शिक्षा-दीक्षा - श्रीमती माया गुरुरानी

 प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है आज जनपद नैनीताल से शिक्षिका बहिन श्रीमती माया गुरुरानी जी की कविता:शिक्षा-दीक्षा 



शिक्षा-दीक्षा 


अक्षरों का ज्ञान हो,

शब्द की पहचान हो।

पुस्तकों के ज्योति-पुंज में,

ज्ञान का गुण-गान हो।।


शिक्षा की पतवार संग हम,

संसार सागर तर चले।

ना रहें आश्रित किसी पर,

बन स्वावलम्बी बढ़ चले।।


'येषां न विद्या, न तपो, न दानम,’

'मनुष्य रूपेण मृगाश्चरंति।'

वेदों में विवरण, शिक्षित की महिमा,

दानव से मानव, शिक्षा की गरिमा।।


अवसर तलाशें, विकसित हों,

जन मानस जिम्मेदार बनें।

साक्षरता की मशाल जलायें,

कुरीतियाँ सब खाक करें।।


जनसंख्या वृद्धि में नियन्त्रण,

लैंगिक समानता का भान हो।

बाल मृत्यु-दर हो कमतर,

समाज प्रतिष्ठावान हो।। 


मानवता की वयोवृद्धि हो,

कौशल बढ़ें, सम्पन्न हों।

कर्तव्यों के बोध के संग, 

अधिकारों का ज्ञान हो।। 


शिक्षा के आलोक में प्रमुदित,

'मिशन शिक्षण संवाद‘ हो।

'साक्षरता अभियान' सफल हो,

मानव-चेतना कीर्तिमान हो।।


माया गुरुरानी(स०अ०)

रा०आ० प्रा० वि० धौलाखेड़ा

हल्द्वानी, नैनीताल


🙏संकलन :-टीम मिशन शिक्षण संवाद गढ़वाल-कुमाऊँ, उत्तराखण्ड

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