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हे! पितृदेव - श्रीमती अनीता नौडियाल जी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में पितृपक्ष आरम्भ पर प्रस्तुत है आज जनपद- टिहरी गढ़वाल से शिक्षिका बहन श्रीमती अनीता नौडियाल जी द्वारा रचित कविता:- 🙏 🕉️✍️हे! पितृदेव इस गौरवशाली धरती पर,  तुमने हमको जन्म दिया। पूर्ण समर्पण कर, पालन, पोषण है किया।।  उँगली पकड़कर हमारी, सही राह चलना सिखलायी। नव संतति का भार उठा, दुनिया उन्हें दिखलायी।।  सदा-सदा ऋणी तुम्हारे, महालयारम्भ को आह्वान करें। श्रद्धा का एक दीप जला, हम चरणों में नित शीश धरें।। स्मरण करें तुम्हें नित, श्रद्धा युक्त हृदय से दिन-रात। हो पूजन नित ही, संस्कार व परम्पराओं के साथ।। श्वेत पुष्प अर्पित कर, नई उपज का भोग लगायें। लें सकें आशीष तुम्हारा, प्रसन्न तुम्हें हम कर पायें।। हे! पितृदेव तुम सदैव ही, इतनी कृपामयी दृष्टि रखना। धन-धान्य पूरित हों सब, जग में सुख समृद्धि करना।।  श्राद्ध पक्ष का इतिश्री,  होगा पितृ विसर्जन।।  शत्-शत् प्रणाम तुम्हें, कोटि कोटि नमन।।  🙏रचना-: अनिता नौडियाल (स०अ०)  रा० प्रा० वि० मैखण्डी मल्ली कीर्तिनगर, टिहरी गढ़वाल 🙏संकलन- टीम हिम मन म...

आजादी की सुबह है आयी - श्रीमती सूरी भारती

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है जनपद-टिहरी गढ़वाल से शिक्षिका बहन श्रीमती सूरी भारती जी द्वारा रचित कविता: *🙏✍️🇮🇳आजादी की सुबह है आयी* कितने ही वीर शहीदों ने,  सीने पर हैं गोलियाँ खायी। तभी आज भारत ने आजादी, महोत्सव की अलख जगायी।। यह भारत भूमि थी, सोने की चिड़िया, देख दुश्मन के मन में लालच आया। इसे पाने की चाहत में अंग्रेजों ने, व्यापार का था जाल बिछाया।। फूट डालो, शासन करो ब्रिटिशों ने,  इस नीति का रंग-भेद फैलाया। अपनी ही भूमि से भारतीयों को, नित-नित दर-दर फिर भटकाया।। यह मंजर देखकर हर देशवासी, के मन में क्रोध से आक्रोश आया। अंग्रेजो भारत छोड़ो, भारत छोड़ो, जन-जन ने यह आन्दोलन चलाया।। छिड़ा अंग्रेजों के विरुद्ध घमासान, हर भारतीय ने तब मशाल जलाया। भगतसिंह, राजगुरु, सुखदेव, मंगल, आदि वीर शहीद चढ़ गये फाँसी पर।। लक्ष्मीबाई ने भी स्वतन्त्रता संग्राम, में लड़ते-लड़ते अपना प्राणों को गंवाया। तब जाकर 15 अगस्त 1947 को, स्वतन्त्र भारत का है जश्न लोगों ने मनाया।।   🙏रचना- सूरी भारती (प्र०अ०)  रा० प्रा० वि० उठड़ वि० ख०-  जाखण...