कुछ सपने - श्रीमती सुषमा नेगी

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है आज जनपद- देहरादून से शिक्षिका बहन श्रीमती सुषमा नेगी जी द्वारा रचित कविता:-


🙏📝 कुछ सपने


तू फूलों को मत शूल बना,

कांँटों पर कोई फूल खिला।

वक्त गवाही माँगेगा कल,

अभी को ना तू भूल बना।।


कर्म ही संग जाएगा तेरे,

बातें ना तू फिजूल बना।

पर्वत चट्टानों से गुजरे जो,

ऐसी ही कोई गूल बना।।


जो बुरे विचारों को कुचले,

ऐसा कोई त्रिशूल बना।

जो हाथों से तराशना था,

उसको तू मत धूल बना।।


तोड़ उन्हें जो प्रगति में बाधा,

कुछ नए उसूल बना।

दे निशानी दुनिया को,

कुछ ऐसा तो मकबूल बना।।



तू नियमों से परे होकर,

जगहित में कोई नियम बना।

नव चिन्तन नव निर्माण करें,

तू ऐसा कोई रसूल बना।।


हर दीपक ही प्रकाश बिखेरे,

तू ऐसा कोई स्कूल बना।।


🙏रचना-:

सुषमा नेगी (स०अ०) 

रा० प्रा० वि० आर्यनगर काठबंगला

नगर क्षेत्र, जनपद- देहरादून

🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

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