माँ और ममता - श्री कमल सिंह बिष्ट
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में आज प्रस्तुत है जनपद रुद्रप्रयाग से शिक्षक साथी श्री कमल सिंह बिष्ट जी का लेख:-
माँ और ममता
माँ हम सभी के जीवन का वह बहुमूल्य मोती है जिसका कोई विकल्प नहीं...! यह हमारा अनमोल हीरा है।
माँ हमें जीवन प्रदान कर प्रकाश देने वाली अद्भुत शक्ति है। जिसको भी अपनी माँ की ममता और प्यार मिल गया समझो उसे संसार का सबसे बड़ा खजाना मिल गया। जिसने मांँ को प्रसन्न कर लिया उसने भगवान को प्रसन्न कर लिया। परमपिता परमेश्वर ने भी सृष्टि की रचना माँ के वात्सल्य और असीम प्यार की अनुपम कृपा से ही की है। मांँ हमेशा ही अपने बच्चों के रास्ते पर आंँखें विछाती है। उसका हृदय हमेशा ही वात्सल्य से ओत-प्रोत होता है। माँ ही हमारी पहली गुरू होती है। मांँ एक ऐसा वट वृक्ष है जिसकी छत्र छाया में स्वर्ग है।
जब किसी पौधे की जड़ खराब या सूख जाती है तो वह पौधा मुरझा जाता है। लेकिन माँ रूपी पौधा तब मुरझाता है जब इस मांँ रूपी पौधे के फूलों को आंँच लगती है। अर्थात जब मांँ के बच्चों को तकलीफ होती है तो मांँ रूपी पौधा कुम्लहा जाता है।
मांँ के बारे में किसी ने भगवान से प्रश्न किया है- कि यह माँ कौन है..? मां क्या है...? तब भगवान ने कहा कि- मांँ मेरी ओर से सबसे अधिक मूल्यवान और दुर्लभ वरदान है। मांँ का हृदय समुद्र से भी अधिक विशाल और गहरा है।
समुद्र ने भी मांँ की प्रशंसा करते हुए कहा है कि -मांँ एक ऐसी सीपी है जो अपनी सन्तान के लाखों रहस्यों को अपने सीने में छुपाए हुए हैं। मांँ ममता की वो अनमोल निधि है जो हर सीने पर अंकित है।
जब मानव को पैदा कर भगवान उसे मृत्यु लोक में भेजने लगे तब भगवान ने उससे कहा कि अब मैं तुम्हें मृत्यु लोक में मांँ के रूप में मिलूंँगा।
भगवान शिव ने भी मांँ की ममता पर प्रसन्न होकर अपने दरबार में कहा था कि मुझे मांँ और कुल में कोई अन्तर नहीं दिखाई देता।
मांँ एक ऐसी चमक है जो प्रत्येक रंग में है जिसके द्वारा प्रत्येक रंग अपना निखार दिखाता है। बच्चा भी सबसे पहले मांँ शब्द का ही उच्चारण करता है। मांँ के बिना घर नीरस है। मांँ के कदमों तले स्वर्ग है। उसकी अवज्ञा करना उसको पीड़ा पहुंँचाना सबसे बड़ा अपराध है। माँ की अवज्ञा करने वाला उसको पीड़ा देने वाला दुनिया में कभी सुखी नहीं रह सकता है।
मांँ ही दुनिया की सबसे बड़ी हस्ती है उसको दुःख और पीड़ा देकर उसके गुस्से से बचो...क्यों कि भगवान और मांँ के बीच कोई पर्दा नहीं है। मांँ से बड़ा गुरू दुनिया में दूसरा कोई नहीं है।उसके मुँह से निकली हर दुआ कबूल होती है।
माँ का आशीर्वाद जीवन की सफलता का राज है। मांँ के गुणों की कोई सीमा नहीं इन्हें शब्दों में नहीं बांँधा जा सकता है। मानव ही नहीं ब्रह्मा,विष्णु, महेश शेषनाग भी हजारों मुखों से दिन-रात जग-जननी ,जगत मां जगदम्बा की स्तुति करते नहीं थकते........।
🙏लेखक:कमल सिंह विष्ट (स०अ०)
रा० उ० प्रा० वि० जखनोली
ब्लॉक-जखोली, जनपद-रुद्रप्रयाग
🙏संकलन :-टीम मिशन शिक्षण संवाद गढ़वाल-कुमाऊँ, उत्तराखण्ड

बहुत सुन्दर
जवाब देंहटाएंआलेख
बेहतरीन। 😊🙏
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