नववर्ष - श्रीमती मीरा भारद्वाज

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में आज नवसंवत्सरारम्भ के पावन पर्व पर प्रस्तुत है जनपद हरिद्वार  से शिक्षिका बहिन श्रीमती मीरा भारद्वाज जी की कविता 



नववर्ष मंगलमय हो! 


चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, 

वर्ष हो शुभ सर्वदा। 


द्वार पर आशीष माँ का, 

शक्ति का भंडार है,

शक्ति मर्म में निहित, 

जीव का उद्धार है।। 


चारित्रिक दृढ़ता अनूठी, 

यदि नहीं, धिक्कार है,

दृढ़व्रती सम्मुख ही जग में

झुकता अत्याचार है।। 


आत्मिक उत्थान का, 

गुड़ी पड़वा ज्ञान है।

अनुकूल हों प्रतिकूलता में, 

प्रतिबद्धता सम्मान है।। 


बो दिया हमने समय पर, 

ले कनक आई बैशाखी। 

अपना बोया काटते सब, 

दे रहे संदेश रागी।। 


उमंग उत्साह सम्पन्नता, 

सांस्कृतिक उत्कर्ष हो,

वैचारिक प्रखरता बढ़े

कल्याणकारी वर्ष हो।। 

शुभ सदा नववर्ष हो।। 



डा०मीरा भारद्वाज (स०अ०) 

रा० प्रा० वि० सलेमपुर-1

ब्लॉक-बहादराबाद, 

हरिद्वार



🙏संकलन :-टीम मिशन शिक्षण संवाद गढ़वाल-कुमाऊँ, उत्तराखण्ड

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