श्री हनुमान जी एक निष्ठावान चरित्र-श्रीमती विजयलक्ष्मी

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में आज श्री हनुमानजी की पावन जयन्ती के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है जनपद नैनीताल से शिक्षिका बहिन श्रीमती विजयलक्ष्मी  जी का लेख:-


श्री हनुमान जी एक निष्ठावान चरित्र 

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    हमारा देश भारतवर्ष  दिव्य शक्तियों की मान्यता का देश है। भारतीय सनातन धर्म में हनुमानजी का विशेष स्थान है।




  हनुमान जी भगवान श्री राम के परम भक्त कहलाए जाते हैं। चैत्र महीने की पूर्णिमा के दिन अञ्जनी माता और महाराज केसरी ने बहुत तपस्या के पश्चात एक महान शक्तिशाली, महान तेजस्वी रुद्र अवतार के रूप में एक पुत्र रत्न को पाया।  ऐसा असाधारण  दिव्य बालक जो जन्म के कुछ  समय बाद ही अपनी भूख मिटाने के लिए बहुत बड़े आग के पुञ्ज सूर्यदेव को  फल समझकर निगल गया। सारी सृष्टि में घोर अंँधेरा छा गया। तभी देवराज इन्द्र ने अपने वज्र का प्रहार इस असाधारण बालक की ठुड्डी  (हनु )पर की। वज्र के प्रहार से बालक की ठुड्डी टेड़ी हो गयी। इसी से इनका नाम हनुमान पड़ गया।


हनुमान जी के और भी नाम हैं जैसे- मारुति, पवनपुत्र, शंकरसुवन, केसरीनन्दन आदि। हनुमानजी का जन्मोत्सव चैत्र पूर्णिमा को मनाया जाता है। हनुमानजी को महान बुद्धिमान और महान बलवान कहा जाता है। हनुमानजी संकटमोचन हैं। सभी विद्याओं के ज्ञाता हैं। अष्ट सिद्धियों और नौ निधियों के भण्डार हैं। भगवान श्रीराम जी के संकटों को हमेशा हनुमानजी ने ही दूर किया है।सुग्रीव से मित्रता कराना, सीता का पता लगाना, लंका में आग लगाना, संजीवनी बूटी लाना, अहिरावण को मार कर श्रीराम और लक्ष्मण को सुरक्षित बचाकर लाना, चौदह वर्ष के बाद भगवान श्रीराम-लक्ष्मण और सीता के वापस आगमन की सूचना सबसे पहले भरत को जाकर सुनाना।हनुमानजी हमारे महान प्रेरणा स्रोत हैं।माँ सीता जी के आशीर्वाद से वे अजर, अमर हैं।और भगवान श्रीराम को अति प्रिय हैं। हनुमानजी हम सबके लिये देवता हैं।

   

 किसी भी कठिन कार्य को सरल बनाने के लिए हुनुमानजी की उपासना बताई गई है। हनुमानजी थोड़ी सी पूजा से ही प्रसन्न हो जाते हैं।इनकी प्रसन्नता के लिए हनुमान चालीसा,हनुमानाष्टक,बजरंगबाण आदि का नियमित पाठ किया जा सकता है।

  हनुमानजी का स्मरण हमें शक्तिशाली बनाता है। हनुमानजी आत्म विश्वास और आत्म बल के प्रतीक हैं। हनुमानजी हमें हर संकट व समस्या का मुकाबला करना सिखाते हैं। वे हर कठिन समस्या के लिए चुनौती बन कर खड़े हो जाते हैं।

  हनु‌मानजी श्रीराम के परम भक्त होने  के साथ-साथ एक सच्चे देश भक्त भी हैं। उनमें सच्ची श्रद्धा,  समर्पण,  त्याग,  बलिदान, निस्वार्थ प्रेम, कर्तव्यनिष्ठा समाहित है।

इनके जीवन से हमें  शिक्षा मिलती है कि हमें अपने कर्तव्य के प्रति पूर्ण निष्ठावान और समर्पित होना चाहिए।और सदैव आत्मविश्वास के साथ जीना चाहिए।


विजयलक्ष्मी ( प्र०अ०) 

राजकीय प्राथमिक विद्यालय चंद्रनगगर

विकासखण्ड-रामनगर

जनपद-नैनीताल (उत्तराखण्ड)



🙏संकलन :-टीम मिशन शिक्षण संवाद गढ़वाल-कुमाऊँ, उत्तराखण्ड

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