सुमाड़ी के पन्थ्या दादा-श्रीमती पुष्पा बहुगुणा
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में प्रस्तुत है आज जनपद टिहरी गढ़वाल से शिक्षिका बहिन श्रीमती पुष्पा बहुगुणा जी की कविता:-
सुमाड़ी के पन्थ्या दादा
गढ़ जिले के बीच में ऐसा सुमाड़ी ग्राम,
बाल वीर वहाँ पैदा हुआ पन्थ्या था जिनका नाम।
1676 में राजा शाह थे टिहरी का था दरबार,
सलाह मशविरा के लिए कुछ मन्त्री थे चाटुकार।।
सुमाड़ी गाँव के लिए षड्यन्त्र शुरू किया,
उन्हें नीचा दिखाने के लिए जघन्य कृत्य किया।
आहुति देने की बारी पूर्णानन्द काला की आई,
पति-पत्नी ने पहले बलि देने की होड़ लगाई।।
यह सब सुनकर पन्थ्या का दिल भर आया,
आहुति देने की मन्शा भैया-भाभी को बताई।
अबोध बच्चों को माँ-बाप का चाहिए प्यार-दुलार,
इसलिए मेरी प्रार्थना कर लीजिए स्वीकार।।
यह सुनकर परिवार की आँखें डबडबाई।
गाँव वालों ने भरे मन से दी पन्थ्या को विदाई।।
गौरा की जात देने की बात पन्थ्या ने बताई,
मुझे याद रखना हमेशा ऐसी इच्छा जताई।।
पठगाण के पीछे तोक पिपलकोट है नाम,
राजा का भाड़ झोंका था दरबारी तमाम।
सज-धज कर गौरा की परिक्रमा कर आया,
अग्नि में समाधि लेकर पन्थ्या अमर हो गया।।
🙏रचना:-
पुष्पा बहुगुणा (स०अ०)
रा० उ० प्रा० वि० पिपोला
ब्लॉक-जाखणीधार, टिहरी गढ़वाल
🙏संकलन :-टीम मिशन शिक्षण संवाद गढ़वाल-कुमाऊँ, उत्तराखण्ड

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