आओ पहुना मेरे द्वार-श्रीमती सविता विष्ट
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला *हिम मन
मन्थन* में आज महाकुम्भ के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है जनपद नैनीताल से शिक्षिका बहिन श्रीमती सविता विष्ट जी की कविता:-
*आओ पहुना मेरे द्वार*
कुम्भ बुलाए अबकी बार,
आओ पहुना मेरे द्वार,
अद्भुत, अद्वितीय संस्कृति,
हमारी,सकल विश्व में छवि निराली।।
तरंगिणी की तरंगों में बसी,
जीवन की यह सच्चाई।
संजोग से हमने यह संजीवनी है पाई।।
भक्ति में लीन सारी सृष्टि हुई है,
छोड़े हैं आज सबने घर-बार।
कुम्भ बुलाए अबकी बार,
आओ पहुना मेरे द्वार।।
मनमोहक मोहन की मुरली,
अर्जुन सा एकाग्रचित्त,
एकलव्य सा शिष्य महान।
मेरे भारत की अनूठी पहचान।।
मेरे देश में हर घर मंदिर,
पावन इसका कोना-कोना।
मन में बसी श्रद्धा अपार,
जय-गंगे तेरी विरासत अपरम्पार।।
पहन भक्ति का चोला,
श्रद्धालु आज घर से है निकला।
मेल-मिलाप का सुन्दर सद्भाव,
हाँ यही है जिस पर हमको है नाज।।
आस्था को फलने दो,
भक्ति को शक्ति बनने दो।
एकल को सकल जगत बनने दो,
कर लो पहुना मन में विचार।।
पुरातन नगरी सजी है सगरी,
खींचें अपनी ओर।
कहीं जटाओं का हार सजा है,
कहीं चन्दन-तिलक,कंठ विष-माला।।
सिन्दुरी रंग गहराया है,
धुंँए से धुंधलाया आकाश है।
हर किरदार दिखता है सच्चा,
हमने जो कथाएंँ पढ़ीं थीं बेशुमार।।
कुंभ बुलाए अबकी बार,
आओ पहुना मेरे द्वार।।
🙏 रचना :
सविता विष्ट
निर्मल कान्वेंट सीनियर सेकेण्ड्री स्कूल हल्द्वानी, जनपद नैनीताल
🙏संकलन :-टीम मिशन शिक्षण संवाद गढ़वाल-कुमाऊँ, उत्तराखण्ड

बहुत सुन्दर रचना
जवाब देंहटाएंCongratulations 👏👏 mam
जवाब देंहटाएंNicely express the divine feelings!!
जवाब देंहटाएंCongratulations madam!!
Dr. Geeta Rawat