🙏संकलन :-टीम हिम मन मन्थन,   उत्तराखण्ड

पर्यावरणविद -सुन्दरलाल बहुगुणा जी-श्री गिरीश बड़ोनी -

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है उत्तराखण्ड के पर्यावरण गाँधी स्व० सुन्दरलाल बहुगुणा जी के परिप्रेक्ष्य में जनपद रुद्रप्रयाग से शिक्षक साथी श्री गिरीश बड़ोनी जी का लेख: मौत उसकी है करे जमाना जिसका अफसोस* यूँ तो दुनियाँ में सभी आये हैं मरने के लिए//////////// ============================= हमेशा ही हिमालय-गंगा के पैरोकार रहे सुन्दरलाल बहुगुणा जी एक  गाँधीवादी सत्याग्रही, स्वतन्त्रता सेनानी, लेखक, पत्रकार, चिपको आन्दोलन के प्रणेता और पर्यावरणविद थे। बालपन में उनका नाम गंगा प्रसाद रखा गया था। आजादी के आन्दोलन में भूमिगत हुए तब लाहौर में सरदार मान सिंह हो गए थे। आखिर सुन्दरलाल बहुगुणा नाम से विख्यात हुए। जन्म-9 जनवरी 1927 (गढ़वाल की भागीरथी घाटी का मरोड़ा गांव) माता–पूर्णा देवी पिता–अम्बादत्त बहुगुणा पुत्र और पुत्री -राजीव नयन बहुगुणा ,माधुरी बहुगुणा पाठक और प्रदीप बहुगुणा  शिक्षा–इण्टरमीडिएट-टिहरी, स्नातक–लाहौर आन्दोलन/संघर्ष– राजशाही विरोधी प्रजामण्डल आन्दोलन, 1944 से 1948 लाहौर में भूमिगत जीवन 1945 –1948 नशाबन्दी आन्दोलन-1960 का दशक चिपक...

सड़क सुरक्षा-श्रीमती किरण जोशी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में वैश्विक सड़क सुरक्षा सप्ताह के अन्तर्गत प्रस्तुत है जनपद टिहरी गढ़वाल से शिक्षिका बहिन श्रीमती किरन जोशी जी की कविता: सड़क सुरक्षा           नियम, कानून और दिवस मनाना, तब ही सफल हो पायेगा। जब प्रत्येक घर का हर बच्चा, सुसंस्कारित हो पाएगा।।  धैर्य, दया, धर्म, दान, सत्य,  इन सब से मिलकर बना व्यक्तिव।  घर से अच्छी शिक्षा लेकर, राह पर चलने को होगा सुदृढ़।।  उम्र के साथ नियमों का पालन करना,  अच्छी तब बन जाती है आदत। भगदड़ की आदत से बचकर, सोच समझ कर वाहन चलाना।।  सड़क और वाहन सब आवश्यक हैं,  प्यार से सब जन इसका उपभोग करो। सड़क, सुरक्षा और नियमों  का  पालन करके,    अपना व सबका जीवन आनन्दित  करो।।  रचना:- किरण जोशी (प्र०अ०) रा० प्रा० वि० मैखण्डी मल्ली  ब्लॉक-कीर्तिनगर, टिहरी गढ़वाल 🙏 संकलन-टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

सड़क सुरक्षा-श्रीमती देवेश्वरी सेमवाल

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में वैश्विक सड़क सुरक्षा सप्ताह के अन्तर्गत प्रस्तुत है जनपद रुद्रप्रयाग से शिक्षिका बहिन श्रीमती देवेश्वरी सेमवाल जी की कविता: सड़क सुरक्षा  पैदल चलते समय सदा फुटपाथ पर चलें,  जहाँ न हों फुटपाथ वहाँ सड़क के बाएँ चलें।  नियमों का यदि हम नित पालन करेंगे,  सदैव स्वयं और दूसरों की भी सुरक्षा करेंगे।।  सड़क पर कभी भी डरकर मत चलो,  नियमों का तुम सदैव पालन करते चलो।  शराब पीकर कभी तुम वाहन मत चलाना,  सदैव सुरक्षित होकर तुम अपने घर जाना।।  सिर पर सदा हैलमेट तुम पहनना,  स्वयं की सुरक्षा का सदैव ध्यान रखना।  अगर अपनों में है बसी तुम्हारी जान,  इन नियमों का तुम सदैव करो पालन।।  अपना और अपनों का सदैव रखो ध्यान,  नियम और सावधानी से चलाओ तुम वाहन।  नियम पूर्वक यदि तुम चलोगे सदा,  होने वाली हर दुर्घटना से बचोगे सदा।।  🙏रचना:-   देवेश्वरी सेमवाल(स०अ०)   रा० उ० प्रा० वि० कान्दी   ब्लॉक-अगस्त्यमुनि, रुद्रप्रयाग 🙏संकलन :-टीम मिशन शिक्षण संवा...

सड़क-श्रीमती लता आर्य

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन  में वैश्विक सड़क सुरक्षा सप्ताह के अन्तर्गत प्रस्तुत है जनपद नैनीताल से शिक्षिका बहिन श्रीमती लता आर्य की कविता: सड़क   रास्तों ने हमको राह दिखाई है, जब-जब पड़ी इन पर अपनी  परछाई है। कई अपनों को ये मिलाते हैं। कितनी कठिन दूरी हो मंजिल तक पहुँचाते हैं।। आँखों ने जब देखी इनकी दूरी, पँख लगाये उड़ कर दूर की हर मजबूरी। समय के हाथ पैर बन जाते हैं, सड़कों पर जब हरे वृक्ष लहरातें हैं।। ये सड़क दूरियाँ नहीं अपनों की राह बताते हैं, मार्ग कठिन हो तब भी हम मिल ही जाते हैं। जब ये वृक्ष मिट्टी से दूर हो जाते हैं, तब ही ये अपना रौद्र रूप दिखाते हैं।। कठिन होता है उस राह से गुजरना, जब इनकी जड़ें हिल जाती हैं। "सड़क" उस आशा को जगाती हैं, जो बीते बचपन का सपना याद दिलाती हैं।। लता आर्या (प्र०अ०) रा० प्रा० वि० मनोरा ब्लाक-भीमताल, जिला-नैनीताल उत्तराखण्ड  🙏संकलन :टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

सड़क सुरक्षा-श्रीमती वन्दना जोशी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में वैश्विक सड़क सुरक्षा सप्ताह के अन्तर्गत प्रस्तुत है जनपद चम्पावत से शिक्षिका बहिन श्रीमती वन्दना जोशी जी की कविता: सड़क सुरक्षा आज सड़क और परिवहन हमारा अभिन्न अंग है, अधिकांश लोग दोपहिया या चौपहिया के संग हैं। एक ओर परिवहन ने दूरियों को कम कर दिया है, वहीं दूसरी ओर जीवन जोखिम को बढ़ा दिया है।। लाखों लोगों की जिन्दगी दुर्घटना में जा रही है,  हजारों-हजारों को आजीवन अपाहिज बना रही है। कहीं लापरवाही, कहीं जागरूकता की कमी है, वाहन चला तो लेते हैं कहीं नियमों की अनदेखी है।। वाहन चलाने से पहले ड्राइविंग नियमों को जान लें,  अपनों के लिए अपने जीवन के मोल को मान लें।  ड्राइविंग लाइसेंस हो हाथ में तब वाहन को चलाएँ, ओवरलोडिंग, ओवरटेकिंग, ओवरस्पीड से बचाएँ।। हेलमेट और सीट बेल्ट को बाँधें, दुर्घटना को टालें, नशे से दूर रह 'सड़क सुरक्षा जीवन रक्षा' को पा लें। ईश्वर का अनमोल उपहार ये  जीवन अपना है, जागरूकता, सावधानी से इसे महफूज रखना है।। 🙏रचना:- वन्दना जोशी (स०अ०) रा०आ०क०उ०प्रा०वि० पऊ ब्लाॅक-लोहाघाट, जिला- चम्पावत...

जगत जननी-श्रीमती आभा भैंसोड़ा

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में बैशाख शुक्ल नवमी पावन पर्व पर प्रस्तुत है जनपद नैनीताल से शिक्षिका बहिन श्रीमती आभा भैंसोड़ा की कविता: 🙏 जगत जननी   मिथिला देश के राजा जनक महान, चिंतित थे बहुत पड़ने से अकाल। ऋषि आशीष से हल चलाकर,  कन्या पा गए सीता महान।। जनक नन्दिनी कहलाई जानकी, मिथिला कुमारी से कहाई मैथिली। भूमि से जन्मी, तो भूमिजा कहलाई। हल जोत के पाया वृषभानु कहलाई।। पुनौराधाम जिला सीतामढ़ी  में, प्राकट्य तुम्हारा स्थान है माता। मिथिला का हर जन हर घर में,  अतिशय बल रूप में पूजा जाता।। जगत जननी हो जानकी माता,  जनक नन्दिनी अति सुख दाता।  प्राकट्य दिवस है आज तुम्हारा,  मन अतिशय मेरा हर्षाता।। 🙏रचना:- डॉ० आभा सिंह भैसोड़ा (स०अ०) रा० प्रा० वि० देवलचौड़ हल्द्वानी, नैनीताल 🙏संकलन :-टीम हिम मन मन्थन, उत्तराखण्ड

जनक सुता थी जानकी-श्रीमती सरोज डिमरी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में बैशाख शुक्ल नवमी पावन पर्व पर प्रस्तुत है जनपद चमोली से शिक्षिका बहिन श्रीमती सरोज डिमरी की कविता: जनक सुता थी जानकी  विष्णु अवतार श्री राम,  लक्ष्मी रूप सीता प्रकट भई।  जनक नन्दिनी जानकी,  बोलो जय सिया राम की।।   जानकी जन्म की कहानी है,  रोचक बड़ी सयानी है।  मिथिला पुर के राजा जनक,  विदेह भी उनका नाम एक है।।  मिथिला पुर में अनावृष्टि से, एक बार सूखा पड़ा। बेहाल प्रजा जन थे, जन-जीवन जंजाल बना।।  ऋषि-मुनियों ने राजा को, सुन्दर एक उपाय सुझाया।  नगर से बाहर सीमा पर,  स्वर्ण हल जा चलवाया।।  राजा रानी ने स्वर्ण हल से, जहाँ खेत पर हल जोता। सीत बड़ी धरती पर, अचरज हुआ अनोखा।।   भूमि पड़ी थी सुता सुहानी,  देख उन्हें हुई  हैरानी।  धीरज से उसे गोद उठाया।  सीधे राजभवन पहुँचाया।।  कन्या रत्न देख मन हर्षाया,  वर्षा का नजारा मन को भाया। रौनक नगर में ऐसी छाई,  कन्या जन्म की बजी बधाई।।  नामकरण सीता का हुआ,  सीत पड़ी से...