रंगोत्सव-श्रीमती जया चौधरी

 प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में होली के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है आज जनपद चमोली से शिक्षिका बहिन श्रीमती जया चौधरी जी की रचना:-


रंगोत्सव



हो रही गर्मी की आहट,

ले ली मौसम ने अंगड़ाई।

सूर्य किरणों में दिख रही,

ऊष्णता की कुछ गहराई।। 


क्या खूब है कुदरत यूंँ सजी,

रंग-बिरंगे फूलों की शहनाई।

गा-गा कर कोयल और पपीहे,

दे रहे शीत ऋतु को विदाई।। 


खुशबू से सराबोर हैं दिशाएंँ,

झूम-झूम हँसती पवन बौराई ।

चुपके से बसन्ती रंगों को चुरा के,

फाग की मस्ती कुछ ऐसे आयी।। 


विश्वास की शक्ति याद दिलाने,

बुरे पर जीत जाती है अच्छाई।

भू पर आए ऐसा होलिका दहन,

अवगुण जले और गुण बढ़ें सवाई।। 


भर-भर बरसे हर एक जन पर,

खुशियों से सराबोर रंग पिचकारी।

धुले मन के बैर-द्वेष रंगोत्सव में,

हो ये होली इन्द्रधनुषी हितकारी।। 


जया चौधरी (स०अ०)

रा०प्रा०वि० बालखिला मलारी

ब्लॉक-जोशीमठ, जिला चमोली।





🙏संकलन :-टीम मिशन शिक्षण संवाद गढ़वाल-कुमाऊँ, उत्तराखण्ड

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