दहेज और बेटियाँ-माधुरी नैथानी
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है आज जनपद पौड़ी से शिक्षिका बहिन श्रीमती माधुरी नैथानी जी द्वारा रचित कविता
दहेज और बेटियाँ
कब होगा खत्म लेने का सिलसिला,
कब होगा खत्म देने का सिलसिला।।
इस जहान में हर एक आदमी,
बस खाली हाथ आता है।
विश्व जीतने पर भी सिकन्दर ,
बस खाली हाथ जाता है।।
जिन्दगी के उपहार को,
खरीदने की कोशिश करते हैं।
सृष्टि के आधार को,
सोने-चाँदी से तोलते हैं।।
चलते हैं रोज अभियान,
वृक्षों को बचाया जाय।
करते हैं सब लोग आह्वान
धर्मों को बचाया जाय।।
वे अभियान क्यों नहीं चलते?
जिससे बेटियों को बचाया जाए।।
सभ्यता,धर्म व दुनिया,
जिस पर टिकी हुई है।
उसका मोल भाव न कर,
उसके अस्तित्व को बचाया जाय।।
🙏रचना:- माधुरी नैथानी (स० अ०)
रा० उ० प्रा० वि०भटौली,
ब्लॉक-खिर्सू, पौड़ी गढ़वाल
🙏संकलन :-टीम मिशन शिक्षण संवाद गढ़वाल-कुमाऊँ, उत्तराखण्ड

बहुत ही सुंदर एवं मन को छूने वाली रचना👍👍
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