श्री हनुमान जयन्ती-श्री कमलेश कुमार सती

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में आज श्री हनुमानजी की पावन जयन्ती  के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है जनपद नैनीताल  से शिक्षक बन्धु बहिन श्री कमलेश कुमार सती जी का लेख:-


श्री हनुमान जयन्ती


मनोजवं मारुतुल्यवेगं जितेंद्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्,

वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये।

अतुलित बलधामं, हेमशैलाभदेहमं, दनुजवनकृशानुं,ज्ञानिनामग्रगण्म्।

सकलगुण निधानं, वानराणामधीशम्,

 रघुपतिप्रिय भक्तं वातजातम् नमामि।




रामभक्त हनुमान को कलियुग का एकमात्र पृथ्वी पर उपस्थित देवता माना जाता है। भगवान हनुमान जल्द प्रसन्न होने वाले संकटमोचक देवता हैं। जो भक्त सच्चे मन और पवित्र भाव से बजंरग बली की पूजा और आराधना करते हैं, भगवान उनके जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करते हैं। चैत्र माह की पूर्णिमा को हनुमान जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस दिन मंदिरों में हनुमान जी की विधि विधान से पूजा की जाती है। 


हनुमान जन्मोत्सव को लोग हनुमान मन्दिर में दर्शन हेतु जाते है। कुछ लोग व्रत भी धारण कर बड़ी उत्सुकता और जोश के साथ समर्पित होकर इनकी पूजा करते है। चूँकि यह कहा जाता है कि ये बाल ब्रह्मचारी थे इसलिए हनुमान जी को जनेऊ भी पहनाई जाती है। हनुमानजी की मूर्तियों पर सिन्दूर और चाँदी का वर्क चढ़ाने की परम्परा है। कहा जाता है राम की लम्बी उम्र के लिए एक बार हनुमान जी अपने पूरे शरीर पर सिन्दूर चढ़ा लिया था और इसी कारण उन्हें और उनके भक्तों को सिन्दूर चढ़ाना बहुत अच्छा लगता है जिसे चोला कहते है। संध्या के समय दक्षिण मुखी हनुमान मूर्ति के सामने शुद्ध होकर मन्त्र जाप करने को अत्यन्त महत्त्व दिया जाता है। 

हनुमान जन्मोत्सव पर रामचरितमानस के सुन्दरकाण्ड पाठ को पढ़ना भी हनुमानजी को प्रसन्न करता है। सभी मन्दिरों में इस दिन तुलसीदास कृत रामचरितमानस एवं हनुमान चालीसा का पाठ होता है। जगह-जगह भण्डारे आयोजित किये जाते हैं। तमिलानाडु व केरल में हनुमान जन्मोत्सव मार्गशीर्ष माह की अमावस्या को तथा उड़ीसा में वैशाख महीने के पहले दिन मनाया जाता है। वहीं कर्नाटक व आन्ध्र प्रदेश में चैत्र पूर्णिमा से लेकर वैशाख महीने के 10वें दिन तक यह त्योहार मनाया जाता है।


लोक मान्यताओं के अनुसार सूर्य देव को हनुमान जी का गुरु माना गया है, परन्तु सच्चाई यह है ऋषि मनिन्दर जी उनके वास्तविक गुरु हैं जो त्रेता युग में हनुमान जी को तब मिले थे जब वह लंका से माता सीता की खोज कर वापस लौट रहे थे।


कहा जाता है कि एक बार इन्द्र के वज्र से हनुमानजी की ठुड्डी (संस्कृत में हनु) टूट गई थी। इसलिये उनको हनुमान का नाम दिया गया। इसके अलावा ये अनेक नामों से प्रसिद्ध हैं जैसे बजरंग बली, मारुति, अंजनि सुत, पवनपुत्र, संकटमोचन, केसरीनन्दन, महावीर, कपीश, शंकर सुवन आदि।


केवल भारत ही नहीं, सारे संसार के विद्यार्थियों के लिए किसी आदर्श व्यक्तित्व के चयन की समस्या आ जाए तो श्री हनुमान का जीवन शायद सर्वाधिक प्रेरक सिद्ध होगा। वे राम-सेवा अर्थात सात्विक सेवा के शिखर पुरुष ही नहीं थे बल्कि अनन्त आयामी व्यक्तित्व विकास के महाआकाश थे।


विद्यावान गुनी अति चातुर।

 रामकाज करीबे को आतुर।।


वैसे हनुमान चालीसा का जाप क्‍यों फायदेमंद माना जाता है, इसकी भी एक बड़ी वजह बताई गई है। यह कथा हनुमान जी के बाल अवतार से जुड़ी है। बचपन में जब हनुमान जी को काफी भूख लगी थी तो उन्होंने आसमान में चमकते हुए सूरज को एक फल समझ लिया था। उनके पास तब ऐसी शक्तियाँ थीं जिसके द्वारा वे उड़कर सूरज को निगलने के लिए आगे बढ़े।


बाल समय रवि भक्ष लियो,

तब तीनहुँ लोक भयो अंधियारो।


लेकिन तभी देवराज इन्द्र ने उन पर ऐसा प्रहार क‍िया कि वे मूर्च्छित हो गए। जब यह बात वायु देव को पता चली तो वे काफी नाराज हुए। फ‍िर यह पता लगने पर कि हनुमान जी वास्‍तव में भगवान शिव के रुद्र अवतार हैं, तो सभी देवताओं ने हनुमान जी को कई शक्तियाँ दीं। माना जाता है कि इन्‍हीं मंत्रों और शक्‍त‍ियों के सार को गोस्वामी तुलसीदास ने हनुमान चालीसा में वर्णित किया है। इसलिए हनुमान चालीसा पाठ को चमत्कारी माना गया है। कहा जाता है कि हनुमान जी में अपने शरीर को छोटा अथवा विशालकाय करने का वरदान भी था।  लंका में प्रवेश करने के समय हनुमान जी ने छोटा सा रूप रखा, लेकिन लंकिनी ने उन्हें देख लिया। वहीं रावण की राजसभा में हनुमान जी ने अपने शरीर को विशालकाय कर दिया था।



मसक समान रूप कपि धरी, 

लंकहि चलेऊ  सुमिरि नरहरी।


मान्यताओं के अनुसार कैलाश पर्वत से उत्तर दिशा की ओर  गन्धमादन पर्वत है, जहाँ हनुमान जी आज भी निवास करते हैं। हनुमान जी के इस निवास स्थल का वर्णन कई ग्रन्थों और पुराणों में भी मिलता है। हनुमान जी को मांँ सीता से अमरता का वरदान प्राप्त हुआ था। जब वे श्रीराम का सन्देश लेकर माता सीता के पास पहुँचे थे, तब मांँ सीता ने उन्हें अमर होने का यह वर दिया था।

एक कथा के अनुसार, अपने अज्ञातवास के समय हिमवन्त पार करके पाण्डव गंधमादन के पास पहुंचे थे। एक बार भीम सहस्रदल कमल लेने के लिए गंधमादन पर्वत के वन में पहुंँचे, तब उन्होंने हनुमान जी को वहांँ आराम करते देखा तो भीम ने उनसे अपनी पूँछ को मार्ग से हटाने के लिए कहा तो हनुमान जी ने कहा कि तुम स्वयं ही हटा लो, लेकिन भीम अपनी पूरी ताकत लगाकर भी उनकी पूंँछ हटा नहीं पाये थे।

इस स्थान पर महर्षि कश्यप ने भी तपस्या की थी। इस पर्वत पर गंधर्व, किन्नरों, अप्सराओं और सिद्घ ऋषियों का निवास है।


हिन्दू धर्म के सबसे जाग्रत और सर्वशक्तिशाली देवताओं में एकमात्र हनुमानजी की कृपा जिस पर बरसना शुरू होती है, उसका कोई बाल भी बाँका नहीं कर सकता। दस दिशाओं और चारों युग में उनका प्रताप है। 

 

इसीलिए कहा गया है कि... 

'चारों जुग परताप तुम्हारा,

 है परसिद्ध जगत उजियारा।'


  जो भी आपकी शरण में आते हैं, उस सभी को आनन्द प्राप्त होता है और जब आप रक्षक हैं, तो फिर किसी से क्यों डरें? 


 सब सुख लहै तुम्हारी सरना,

 तुम रक्षक काहू को डरना।' 


प्राचीन हिन्दू इतिहास और पुराणों के अनुसार ऐसे सात व्यक्ति हैं, जो चिरंजीवी हैं। यह सब किसी न किसी वचन, नियम या शाप से बंधे हुए हैं और यह सभी दिव्य शक्तियों से सम्पन्न हैं। योग में जिन अष्ट सिद्धियों की बात कही गई है वे सारी शक्तियाँ इनमें विद्यमान हैं। हिन्दू धर्मानुसार इन्हें सात जीवित महामानव कहा जाता है। प्राचीन ग्रन्थों के अनुसार इनका प्रात: स्मरण करने से मनुष्य दीर्घायु और निरोगी रहता है।


अश्वत्थामा बलिर्व्यासो हनूमांश्च विभीषण:।

कृप: परशुरामश्च सप्तएतै चिरजीविन:॥

सप्तैतान् संस्मरेन्नित्यं मार्कण्डेयमथाष्टमम्।

जीवेद्वर्षशतं सोपि सर्वव्याधिविवर्जित।।

अर्थात इन आठ लोगों (अश्वथामा, दैत्यराज बलि, वेद व्यास, हनुमान, विभीषण, कृपाचार्य, परशुराम और मार्कण्डेय ऋषि) का स्मरण सुबह-सुबह करने से सारी बीमारियाँ समाप्त होती हैं और मनुष्य 100 वर्ष की आयु को प्राप्त करता है।

प्राचीन मान्यताओं के आधार पर यदि कोई व्यक्ति हर रोज इन आठ अमर लोगों (अष्ट चिरंजीवी) के नाम भी लेता है तो उसकी उम्र लंबी होती है।


🙏 लेखक: कमलेश कुमार सती (स०अ०) 

  राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय चकलुवा

ब्लॉक-कोटाबाग

जनपद -नैनीताल





🙏संकलन :-टीम मिशन शिक्षण संवाद गढ़वाल-कुमाऊँ, उत्तराखण्ड

टिप्पणियाँ

  1. जय हनुमान जी 🙏
    बहुत सुंदर सर

    जवाब देंहटाएं
  2. आपके द्वारा इस कथा में जो कि हनुमान के से सम्बन्धित है में उनके गुणों का वर्णन विस्तार से किया गया है हम सभी लोग इसे पढ़कर अत्यंत अभिभूत हुए हैं ।

    जवाब देंहटाएं

एक टिप्पणी भेजें

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

होली - श्रीमती सुशीला थपलियाल

माँ तुम - श्रीमती वन्दना जोशी

गौचर मेला-श्री सरोज डिमरी