भारत में प्रौद्योगिकी के बढ़ते कदम-डाॅ० गीता नौटियाल
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में आज राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के सुअवसर पर प्रस्तुत है जनपद रुद्रप्रयाग से शिक्षिका बहिन डाॅ० गीता नौटियाल जी का लेख:-
भारत में प्रौद्योगिकी के बढ़ते कदम
आदिकाल से 21वीं सदी की इस आधुनिकता के दौर तक मनुष्यता को प्रगति के पथ पर लाने वाली प्रौद्योगिकी ही है। मानव जीवन का कोई भी क्षेत्र आज इससे अछूता नहीं है। आज के दौर में जब महामारी फैली हुई है तब एक प्रौद्योगिकी ही है जिससे पूरा विश्व मदद ले रहा है।
उपकरण और तकनीकी ने मानव जीवन को नया विस्तार दिया है। भारत ने आजादी के बाद से प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में लगातार नए मुकाम हासिल किए हैं।
इसी क्रम में एक बहुत बड़ी उपलब्धि थी; जब 11 मई 1998 में राजस्थान के पोखरण में मिसाइल मैन अब्दुल कलाम की अगुवाई में परमाणु परीक्षण किया गया। जिसके बाद भारत दुनिया का परमाणु क्लब में शामिल होने वाला छटा देश बन गया।
अटल बिहारी वाजपेयी जी ने जय जवान जय किसान के बाद "जय जवान जय किसान जय विज्ञान" का नारा दिया। आज विज्ञान प्रौद्योगिकी मानव जीवन का संरक्षण कर रही है, हम इस कोरोना काल में देख पा रहे हैं। आज हम बिना प्रौद्योगिकी के मानव जीवन के अस्तित्व की कल्पना भी नहीं कर सकते हैं।
प्रौद्योगिकी के प्रकार कुछ इस प्रकार से हैं-
1-सूचना प्रौद्योगिकी
2-यान्त्रिक प्रौद्योगिकी
3-व्यापार प्रौद्योगिकी
4-चिकित्सीय प्रौद्योगिकी
5-संचार प्रौद्योगिकी
6-शिक्षा प्रौद्योगिकी
भारत की प्रौद्योगिकी के क्षेत्र की कुछ अग्रगण्य उपलब्धियां इस प्रकार से हैं-
भारत के पास अपना Indian National Satellite system है जो भारत को चुने हुए देशों में शामिल करता है।
भारत ने INS अरिहन्त नाम से परमाणु पनडुब्बी लॉन्च करने वाले केवल पाँच देशों में से एक स्थान हासिल किया।
भारत सूचना प्रौद्योगिकी सेवाओं के लिए सबसे बड़ा केंद्र है। एक रिपोर्ट से पता चला कि दुनिया की शीर्ष 20 सर्वश्रेष्ठ सूचना प्रौद्योगिकी कम्पनियों में से 5 कम्पनियाँ भारतीय हैं। इन कंपनियों में टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो, कॉग्निजेण्ट और एचसीएल प्रौद्योगिकियाँ शामिल हैं।
भारत में दुनिया में सौर ऊर्जा की सबसे अधिक प्रतिस्पर्धी और सबसे कम प्रति यूनिट लागत है।
यहाँ भी भारत की उपलब्धि सर्वोपरि है।
इसरो के भारत अन्तरिक्ष अनुसन्धान संगठन ने अपने विशेषज्ञ कौशल का प्रदर्शन किया। जब उन्होंने एक ही रॉकेट पर 104 उपग्रहों का रिकॉर्ड लॉन्च किया। इससे जटिल मिशनों को सम्भालने की उनकी क्षमता प्रदर्शित हुई। दिलचस्प बात यह है कि किसी भी मिशन में अब तक लॉन्च किए गए उपग्रहों में से यह सबसे अधिक संख्या है।
'चन्द्रयान -2' चन्द्रयान-1 के बाद भारतीय अन्तरिक्ष अनुसंधान संगठन द्वारा विकसित दूसरा चन्द्र अन्वेषण मिशन है। इसमें एक चन्द्र कक्ष शामिल है, और इसमें विक्रम लैंडर और प्रज्ञान चन्द्र रोवर भी शामिल हैं, जो सभी भारत में विकसित किए गए थे।
भारत एकमात्र ऐसा देश है, जो मंगल पर पहुँचने के पहले सफल प्रयास के साथ है। मार्स ऑर्बिटर मिशन ने अपने पहले प्रयास में मंगल ग्रह पर पहुँचने के लिए भारत को दुनिया का एकमात्र राष्ट्र बनाया।
मंगल यान-1 एक स्वदेश निर्मित अन्तरिक्ष यान है। इस उपलब्धि के साथ, अब हम एशिया में पहले और दुनिया में चौथे स्थान पर पहुँच गये हैं जो स्वयं में एक श्रेष्ठ अहसास है।
वर्तमान वर्ष 2021 राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस की थीम ''एक सतत भविष्य के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी' है।
🙏लेखक:-डॉ.गीता नौटियाल (स०अ०)
रा०उ०प्रा०वि०बैनोली भरदार विकासखण्ड - जखोली
जनपद - रुद्रप्रयाग
उत्तराखण्ड
🙏संकलन :-टीम मिशन शिक्षण संवाद गढ़वाल-कुमाऊँ, उत्तराखण्ड

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