किताबों का महत्व-श्रीमती रीता सेमवाल

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में विश्व पुस्तक एवं काॅपीराइट दिवस के सुअवसर पर प्रस्तुत है आज जनपद पौड़ी गढ़वाल से शिक्षिका बहिन श्रीमती रीता सेमवाल जी का लेख:-


किताबों का महत्व

किताबें वे मधुमक्खियाँ हैं जो एक से दूसरे मन तक त्वरित पराग ले जाती हैं।


 हर साल यूनेस्को विश्व पुस्तक दिवस मनाता है। इसके माध्यम से पुस्तक पढ़ने की आदत बनती है। कई लेखकों के जन्म वर्ष और मृत्यु वर्षगाँठ पर यह विश्व पुस्तक दिवस मनाया जाता है।

 स्पेन में 23 अप्रैल को फूल बाँटे जाते थे, बाद में लेखकों की याद में इसे पुस्तक दिवस के रूप में मनाया जाने लगा, और इस दिन फूलों की जगह पुस्तकों को बाँटा गया। इस दिन कहीं मुफ्त में किताबें, कहीं प्रतियोगिताएंँ और कहीं लेखन प्रतियोगिताएंँ आयोजित की जाती हैं। इसका मकसद बच्चों में पढ़ने के प्रति प्रोत्साहन जागृत करना है। किताबें हर किसी की जिन्दगी का हिस्सा होती हैं।


किताबें अकेलापन दूर करने के साथ-साथ ज्ञान में भी वृद्धि करती हैं। कहा भी गया है-किताबें मनुष्य की सबसे अच्छी मित्र होती हैं। 

विश्व पुस्तक दिवस मनाने का एकमात्र उद्देश्य किताबों के प्रति रुचि जागृत करना और दुनिया भर में साक्षरता को बढ़ावा देना है। किताबें हमारे भारत में पूजी जाती हैं, क्योंकि इसके हर पन्ने पर जीवन का अर्थ छिपा होता है। महात्मा गांधी जी को पुस्तकों से बहुत प्यार था। वे कहते थे अगर किसी को मुझे कुछ उपहार देना है तो वह मुझे पुस्तक उपहार के रूप में दें। पुस्तक पढ़ने से हमारा जीवन ही बदल जाता है। पढ़ने का शौक जीवन में सबसे बड़ा उपहार है। हमारी संस्कृति आज किताबों के द्वारा ही जिन्दा है।

वफा नजर नहीं आती कहीं जमाने में,

वफा का जिक्र किताबों में देख लेते हैं।

हर विद्यालय में पुस्तकालय होते हैं, जिनमें कहानियाँ कविताएंँ लेख और बहुत सारी जानकारी मिल जाती हैं। किताबें शिक्षक के रूप में काम करती हैं। पुस्तकें असीम ज्ञान का भण्डार होती हैं। पुस्तकों में ज्ञान, विज्ञान, भूगोल, गणित सभी का ज्ञान छिपा होता है, जो आने वाली पीढ़ी तक तमाम विषयों का ज्ञान ले जाती हैं।


पुस्तक दोस्त भी, शिक्षक भी और उस्ताद भी होती हैं। पुस्तकों में ज्ञान, वेद, उपनिषद का अनमोल संग्रह होता है। पुस्तक किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व विकास के साथ-साथ सम्पूर्ण मानव बनाने का काम करती हैं। किताबें बहुत कुछ कहती हैं। किताबें ही हर सवाल का जवाब होती हैं। किताबों के द्वारा ही हर मुश्किल आसान होती है। सारे विश्व का विकास किताबों द्वारा ही होता है, और एक अच्छा इन्सान बनने की प्रेरणा भी मिलती है। 

किताबें साधन है नई खोज की नई सोच की, किताबों से ज्ञान व समाधान मिलता है।


इस दिवस को विश्व पुस्तक दिवस के साथ ही कॉपीराइट दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों और किताबों के बीच की दूरी को कम करना और किताबों की ओर आकर्षित करना है। आज किताबों का स्थान कम्प्यूटर और इण्टरनेट ने ले लिया है।


 आज लोग किताबों के स्थान पर  इण्टरनेट का उपयोग करने लगे हैं। पुस्तकों से जीवन सफल बनता है। हमारी बौद्धिक, तार्किक, काल्पनिक और रचनात्मक क्षमता का विकास पुस्तकें ही करती हैं। 

हमारे सामाजिक, राजनैतिक और साहित्यिक क्षमताओं का संवर्द्धन भी पुस्तकों से ही सम्भव है। 

आज की इस कोरोना महामारी के दौर में किताबें बहुत सहायक सिद्ध हुई हैं। पढ़ने के शौकीन लोग ने अपना समय इस महामारी में अकेलापन दूर करने के साथ ही ज्ञान का अमूल्य भण्डार अर्जन करने में लगाया है। अन्त में यही कहूँगी कि हमारे विश्व  क्षितिज के विकास में किताबों का बहुत बड़ा योगदान है। अतः पुस्तकों के प्रति पढ़ने का महत्व महसूस करना साहित्य के प्रति आजीवन प्रेम उत्पन्न करना है विश्व पुस्तक दिवस का उद्देश्य है।


ज्ञान की यह खान है, 

होती बहुत महान है। 


 

🙏लेखिका:-

 रीता सेमवाल  (प्र०अ०) 

 राजकीय प्राथमिक विद्यालय नीलकण्ठ

 विकास खण्ड-यमकेश्वर

 जनपद-पौड़ी गढ़वाल



🙏संकलन :-टीम मिशन शिक्षण संवाद गढ़वाल-कुमाऊँ, उत्तराखण्ड

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