न्यारा उत्तराखण्ड-श्रीमती कुलवन्ती रावत

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला  हिम मन मन्थन में  प्रस्तुत है आज जनपद उत्तरकाशी से शिक्षिका बहिन श्रीमती  कुलवन्ती रावत जी की कविता:-



न्यारा उत्तराखण्ड 


आओ बच्चों तुम्हें दिखाएँ,

झाँकी उत्तराखण्ड की।

यहाँ अनुभूति होती है,

हमें पृथ्वी पर स्वर्ग की।।



जहाँ पर चारों धाम बसे हैं,

हिमालय की गोद में।

जिनका राज जानने,

सभी लगे हैं शोध में।।


जहाँ पर वीर सुमन जी जैसे,

हुए माता के वीर हैं।

ऐसी भूमि पर जन्मे,

ये हमारी तकदीर है।।


जहाँ पर जन्मे कई बलिदानी,

बेटे फौजी वीर हैं।

जिन लोगों ने लिख दी देखो,

उत्तराखण्ड की तकदीर है।।


जहाँ के बेटे शहीद हो रहे,

भारत माता की खातिर।

हमको मिलकर ढूँढने होंगे,

उन शहीदों के कातिल।।


गंगा-यमुना नदियाँ यहाँ,

बढ़ाती उत्तराखण्ड की शान हैं।

यहाँ की धरोहर संस्कृति पर,

तन-मन-धन कुर्बान है।।


देवभूमि यह उत्तराखण्ड है,

यह बात सभी लोग कहते हैं।

पूर्वज, अग्रज को ईश मानकर,

स्नेह भाव से सब रहते हैं।।


जहाँ अतिथि देवतुल्य हैं,

घर आने पर पूजे जाते हैं।

निश्छल भाव से लोग यहाँ पर,

दूर-दूर से आते हैं।।


कुलवन्ती रावत (प्र०अ०)

रा० प्रा० वि० धिवरा

ब्लॉक-पुरोला, उत्तरकाशी


🙏संकलन :-टीम मिशन शिक्षण संवाद गढ़वाल-कुमाऊँ, उत्तराखण्ड

टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

होली - श्रीमती सुशीला थपलियाल

माँ तुम - श्रीमती वन्दना जोशी

गौचर मेला-श्री सरोज डिमरी