'लेखनी'(कलम)-श्रीमती सरिता मैन्दोला

 प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है आज जनपद पौड़ी  से शिक्षिका बहिन श्रीमती सरिता मैन्दोला जी की रचना:-लेखनी(कलम) 


'लेखनी'(कलम)

लेखकों की होती है, 

कलम ही हथियार। 

 कागज पर उतारते ,  


वे अपने भाव विचार।। 


गणेश जी ने दाँत से किया, 

प्रथम कलम का काम। 

कौरव-पाँडव युद्ध का, 

पूरा किया बखान।। 


कलम उठती है डॉक्टर की,

मरीज की जान बचाने को। 

जज की कलम चलती सदा,

अत्याचार से न्याय दिलाने को।। 


कलम,ज्ञान व शक्ति का,

प्रतीक माना जाता है। 

ज्ञान दिलाता इससे शिक्षक,

सबका भविष्य बनाता है।। 


कलम का अंदाजा ये दुनिया,

भली-भाँति है जानती। 

मुँह से जो बोल नहीं पाते, 

उसको कलम बखानती।। 


स्याही कहीं पर जो, 

अनायास गिर जाती है। 

तो वो स्याही वहांँ पर,

मात्र दाग छोड़ जाती है।। 


वही स्याही गर कोई, 

कलम से गिराता है। 

कागज के कोरे पन्ने पर,

हर शब्द बोल उठता है।। 


कलम ही हर कमजोर का,

सहारा बन जाती है। 

उससे लिखा हर शब्द ही,

हमारी ताकत बन जाती है।। 




🙏रचना:-सरिता मैन्दोला (स० अ०)

रा० उ० प्रा० वि० गूमखाल, 

ब्लॉक - द्वारीखाल, पौड़ी गढ़वाल


🙏संकलन :-टीम मिशन शिक्षण संवाद गढ़वाल-कुमाऊँ, उत्तराखण्ड

टिप्पणियाँ

  1. बहिन कलम बन्द नहीं होनी चाहिए।
    जीवन भर निर्मल गंगा धारा सी बहनी चाहिए।।
    दिन हो या हो रात विचारोंं को एकत्रकरना चाहिए।फिर उठा कलम कागज में शब्द मोती पिरोना चाहिए।
    धन्यवाद।

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