होली - श्रीमती सुशीला थपलियाल

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला  "हिम मन मन्थन" में 'होली' पावन पर्व के सुअवसर पर प्रस्तुत है, आज  जनपद-रुद्रप्रयाग, गढ़वाल से शिक्षिका बहिन श्रीमती सुशीला थपलियाल जी द्वारा रचित कविता-:


🙏✍️‌‌‌ होली 


बुराई पर अच्छाई का प्रतीक, 

होली रंग लेकर आई है। 

आज तन-मन में, 

रंगों की बहारें छाई है।। 


राग द्वेष मिट गये,

रंगों की पावन धार से। 

रंग में सारे रंग गये, 

पिचकारी की बौछार से।। 


दंभ हिरण्यकश्यप का, 

क्षणिक पल में मिट गया। 

विजय हुई भक्ति की, 

प्रहलाद अग्नि से बच गया।। 


होलिका वरदान के मद में, 

धोका खा गयी। 

परिणाम होता गलत कर्मों का, 

गलत समझा गयी।। 



आओ लगायें रंग ऐसा, 

अहसास जिसमें प्यार का। 

सम्मान हो अपने बडो़ं का, 

ना भाव हो तकरार का।। 


रंगों के इस त्योहार के, 

रंग से सजाना अपना मन। 

ना राग हो, ना द्वेष हो, 

सुखमय जियें सब अपना जीवन।। 



संस्कृति से जोड़ें इसे, 

प्रतिवर्ष प्रतिष्ठा पायें हम। 

विलग नहीं हम एक हैं, 

सब में भाव, ये लायें हम।। 


सुन्दर रंगों से विभूषित, 

वर्णित समाज बनायें हम। 

बन्ध के परिधि में मानवों की, 

दानवता से हट जायें हम।। 

🙏रचना ट-:

सुशीला थपलियाल (प्र०अ०) 

रा० प्रा० वि० पपडा़सू

वि०ख०- जखोली, रुद्रप्रयाग


🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

माँ तुम - श्रीमती वन्दना जोशी

गौचर मेला-श्री सरोज डिमरी