ईगास बग्वाळ- श्रीमती सन्नू नेगी

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में हरिबोधनी एकादशी पावन पर्व पर प्रस्तुत है आज जनपद- चमोलाी गढ़वाल से शिक्षिका बहन श्रीमती सन्नू नेगी जी द्वारा रचित गढ़वाली कविता-:

*🙏🕉️🪔📝ईगास बग्वाळ*


आवा अबकी इगास खूब मनौला,

छोड्यां भीतरू दिवा-बत्ती जगौला।

द्यो-द्यपतों मूं धूप-धुप्यांणु दिखोला,

म्वौर-डिंडा्ळी फूलोंन  सजौला।। 


आँयी चा ईगास  बग्वाल बल्,

स्वांळी-पकौड़ी, दूध-भात बड़ोला।

ग्वोरु -बल्दूँ  तें  पिन्डू-भात खवेतें,

सींगों पर तौंकी त्यौल लगौला।


हात की राखुड़ी इने-उने निं फरोंदा,

गौड़-बाछी का पुछडा पर लगोंदा।

दौळी-छिलकु का फाड़ा ल्यायां,

स्यौळून तौंका भैलू बडौंदा।। 



माधो सिंह भण्डारी गाथा कू पर्व,

वैका वीरता का किस्सा सुणौला।

ईगास मनाई किले उत्तराखण्ड मा,

नौना-बाळूं तैं पर्व कू महत्व बतौला।


बनवास बे रामचन्द्रजी आया अयोध्या,

बग्वाळ कू त्योहार तब छां मनौदा।

वीं बात कु पता ग्यारा दिन बाद चली,

उत्तराखण्ड  मा  इगास तबी मण्डौन्दा।।


✍️ रचना-:


सन्नू नेगी (स०अ०)

रा० क० उ० प्रा० वि० सिदोली

क्षेत्र- कर्णप्रयाग, चमोली


🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

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