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होलाष्टक- श्रीमती सरोज डिमरी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला, हिम मन मन्थन में होली पावन पर्व के सुअवसर पर प्रस्तुत है आज जनपद- चमोली गढ़वाल से शिक्षिका बहन श्रीमती सरोज डिमरी जी द्वारा रचित कविता-: 🙏🕉️✍️होलाष्टक  शिव बैठे निज ध्यान में, करते संध्या पाठ। कामदेव रति कर रहे,  धमा चौकड़ी ठाठ।।  शिव ने रोका काम को,  काम बड़ा उद्विग्न। तनातनी बढ़ती हुई,  आया तप में विघ्न।।  कामदेव ने दम्भ से, शिव संग किया विद्रोह। तप में आये विघ्न से, व्याकुल शिव की देह।।  क्रोधित होकर के प्रभु, देते हैं यह श्राप। कामदेव तुम भस्म हो,  मिटे सकल संताप।।  पति के बिना तब रति ने, किया कठिन जप ध्यान। महादेव इस भूल को,  क्षमा करो भगवान।।  आठ दिनों की वेदना,  सहती करे विलाप। शिव-शंकर ने दया से,  कामदेव जीवित हुआ, रति से पुनर्मिलाप।।  कामदेव के हास से, मिटा रति का ताप। विश्व भुवन सुन्दर बना,  उमड़े मधुमास की छाप।।  सतरंगी परिवेश में,  तब सजता संसार। होली सब हैं खेलते, नूतन उमंग संचार।।  🙏🏻सरोज डिमरी (स०अ०)  रा० उ० प्रा० वि० घतोड़ा  ...

होली के रंग- डाॅ० आभा सिंह भैसोड़ा

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला, हिम मन मन्थन में होली पावन पर्व के सुअवसर पर प्रस्तुत है आज जनपद- नैनीताल से शिक्षिका बहन डाॅ० आभा सिंह भैसोड़ा जी द्वारा रचित कविता-: 🙏🕉️🙏✍️होली के रंग  होली के जो रंग आये, मन मुस्काये रे। फाल्गुन के यह रंग में तो, डूबा चला जाये रे।। किसना की ये बाँसुरिया,  मन को लुभाए रे।  मुरलिया की माया से तो,  बचा नहीं जाये रे।। कि सोचे न समझे न, बूझा न जाये रे। होली होली होली आई, हो SSSSली आयी रे।। कान्हा की पिचकारी से,  जब, रंग उड़ा जाये रे। किसकी भीगी है चुनरी? कौन मुस्काये रे? भीगी राधा की चुनरी वही ये बताये रे। कान्हा ही ने है भिगायी, रो के वो बतलाए रे।। जाने न दूँगी, न छोडूँगी  कान्हा  रे ........ अरज मेरी सुन लो कान्हा,  छेड़ो न...... *🙏🏻रचना-* डॉ आभा सिंह भैसोड़ा(स०अ०)  रा० प्रा० वि० देवलचौड़,  हल्द्वानी, नैनीताल 🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

नारी का महत्व-श्रीमती अनिता नौडियाल

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला, हिम मन मन्थन में अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है आज जनपद- टिहरी गढ़वाल से शिक्षिका बहन श्रीमती अनिता नौडियाल जी द्वारा रचित कविता-: 🙏🏻🕉️📝नारी का महत्व  नन्हीं सी किलकारी वो, सौभाग्य बनी घर की। बनकर बहिना वो, स्नेह भाई पर लुटाती।।               खिलखिलाती हंँसी ने, दोस्त का भी रूप लिया। पूर्ण समर्पण कर अर्द्धांगिनि,  स्वरूप स्वीकार किया।। ममता के सांँचे में ढल, वो मांँ भी बनी। कमर-कस संघर्ष रण में, रही सदैव तनी।। जिसके ममत्व ने, सृष्टि का नव रूप लिया। जिसके रक्त ने बंटकर, नव जीवन जग को दिया।। सृष्टि के आरम्भ से ही, रही जो अस्तित्ववान। है पूजनीय समाज में, पाती सहृदय सम्मान।। वो शक्तिस्वरूपा है, नहीं अबला और विवश। हर नारी को दें सम्मान, मनाएंँ महिला दिवस।। 🙏रचना-: अनिता नौडियाल (स०अ०)   रा० प्रा० वि० मैखण्डी मल्ली  कीर्तिनगर, टिहरी गढ़वाल। 🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

नारी- श्रीमती देवेश्वरी सेमवाल जी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला, हिम मन मन्थन में अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस के सुअवसर पर प्रस्तुत है आज जनपद- रुद्रप्रयाग गढ़वाल से शिक्षिका बहन श्रीमती देवेश्वरी सेमवाल जी द्वारा रचित कविता-: 🙏🏻🕉️🪷📝नारी नारी तू है जग की दाता,  हर जीवन तुझसे ही भाता।  तेरी महिमा, तेरी हर गाथा,  सारा संसार है सबको सुनाता।।  पल-पल तू है कोशिश करती,  साहस, धैर्य सदा बनाये रखती।  अपना हर-पल, हर क्षण है देती,  एक सूत्र में सबको बांँधे है रखती।।  न जाने कितने कष्टों को है ढोती,  फिर भी कभी वह ऊफ तक न करती।  सदा प्रफुल्लित, हंँसते हुए है रहती,  खुश रहकर सब कष्टों को है सहती।।  तेरी महिमा का क्या करें हम गुणगान,  तू तो है सर्वगुण सम्पन्न और महान।  लक्ष्मी, दुर्गा, काली, न जाने कितने रूप,  हर रूप में बसा है संजीवनी जैसा  स्वरूप।।  🙏रचना-: देवेश्वरी सेमवाल (स०अ०)  रा० उ० प्रा० वि० कान्दी, क्षेत्र-अगस्त्यमुनि, रुद्रप्रयाग। 🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

महाशिवरात्रि- श्रीमती सरोज डिमरी

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 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी7 साहित्यशाला, हिम मन मन्थन में महाशिवरात्रि पावन पर्व के सुअवसर पर प्रस्तुत है आज जनपद- चमोली गढ़वाल से शिक्षिका बहन श्रीमती सरोज डिमरी जी द्वारा रचित कविता-: 🙏🏻🕉️🪷📝महाशिवरात्रि व्रत   श्री राम के आदि गुरु  शिव-शंकर महाराज। आस्था श्रद्धा भाव की,  हम पूजा करते आज।।  आराधना महादेव का,  मानस पूजन साथ। पत्र-पुष्प और धूप-दीप,  लाए प्रभु हम हाथ।।  चन्द्रकान्ति जब क्षीण है, चतुर्दशी की रात। ऐसे अद्भुत संयोग में,  शिव लाये बारात।।  परम अलौकिक शक्तियाँ,  शिव देते वरदान। पुरुषार्थ सब सिद्ध हो, जब लेते मन ठान।।  अद्भुत शक्ति संयोग है,  गौरा-शंकर विवाह। मनसा-वाचा-कर्मणा,  सत्यकर्म निर्वाह।।  शिव शक्ति प्राकट्य से,  जीवन बना आसान। महादेव आराधना से  मिले अभय वरदान।।  धर्मशास्त्र करते सदा,  महादेव का ध्यान। मोक्ष प्राप्ति होती उसे,  जो करता जप दान।।  मोर, सर्प, वृष, व्याघ्र का,  सुन्दर मेल सुजान।  मूषक पर अति सोहते,  गणपति श्री भगवान।।   शि...