श्री गंगा सप्तमी-माधव सिंह नेगी
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में गंगोत्पत्ति पावन पर्व पर प्रस्तुत है आज जनपद रुद्रप्रयाग से शिक्षक साथी श्री माधव सिंह नेगी जी की कविता:-
गंगा सप्तमी
राजा सगर के साठ हजार पुत्र,
कपिलमुनि के शाप से शापित थे।
उनका उद्धार करने के लिए,
राजा भगीरथ गंगा जी को लाये थे।।
राजा भगीरथ ने तप करके,
ब्रह्मा जी को प्रसन्न किया।
ब्रह्मा जी ने राजा भगीरथ का,
उचित मार्गदर्शन इस तरह किया।।
तीव्र वेग से गंगा जब धरती पर गिरेगी,
अवश्य ही जोश में तहस-नहस कर देगी।
करो प्रसन्न कैलाशपति शिवजी को,
वे ही शान्त कर पायेंगे गंगा जी को।।
कठोर तप में बैठे भगीरथ जी,
प्रसन्न हुए तब भोले शिव जी।
दर्शन दिये यह स्वीकार किया,
थाम लूँगा गंगा को आश्वस्थ किया।।
पावन बैशाख शुक्ल सप्तमी तिथि,
विष्णुपदी माँ गंगा चल पड़ी,
ब्रह्मलोक से आती पावन भू पर।
शिवजी ने थाम लिया उन्हें जटा पर।।
वेग नहीं सह सकती थी धरा,
इसलिए शिव ने बाँध लिया।
माँ गंगा के वेग को इस दिन,
शिव ने जटाओं में थाम लिया।
थे व्यथित देव कारण था गंगा मैया का वेग,
देवों की व्यथा हर गये महादेव।
माँ गंगा के तीव्र वेग को जटा में समेट लिया,
शिवजी ने अपनी जटाओं में थाम लिया।।
🙏रचना:-
माधव सिंह नेगी (प्र०अ०)
रा० प्रा० वि० जैली
ब्लॉक-जखोली, जनपद-रुद्रप्रयाग
🙏संकलन :-टीम मिशन शिक्षण संवाद गढ़वाल-कुमाऊँ, उत्तराखण्ड
शानदार
जवाब देंहटाएंमां गंगा की अविरल धारा की तरह आपकी लेखनी भी अविरल गतिमान रहे।
जवाब देंहटाएंशब्द चयन की जो क्षमता आपके ऊपर है वही सर्वोच्च सकती है कोई विचार है कोई मंथन है जय हिंदी
जवाब देंहटाएंआप सभी का हृदय की गहराइयों से आभार व धन्यवाद
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